दिल्ली कैबिनेट ने प्राइवेट यूनिवर्सिटी बिल को मंजूरी दे दी है. अब इस बिल को दिल्ली विधानसभा में पेश किया जाएगा. बिल में दिल्ली में प्राइवेट यूनिवर्सिटी की स्थापना और संचालन से लेकर एडमिशन, छात्रों के हित और सरकारी निगरानी तक कई अहम प्रावधान किए गए हैं.
बिल का एक बड़ा प्रावधान दिल्ली के छात्रों से जुड़ा है. इसके तहत हर कोर्स की 25 फीसदी सीटें दिल्ली के छात्रों के लिए रिजर्व रखी जाएंगी. इन सीटों पर एडमिशन दिल्ली सरकार की मौजूदा आरक्षण नीति के मुताबिक होगा.
क्या बोले शिक्षा मंत्री?
शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि सरकार का मकसद दिल्ली में ही गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के विकल्प बढ़ाना है, ताकि छात्रों को अच्छी पढ़ाई के लिए दिल्ली से बाहर या विदेश न जाना पड़े. आशीष सूद ने कहा, 'हमने प्राइवेट यूनिवर्सिटी बिल को मंजूरी दी है. हमने देखा है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए माता-पिता को अपने बच्चों को दिल्ली के बाहरी इलाकों और यहां तक कि विदेश भी भेजना पड़ता है. अब ये सुविधाएं दिल्ली के अंदर ही उपलब्ध होंगी.'
दिल्ली के छात्रों के लिए 25% सीटें, क्या-क्या है बिल में?
बिल के मुताबिक, दिल्ली सरकार नोटिफिकेशन जारी कर प्राइवेट यूनिवर्सिटी स्थापित करने की अनुमति दे सकेगी. यूनिवर्सिटी को UGC और दूसरी वैधानिक रेगुलेटरी संस्थाओं के नियमों और मानकों का पालन करना होगा. प्राइवेट यूनिवर्सिटी केवल यूनिटरी मॉडल पर काम करेंगी. यानी वे दूसरे कॉलेजों को अपने साथ एफिलिएट नहीं कर सकेंगी. हालांकि, जरूरत के मुताबिक दिल्ली में अतिरिक्त कैंपस, रीजनल सेंटर और स्टडी सेंटर खोले जा सकेंगे.
हर कोर्स में दिल्ली के छात्रों के लिए 25 फीसदी सीटों का प्रावधान किया गया है और इन सीटों पर एडमिशन GNCTD की मौजूदा आरक्षण नीति के मुताबिक होगा.
30 साल की जमीन या लीज जरूरी, UGC के नियम भी मानने होंगे
प्राइवेट यूनिवर्सिटी स्थापित करने वाली स्पॉन्सरिंग बॉडी के पास जरूरी जमीन का वैध मालिकाना हक या कम से कम 30 साल की वैध लीज होना जरूरी होगा. यूनिवर्सिटी को शैक्षणिक भवन, लैब, लाइब्रेरी, डिजिटल रिसोर्स और छात्रों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी. शिक्षकों और दूसरे अकादमिक स्टाफ की नियुक्ति भी UGC के मानकों के मुताबिक करनी होगी.
यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक ढांचे में विजिटर, चांसलर, वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार, कंट्रोलर ऑफ फाइनेंस और कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन जैसे पद होंगे. अकादमिक काउंसिल और बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट यूनिवर्सिटी के संचालन और अकादमिक फैसलों के लिए जिम्मेदार होंगे.
सरकार की रहेगी कड़ी नजर, ‘फ्लाई-बाय-नाइट' संस्थानों पर भी लगाम
बिल में प्राइवेट यूनिवर्सिटी पर सरकारी निगरानी के लिए भी अहम प्रावधान किए गए हैं. उच्च शिक्षा मंत्री यूनिवर्सिटी के विजिटर होंगे. विजिटर को यूनिवर्सिटी से जानकारी मांगने, निरीक्षण कराने और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में निर्देश जारी करने का अधिकार होगा. जरूरत पड़ने पर यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक, अकादमिक और वित्तीय मामलों की जांच भी कराई जा सकेगी.
बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट में वाइस चांसलर के अलावा DHE/DTTE के सचिव या उनकी ओर से नामित अधिकारी शामिल होंगे. सरकार से जुड़े मामलों पर फैसला लेते समय संबंधित सरकारी अधिकारी की मौजूदगी जरूरी होगी.
बिल पर विचार के दौरान विभागों ने ‘फ्लाई-बाय-नाइट' संस्थानों को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आने से रोकने के लिए मजबूत रेगुलेटरी सिस्टम पर भी जोर दिया है. प्राइवेट यूनिवर्सिटी को UGC, AICTE, NMC, BCI, NCTE, PCI और ICAR समेत संबंधित रेगुलेटरी संस्थाओं के नियमों के मुताबिक काम करना होगा. विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ अकादमिक सहयोग भी UGC के नियमों के मुताबिक ही किया जा सकेगा.
दिल्ली सरकार का कहना है कि राजधानी में फिलहाल प्राइवेट यूनिवर्सिटी के लिए अलग कानून नहीं है. प्रस्तावित बिल का मकसद इसी कमी को दूर करना और दिल्ली में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के ज्यादा विकल्प उपलब्ध कराना है.
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