विज्ञापन

Success Story: देसी मुर्गों के दम पर बने करोड़पति! छोड़ी बैंक वाइस प्रेसिडेंट की नौकरी, 18 लाख का पैकेज

नोएडा ग्री फार्म के अरव‍िंद कुमार श्रीवास्‍तव की सक्‍सेस्‍ट स्‍टोरी कमाल की है. इन्‍होंने 18 लाख का पैकेज छोड़ ग्रेटर नोएडा में देशी मुर्गी पालन शुरू किया. एमबीए पास अरविंद आज सोनाली व ब्लैक एस्ट्रोलॉर्प नस्ल के मुर्गा-मुर्गी फार्म से सालाना 80 लाख का टर्नओवर और 36 लाख की शुद्ध कमाई कर रहे हैं.

Success Story: देसी मुर्गों के दम पर बने करोड़पति! छोड़ी बैंक वाइस प्रेसिडेंट की नौकरी, 18 लाख का पैकेज
success story Noida Agri Farm poultry farming Free Range Desi Murgi Palan
Arvind Kumar Srivastava
  • अरविंद कुमार श्रीवास्तव ने MBA के बाद बैंक और इंश्योरेंस कंपनियों में लगभग दस वर्षों तक काम किया
  • कोविड महामारी के दौरान बंद हुए प्ले स्कूल के बाद अरविंद ने देशी मुर्गी पालन में निवेश कर नया व्यवसाय शुरू किया
  • ग्रेटर नोएडा के दतावली गांव में शुरू किया गया फार्म 22 लाख रुपये निवेश से 80 लाख के टर्नओवर तक पहुंचा गया

Success Story: पहले एमबीए की डिग्री हासिल की. इसके बाद बैंक और इंश्योरेंस कंपनियों में लगभग एक दशक तक नौकरी की. वाइस प्रेसिडेंट के पद और 18 लाख रुपये के सालाना पैकेज तक पहुंचे, लेकिन दिल में 'अपना बिजनेस' करने की ख्वाहिश ने उन्हें आज ग्रेटर नोएडा के सबसे बड़े मुर्गी फार्म मालिकों में से एक बना दिया. यह सफलता की कहानी है अरविंद कुमार श्रीवास्तव की, जो देशी ब्राउन अंडों और मुर्गे-मुर्गियों के कारोबार से छप्परफाड़ कमाई कर रहे हैं.

कॉरपोरेट करियर से प्ले स्कूल तक का सफर

उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के रहने वाले अरविंद कुमार श्रीवास्तव की सक्‍सेस स्‍टोरी भी ठीक उसी तरह शुरू हुई, जैसे दिल्ली-एनसीआर में उन तमाम लोगों की होती है जो छोटे शहरों और कस्बों से प्रोफेशनल डिग्री लेकर नौकरी करने आते हैं और फिर प्राइवेट नौकरी में जिंदगी खपाने के बजाय खुद का व्यवसाय स्थापित करने में सफल हो पाते हैं. 

success story

success story Noida Agri Farm poultry farming Free Range Desi Murgi Palan

मास‍िल तनख्‍वाह 1.5 लाख रुपये

NDTV से खास बातचीत में अरविंद कुमार बताते हैं कि उन्होंने साल 2001-2003 में अपना एमबीए पूरा किया. इसके बाद इंडसइंड बैंक, एचडीएफसी, कोटक महिंद्रा और बजाज फाइनेंस जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में काम किया. इस दौरान वे असिस्टेंट ब्रांच मैनेजर से लेकर ब्रांच मैनेजर, क्लस्टर हेड और अंततः वाइस प्रेसिडेंट के पद तक पहुंचे. दिल्ली-एनसीआर के मार्केट में लगभग 10 साल बिताने के दौरान 20-30 हजार रुपये से शुरू हुई उनकी मासिक तनख्वाह 1.5 लाख रुपये (18 लाख रुपये सालाना पैकेज) तक पहुंच गई थी.

कोविड की चुनौती को बनाया अवसर

दस साल तक प्राइवेट नौकरी करने के बाद अरविंद ने खुद का काम शुरू करने के मकसद से नौकरी छोड़ दी. साल 2013 में उन्होंने नोएडा में ही एक प्ले स्कूल खोला, जो काफी अच्छा चलने लगा और इससे बेहतरीन कमाई होने लगी. हालांकि, कोविड महामारी के दौरान स्कूल पर ताला लग गया और उसे दोबारा शुरू नहीं किया जा सका. 

success story

success story Noida Agri Farm poultry farming Free Range Desi Murgi Palan

इसके बावजूद अरविंद ने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने इस आपदा को अवसर में बदला और अगले दो-तीन सालों तक नोएडा व दिल्ली-एनसीआर के मार्केट का गहन सर्वे किया. उन्होंने यह पता लगाया कि यहां के लोग चिकन और अंडों में सबसे ज्यादा क्या पसंद करते हैं और बाजार में किस चीज की कितनी डिमांड है.

22 लाख के निवेश से 80 लाख का टर्नओवर

मार्केट सर्वे पूरा करने के बाद अरविंद कुमार ने साल 2021-2022 में ग्रेटर नोएडा के दादरी ब्लॉक स्थित दतावली (बोड़ाकी) गांव में 'नोएडा ग्री फार्म' नाम से देशी अंडा व मुर्गा फार्म की नींव रखी. उन्होंने लगभग 22 लाख रुपये के शुरुआती निवेश के साथ सोनाली और ब्लैक एस्ट्रोलॉर्प नस्ल के मुर्गा-मुर्गियों का पालन शुरू किया.

शुरुआत में उनके पास केवल एक शेड और 4,500 मुर्गा-मुर्गियां थीं. आज उनके फार्म में दो बड़े शेड हैं और मुर्गा-मुर्गियों की संख्या बढ़कर 12,000 तक पहुंच गई है. वर्तमान में उनका सालाना टर्नओवर 70 से 80 लाख रुपये तक पहुंच चुका है और सभी खर्चे निकालने के बाद वे सालाना लगभग 36 लाख रुपये की शुद्ध कमाई कर रहे हैं.

success story

success story Noida Agri Farm poultry farming Free Range Desi Murgi Palan

नए उद्यमियों के लिए सफलता के मूलमंत्र

अरविंद कुमार के अनुसार, फ्री रैंक देशी मुर्गी पालन से बहुत अच्छी कमाई की जा सकती है, लेकिन इसके लिए शर्त यह है कि आप खुद अपने फार्म पर रहकर मेहनत करें और इसे किसी दूसरे के भरोसे न छोड़ें. इसके अलावा, अपने आसपास के इलाकों का मार्केट सर्वे जरूर करें ताकि यह पता चल सके कि आप जिस नस्ल का पालन कर रहे हैं, उसकी कहां और कितनी मांग है.

वे बताते हैं कि दिसंबर से फरवरी के सर्दियों के महीनों में तो कोई भी अंडा या मुर्गा आसानी से बेच लेता है, लेकिन असली चुनौती मई, जून और जुलाई के गर्मी के महीनों में आती है, जब बाजार में मांग घटकर आधी से भी कम रह जाती है. ऐसे समय में सही रणनीति और मार्केट समझ ही बिजनेस को टिकाए रखती है. 

यह भी पढ़ें-  IAS अपूर्वा पाण्‍डे उत्तराखंड की सबसे युवा कलेक्टर, जान‍िए 'मन्नू' से यंगेस्‍ट DM बनने तक की पूरी कहानी 

यह भी पढ़ें- Success Story: Gen Z IPS शैलजा दास के वायरल VIDEO से मचाया गदर! 23 की उम्र में क्रैक की UPSC

यह भी पढ़ें- Success Story: किसान की बेटी IAS मिशा सिंह बनीं जिला कलेक्टर, बताया-कैसे हैंडल करती हैं पॉलिटिकल प्रेशर?

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Success Story, Poultry Farming, Greater Noida, Bussiness
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com