Arshad Nadeem in CWG 2026: पाकिस्तान के जैवलिन थ्रोअर अरशद नदीम कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जीत के बड़े दावेदार के तौर पर उतरे थे, लेकिन उनका सफर निराशाजनक रहा. कॉमनवेल्थ गेम्स में जैवलिन थ्रो फाइनल इवेंट से पहले भारत और पाकिस्तान के फैन्स के बीच इस मुकाबले का ब्रेसब्री से इंतजार था. एक ओर जहां फाइनल में भारत के नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर के अपने सीजन-बेस्ट थ्रो के साथ सिल्वर मेडल जीता, वहीं नदीम कोई खास कमाल नहीं दिखा पाए और फाइनल से जल्दी बाहर होने के बाद टॉप पोजीशन भी हासिल नहीं कर पाए.
नदीम का खराब प्रदर्शन हैरान करने वाला था क्योंकि वह मौजूदा कॉमनवेल्थ चैंपियन और दुनिया के बेहतरीन जैवलिन थ्रोअर्स में से एक के तौर पर ग्लासगो पहुंचे थे. उनसे और नीरज चोपड़ा के बीच एक और जबरदस्त मुकाबले की उम्मीद थी. हालांकि, यह मुकाबला उस रोमांच तक नहीं पहुंच पाया जिसकी उम्मीद हम कर रहे थे. पाकिस्तानी स्टार शुरुआत से ही संघर्ष करते दिखे और शुरुआती राउंड के बाद ही बाहर हो गए.

इसके उलट, नीरज ने चोट से जूझते हुए भी ज़बरदस्त जज़्बा दिखाया.भारतीय सुपरस्टार ने 85.83 मीटर का अपना बेस्ट थ्रो करके सिल्वर मेडल जीता और 2018 में गोल्ड जीतने के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स में अपना दूसरा मेडल हासिल किया.
अरशद का कैसा रहा थ्रो
अरशद का पहला प्रयास फाउल हो गया. इसके बाद दूसरे प्रयास में नदीम ने 77.41 मीटर का थ्रो किया, उनके थ्रो को देखकर समझा जा सकता था कि उनके अंदर का जो जोश पेरिस ओलंपिक में दिखा था वह यहां नहीं दिखा, वहीं, तीसरे प्रयास में 75.39 मीटर का थ्रो करने में ही कामयाब रहे लेकिन तीसरे राउंड के खत्म होने पर वह 9वें नंबर रहे. जिसके कारण उनका सफर फाइनल तक नहीं पहुंच सका और वह फाइनल राउंड से पहले ही बाहर हो गए.
कहां हुई पाक स्टार से चूक?
नदीम के खराब प्रदर्शन की सबसे बड़ी वजह मुश्किल हालात में लय न बना पाना था. जहां श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरागे ने हालात के हिसाब से खुद को बेहतरीन ढंग से ढाला और 89.75 मीटर का विनिंग थ्रो किया, वहीं नदीम कोई प्रतिस्पर्धी स्कोर नहीं बना पाए और मेडल की दौड़ में कभी शामिल नहीं हो सके.
तेज हवा वाले मौसम में ढलने में मुश्किल
जैवलिन का फाइनल मुश्किल और तेज हवा वाले मौसम में हुआ, जिससे कई थ्रोअर्स पर असर पड़ा.
शुरुआत से ही रिदम की कमी
नदीम कभी भी टूर्नामेंट में सहज नहीं दिखे और शुरुआती राउंड में कोई बड़ा थ्रो नहीं कर पाए.
उम्मीदों का दबाव
वे मौजूदा कॉमनवेल्थ चैंपियन और पुरुषों के जैवलिन में बड़े नामों में से एक के तौर पर इस इवेंट में उतरे थे, इसलिए उन पर बहुत ज़्यादा उम्मीदें थीं. भरसक उम्मीदों का दबाव नदीम संभाल नहीं पाए,
कड़ी टक्कर का दबाव
श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरागे ने 89.75 मीटर का विनिंग थ्रो किया, जबकि नीरज चोपड़ा और यश वीर सिंह ने भी 85 मीटर से ज्यादा का थ्रो करके फाइनल के रोमांच को चरम पर पहुंचा दिया था.
मैच जिताने वाला थ्रो न कर पाना
पिछले बड़े इवेंट्स के उलट, नदीम मेडल की दौड़ में बने रहने के लिए जरूरी एक बड़ा थ्रो नहीं कर पाए.
संभावित तकनीकी कमियां
जैवलिन में टाइमिंग, रिलीज एंगल और रन-अप का तरीका बहुत अहम होता है.थोड़ी सी भी तकनीकी गलती दूरी पर काफी असर डाल सकती है. यह खेल से जुड़ी एक आम बात है, न कि आधिकारिक तौर पर पुष्टि की गई वजह.
फिटनेस की भी समस्या हो सकती है
नदीम को देखकर ऐसा लग रहा था कि वह इस इवेंट में अच्छी फिटनेस के साथ नहीं आए थे. यही कारण था कि फाइनल इवेंट के दौरान उनके हाव-भाव में वो बात नहीं नजर आ रही थी जो पेरिस ओलंपिक में थी. बल्कि कम जोश वाले
ये भी पढ़ें- CWG 2026: 36 साल बाद एक साइकिल मैकेनिक की बेटी ने जीता जूडो का गोल्ड, 96 साल में पहली बार 10 बॉक्सर्स फाइनल में
ये भी पढ़ें- CWG 2026: गोल्ड गंवाने के बाद नीरज चोपड़ा का पहला रिएक्शन, कही दिल छू लेने वाली बात
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं