स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कार्गो जहाजों पर ईरान की ओर से किये जा रहे हमलों को देखते हुए जॉइंट मैरीटाइम इन्फॉर्मेशन सेंटर ने वहां खतरे के स्तर को बढ़ाकर 'गंभीर' की श्रेणी में कर दिया है. मध्यपूर्व एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से इस पूरे क्षेत्र में समुद्री रूट के जरिये कार्गो जहाजों और टैंकरों की आवाजाही पर बढ़ते खतरे को देखते हुए ये चेतावनी जारी की गयी है.
यूनिटेड किंगडम मेरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स (UKMTO) सेंटर ने सोमवार को जॉइंट मैरीटाइम इन्फॉर्मेशन सेंटर की ओर से एक अहम रिपोर्ट जारी किया. इस रिपोर्ट में चेतावनी दी गयी है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान के हमलों के कारण खतरा बहुत ज्यादा बना हुआ है और मौजूदा हालात में जान-बूझकर की जाने वाली दुश्मन जैसी कार्रवाई की बहुत ज्यादा संभावना है.
स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में कार्गो जहाजों के नेविगेशन में रुकावटें बनी हुई हैं और नाविकों को सलाह दी गयी है कि वे माइनिंग (बारूदी सुरंग बिछाने) की कोशिशों को लेकर सतर्क रहें. IRGC के हमले, जहाजों को रोकने की कोशिशें और रूट बदलने का दबाव लगातार जारी है.
जॉइंट मैरीटाइम इन्फॉर्मेशन सेंटर और UKMTO की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 16 सितम्बर से अब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कार्गो जहाजों या टैंकरों पर चार हमलों की पुष्टि हुई है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कार्गो जहाजों या टैंकरों पर हमला
- 16 सितंबर को एक टैंकर पर अज्ञात चीज़ (प्रोजेक्टाइल) से हमले की रिपोर्ट; क्रू को नुकसान या पर्यावरण पर असर की पुष्टि नहीं.
- 17 सितंबर को ओमान के द्वीप 'रास मखबुक' से 2.6 नॉटिकल मील उत्तर-पूर्व में सुरक्षा से जुड़ी एक घटना रिपोर्ट हुई. इस हमले में क्रू सुरक्षित बचे.
- 18 सितंबर: बाहर जाते समय एक टैंकर पर अज्ञात चीज़ (प्रोजेक्टाइल) से हमला हुआ; जहाज़ के ढांचे (हल) में छेद हो गया और आग बुझा दी गई; क्रू सुरक्षित.
- 21 सितम्बर को एक टैंकर पर किसी अज्ञात चीज़ (प्रोजेक्टाइल) से हमला हुआ, चालक दल के दो सदस्यों को मामूली चोटें आई.
ईरान कायम रखना चाहता है अपनी मौजूदगी
जॉइंट मैरीटाइम इन्फॉर्मेशन सेंटर की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, IRGC के हमले, हमले की कोशिशें और/या परेशान करने वाली गतिविधियां जारी हैं. इसमें UAV का ऊपर से उड़ना, कमर्शियल जहाजों की खास तौर पर निगरानी करना और कभी-कभी VHF पर संपर्क करने की कोशिश शामिल है.
ये हरकतें दिखाती हैं कि ईरान अहम रास्तों पर अपनी मौजूदगी बनाए रखना चाहता है और वहां से गुजरने वाले जहाजों पर दबाव बनाए रखना चाहता है.
जॉइंट मैरीटाइम इन्फॉर्मेशन सेंटर के आंकलन के मुताबिक, "होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाला कमर्शियल ट्रैफिक 2025 के बेसलाइन के मुकाबले कम बना हुआ है. स्वतंत्र ट्रैकिंग डेटा से पता चलता है कि यहां से आने-जाने वाले जहाजों की संख्या सिंगल डिजिट (10 से कम) रही है, जबकि US NCAGS डेटा के अनुसार पिछले 72 घंटों में औसतन 30 से ज़्यादा जहाज रोज़ाना गुज़रे हैं. ओपन ट्रैकिंग में कुछ दिनों में अभी भी सिंगल-डिजिट में ही सामान ले जाने वाले जहाजों की आवाजाही दिखती है; जबकि US NCAGS के ज़रिए होने वाली आवाजाही का आंकड़ा काफी ज़्यादा है (पिछली रिपोर्ट के अनुसार औसत लगभग 30/दिन)".
इसकी वजह से अंतराष्ट्रीय तेल और गैस बाज़ार में अनिश्चितता बढ़ती जा रही है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिये कच्चे तेल और गैस की सप्लाई बाधित हो रही है और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होता जा रहा है.
इस वजह से भारत समेत दुनिया भर के बाज़ारों में एनर्जी प्रोडक्ट्स की स्थिर सप्लाई को लेकर चिंता फिर बढ़ गई है.
कच्चे तेल का क्या है हाल?
पेट्रोलियम मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) ने सोमवार को जारी अपने रिपोर्ट में कहा कि 18 सितंबर को कच्चे तेल (इंडियन बास्केट) की कीमत 123.86 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे स्तर पर थी. इसके साथ ही, सितंबर महीने के पहले 18 दिनों के दौरान कच्चे तेल की औसत कीमत बढ़कर 114.62 डॉलर प्रति बैरल हो गयी है. अगस्त महीने के दौरान कच्चे तेल की औसत कीमत 90.19 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल थी.
पिछले ही महीने भारतीय तेल और गैस कंपनियों ने CNG, कमर्शियल LPG और एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतें बढ़ाई थीं. अब सरकारी तेल कंपनियों का कच्चे तेल और गैस के आयात पर खर्च फिर तेज़ी से बढ़ने लगा है.
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