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E20 पेट्रोल के बीच भारतीय सेना को मिला स्वदेशी XWG डीजल, माइनस 42°C में भी नहीं जमेगा, क्यों है इतना खास?

भारतीय सेना ने स्वदेशी एक्सट्रीम वेदर ग्रेड (XWG) डीजल लॉन्च किया है, जो माइनस 42 डिग्री सेल्सियस तक प्रभावी रहेगा.

E20 पेट्रोल के बीच भारतीय सेना को मिला स्वदेशी XWG डीजल, माइनस 42°C में भी नहीं जमेगा, क्यों है इतना खास?
भारतीय सेना के लिए स्वदेशी एक्सट्रीम वेदर डीजल लॉन्च
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  • आर्मी चीफ जनरल धीरज सेठ ने स्वदेशी एक्सट्रीम वेदर ग्रेड डीजल का लॉन्च किया
  • यह नया डीजल माइनस 42 डिग्री सेल्सियस तक प्रभावी रहता है
  • यह डीजल बीएस-6 मानकों के अनुरूप है और मौजूदा वाहनों में बिना किसी इंजन बदलाव के इस्तेमाल किया जा सकता है

भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने आज नई दिल्ली में स्वदेशी एक्सट्रीम वेदर ग्रेड (एक्सडब्ल्यूजी) डीजल लॉन्च किया. यह विशेष ईंधन भारतीय सेना और देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने मिलकर तैयार किया है. इसका उद्देश्य बेहद ठंडे और ऊंचाई वाले इलाकों में सेना के लड़ाकू और लॉजिस्टिक वाहनों की आवाजाही, सुरक्षा और परिचालन क्षमता को बेहतर बनाना है. सेना का कहना है कि यह तकनीक सिर्फ सैन्य इस्तेमाल तक सीमित नहीं रहेगी. इसका लाभ उन नागरिकों को भी मिलेगा जो ऊंचाई वाले या कड़ाके की सर्दी वाले इलाकों में रहते हैं. इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

माइनस 42 डिग्री तक रहेगा असरदार

आमतौर पर बहुत कम तापमान में सामान्य डीजल गाढ़ा हो जाता है. इससे ईंधन फिल्टर बंद होने लगते हैं और वाहन चलाने में दिक्कत आती है. यही वजह है कि बर्फीले और ऊंचाई वाले इलाकों में सेना को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. नई एक्सडब्ल्यूजी डीजल इस समस्या को दूर करने के लिए विकसित किया गया है. सेना के अनुसार यह ईंधन माइनस 42 डिग्री सेल्सियस तक प्रभावी बना रहता है. इससे बेहद ठंडे इलाकों में भी वाहन सामान्य रूप से काम कर सकेंगे.

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पुराने वाहनों में भी बिना बदलाव के होगा इस्तेमाल

सेना के मुताबिक यह डीजल बीएस-6 (BS-VI) मानकों और आईएस 1460:2025 विनिर्देशों के अनुरूप है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे भारतीय सेना के मौजूदा वाहनों में बिना किसी इंजन बदलाव या नई तकनीकी मंजूरी के इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे नए इंजन लगाने या वाहनों में बदलाव की जरूरत नहीं पड़ेगी और ईंधन को तेजी से सेना के बेड़े में शामिल किया जा सकेगा.

'गेम चेंजर' साबित होगा नया ईंधन

लॉन्च कार्यक्रम में सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने कहा कि एक्सडब्ल्यूजी डीजल स्वदेशी तकनीक पर आधारित एक बड़ा नवाचार है. उनके मुताबिक इससे कठिन मौसम में सेना की आवाजाही, परिचालन तैयारी और मिशन की विश्वसनीयता पहले से बेहतर होगी. उन्होंने कहा कि अब उन पुराने तरीकों की जरूरत नहीं पड़ेगी जिनका इस्तेमाल सर्दियों में वाहनों को चालू रखने के लिए किया जाता था। इससे सैनिकों की सुरक्षा बढ़ेगी और उनका मनोबल भी मजबूत होगा.

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एक साल में तैयार हुई तकनीक

जनरल धीरज सेठ ने इस परियोजना को रिकॉर्ड समय में पूरा करने के लिए भारतीय सेना की टीम और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की सराहना की. उन्होंने बताया कि इस विशेष ईंधन को करीब एक वर्ष में विकसित किया गया. उन्होंने उम्मीद जताई कि सेना और तेल कंपनियों के बीच यह सहयोग आगे भी जारी रहेगा और भविष्य में अलग-अलग परिचालन जरूरतों के लिए ऐसे अन्य विशेष ईंधन भी विकसित किए जाएंगे।.

नागरिकों को भी मिलेगा फायदा

सेना का कहना है कि इस तकनीक का लाभ सिर्फ रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा. पहाड़ी और अत्यधिक ठंड वाले इलाकों में रहने वाले नागरिक भी इसका इस्तेमाल कर सकेंगे. इससे कठिन मौसम में चलने वाले वाहनों और अन्य मशीनों की विश्वसनीयता बढ़ेगी और उनका संचालन पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित हो सकेगा. 

जानकारों का मानना है कि अगर इस ईंधन का व्यापक स्तर पर इस्तेमाल होता है, तो यह देश के पर्वतीय और बर्फीले क्षेत्रों में परिवहन और आपूर्ति व्यवस्था को भी मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

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