उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में कांवड़ यात्रा के दौरान एक ऐसा भावुक और प्रेरणादायक नजारा देखने को मिला, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया. सोनकपुर थाना क्षेत्र के मुड़िया जैन गांव निवासी राकेश अपने दोनों बेटों रितेश और लकी के साथ अपने 90 साल के पिता राम कुंवर और 85 साल की माता रामकली को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से गंगाजल लेने पहुंचे.
करीब 180 किलोमीटर का सफर तय करके राकेश और उनके दोनों बेटों ने पूरी यात्रा अपने माता-पिता को कंधों पर बैठाकर पूरी की. जहां-जहां से यह परिवार गुजरा, लोग रुककर इस भावुक दृश्य को देखते रहे और अपने मोबाइल फोन में वीडियो बनाते नजर आए. कई लोगों ने राकेश की तुलना आधुनिक दौर के श्रवण कुमार से की है.
'थकान और दर्द नहीं महसूस हुआ...'
राकेश ने बताया कि उनके मन में अपने बूढ़े माता-पिता को कांवड़ यात्रा कराने का विचार आया. इसके बाद उन्होंने अपने दोनों बेटों के साथ मिलकर खास कांवड़ तैयार की और अपने माता-पिता को उसमें बैठाकर हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौटे. उन्होंने कहा कि इस सेवा से उन्हें कोई थकान या दर्द महसूस नहीं हुआ, बल्कि माता-पिता की सेवा कर उन्हें बेहद खुशी और संतोष मिला.
वहीं, राकेश के बेटे रितेश और लकी ने बताया कि दादा-दादी को कांवड़ यात्रा कराने का मौका मिलना उनके लिए गर्व की बात है. उन्होंने कहा कि चार दिन का सफर पूरा करने के बाद अब वे अपने गांव मुड़िया जैन पहुंच रहे हैं और पूरा परिवार इस यात्रा से बेहद खुश है.
(Input: Mirza Ghalib from Moradabad)
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं