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मध्य पूर्व युद्ध से गहराया नया संकट, सल्फर की कीमत दोगुनी; किसानों को रबी सीजन में महंगी खाद मिलेगी? 

अमेरिका-इजराइल-ईरान के बीच यद्ध और टकराव की वजह से तेल, एलपीजी ही नहीं फर्टिलाइजर इंडस्ट्री के लिए बेहद जरूरी सल्‍फर की सप्लाई भी प्रभावित हुई है. रबी सीजन से ठीक पहले आयात घटने से फर्टिलाइजर के उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है. इसकी सीधी मार किसानों पर पड़ सकती है.

मध्य पूर्व युद्ध से गहराया नया संकट, सल्फर की कीमत दोगुनी; किसानों को रबी सीजन में महंगी खाद मिलेगी? 
अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध से संकट में फर्टिलाइजर इंडस्ट्री.

पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध-टकराव से लगातार तनाव बढ़ रहा है. इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल, एलपीजी और LNG के साथ-साथ फर्टिलाइजर इंडस्ट्री के लिए बेहद महत्वपूर्ण सल्‍फर की सप्लाई चेन पर भी संकट गहरा गया है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे कार्गो जहाजों और टैंकरों पर ईरान द्वारा किए जा रहे हमलों की वजह से इनकी आवाजाही पिछले कुछ हफ़्तों में काफी घट गई है. 

डिमांड-सप्लाई मिसमैच होने की वजह से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सल्‍फर की कीमतें काफी बढ़ गई हैं. चीन और रूस जैसे बड़े उत्पादक देशों की ओर से एक्सपोर्ट पर लगी पाबंदियों के कारण इंटरनेशनल इन्वेंट्री और कम हुई है. एग्रीकल्चर सेक्टर (फॉस्फेट फर्टिलाइजर के लिए) और इंडस्ट्रियल यूजर्स (जैसे माइनिंग/मेटल निकालने वाले) के बीच कॉम्पिटिशन की वजह से भी कीमतें ऊंचे स्तर पर पहुंची हैं.  

माल ढुलाई के लेकर इंश्योरेंस प्रीमियम तक का खर्च बढ़ा

पिछले सात महीने से जारी अमेरिका-इजराइल-ईरान के बीच यद्ध और टकराव की वजह से फर्टिलाइजर प्रोडक्शन के लिए सल्फर जैसे जरूरी कच्चे माल की ग्लोबल सप्लाई बाधित हुई है. माल ढुलाई के खर्च से लेकर इंश्योरेंस प्रीमियम तक बढ़ गया है, शिपमेंट में भी देरी हो रही है. इसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सल्फर की कीमत काफी बढ़ गई हैं. इससे भारत का सल्फर के आयात पर खर्च भी बढ़ गया है. 

फर्टिलाइजर बनाने वाली कंपनियों की लागत बढ़ी 

भारत में सल्फर की लैंडेड कीमतें साल की शुरुआत से दोगुनी महंगी होकर लगभग $1,050-$1,100 प्रति टन हो गई हैं, जिससे डायअमोनियम फॉस्फेट (DAP), सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) और अन्य कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर बनाने वाली कंपनियों की लागत बढ़ गई है. सल्‍फर की सप्लाई और कीमतों में बढ़ोतरी का ये संकट ऐसे समय पर खड़ा हुआ है, जब कृषि मंत्रालय रबी सीजन के दौरान किसानों को जरूरी फर्टिलाइजर मुहैया कराने की रणनीति बना रहा है.

मध्य पूर्व से आता है ज्‍यादातर सल्फर 

भारत फर्टिलाइजर बनाने के लिए सल्फर के आयात पर बहुत ज्‍यादा निर्भर है. 2025 में देश ने 22.5 लाख टन सल्फर का आयात किया, जिसमें से लगभग 84 फीसदी मध्य पूर्व से आया था. अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण जनवरी-मई 2026 में आयात सालाना आधार पर 26% घटकर 6,98,200 टन रह गया. 

भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में संकट 

नेशनल अकेडमी ऑफ एग्रीकल्चर साइंसेज (National Academy of Agricultural Sciences) के सेक्रेटरी, डॉ. बीएस द्विवेदी ने एनडीटीवी से खास बातचीत में कहा- मध्यपूर्व एशिया में युद्ध की वजह से सल्फर की सप्लाई को लेकर सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में संकट है. हमें इस संकट से बचने के लिए सल्फर के आयात पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम करने के लिए रणनीति बननी होगी. इसके लिए हमें टेक्नोलॉजी की मदद से लो-ग्रेड के खनिजों के घरेलू स्रोतों का इस्तेमाल बढ़ाना होगा. हमें फर्टिलाइजर का कुशल इस्तेमाल भी करना होगा. इस संकट को देखते हुए फर्टिलाइजर सेक्टर में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लॉन्ग-टर्म स्ट्रेटेजी बनाने की जरूरत है.

साल भर में भारत को 30-35 लाख मीट्रिक सल्‍फर की जरूरत 

देश में फॉस्फेटिक और पोटासिक फर्टिलाइजर इंडस्ट्री में सल्फर की कुल अनुमानित सालाना जरूरत 30-35 लाख मीट्रिक टन है. भारत अपने सल्फर आयात का लगभग 84% हिस्सा मध्य पूर्व से मंगाता है, जिसमें ओमान और संयुक्त अरब अमीरात, कतर, ओमान, सऊदी अरब और कुवैत शामिल हैं. सल्फर का इस्तेमाल फर्टिलाइजर के अलावा केमिकल (सल्फ्यूरिक एसिड, डाई और इंटरमीडिएट्स), पेट्रोलियम रिफाइनिंग, मेटल प्रोसेसिंग, रबर इंडस्ट्री समेत अन्‍य सेक्टर में भी होता है.  

जुलाई में 47 फीसदी घटा का आयात 

वाणिज्य विभाग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल जुलाई के मुकाबले इस जुलाई महीने के दौरान देश में सल्‍फर का आयात करीब 47 फीसदी तक घट गया था. हालांक‍ि, रसायन और उर्वरक मंत्रालय फर्टिलाइजर सेक्टर में सल्फर की उपलब्धता और बढ़ती कीमतों पर नजर बनाए हुए है. फॉस्फेटिक फर्टिलाइजर के उत्पादन के लिए सल्फर की अहमियत को देखते हुए, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के साथ इस मामले पर चर्चा की गई है, जिससे PSU और प्राइवेट सेक्टर की रिफाइनरियों को फर्टिलाइज़र सेक्टर को सल्फर की सप्लाई को प्राथमिकता देने की सलाह दी जा सके. 

इसके अलावा, सरकार की फॉस्फेटिक और पोटासिक फर्टिलाइजर के लिए न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी (NBS) स्कीम लागू है. जिसके तहत, फॉस्फेटिक और पोटासिक फर्टिलाइज़र 'ओपन जनरल लाइसेंस' (OGL) के दायरे में आते हैं और कंपनियां अपनी जरूरतों के हिसाब से सल्फर समेत फर्टिलाइजर/कच्चे माल का इंपोर्ट या मैन्युफैक्चरिंग करने के लिए आजाद हैं. सरकार की ओर से सल्फर आयात में आ रहीं बाधाओं को दूर करने के लिए अन्‍य जरूरी कदम भी उठाए गए हैं.  

28-29 सितंबर को रबी कॉन्फ्रेंस 

बता दें क‍ि केंद्रीय कृषि मंत्रालय 28 और 29 सितंबर को दिल्ली स्थित पूसा संस्थान में रबी कॉन्फ्रेंस आयोजित करने जा रहा है. जिसमें सभी राज्यों के कृषि मंत्री अपने-अपने रबी सीजन का पूरा प्लान पेश करेंगे. इस कांफ्रेंस में तय होगा कि रबी सीजन के दौरान कौन-कौन सी फसल कितने क्षेत्र में बोई जाएगी. इसके आधार पर फर्टिलाइजर की आवश्यकता और अन्य जरूरी संसाधनों का आकलन किया जाएगा.

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