- मायावती का जन्म दलित परिवार में हुआ और उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई की
- कांशीराम ने मायावती को 2001 में अपना राजनीतिक वारिस घोषित किया और वह बाद में बसपा की पूर्ण कमान संभाली
- आकाश आनंद को मायावती ने पहले अपना उत्तराधिकारी घोषित किया लेकिन बाद में उन्हें पार्टी से हटा दिया गया
बहुजन समाज पार्टी (पसपा) की सर्वोच्च नेता मायावती फर्श से अर्श तक पहुंचीं. उनका जन्म 15 जनवरी 1956 को नई दिल्ली स्थित सुचेता कृपलानी अस्पताल में एक दलित (जाटव) परिवार में हुआ था. उनके पिता प्रभु दयाल (प्रभुदास) दिल्ली के मुख्य डाकघर में क्लर्क के पद पर कार्यरत थे, जबकि उनकी माता रामरती एक गृहिणी थीं. प्रभु दयाल अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई को लेकर बहुत गंभीर थे और उन्होंने भारी संघर्षों के बावजूद अपने सभी बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाई. पिता की हार्दिक इच्छा थी कि उनकी बेटी प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में जाकर देश की सेवा करे, लेकिन कांशीराम के संपर्क में आने के बाद मायावती ने सार्वजनिक व राजनीतिक जीवन का मार्ग चुन लिया.
मायावती डीयू की थीं स्टूडेंट
मायावती की शुरुआती पढ़ाई दिल्ली के शासकीय विद्यालयों से संपन्न हुई. वर्ष 1975 में उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित कालिंदी कॉलेज से कला संकाय में स्नातक (बीए) की उपाधि प्राप्त की. इसके बाद 1976 में गाजियाबाद के वीएमएलजी कॉलेज से उन्होंने बीएड का अध्ययन पूरा किया. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से विधि (एलएलबी) की डिग्री भी हासिल की. पूर्ण रूप से राजनीति में सक्रिय होने से पूर्व वो दिल्ली की जेजे जेपी बस्ती में एक अध्यापिका के तौर पर अपनी सेवाएं दे रही थीं और साथ-साथ संघ लोक सेवा आयोग (सिविल सर्विसेज) की परीक्षा की तैयारी में भी जुटी हुईं थीं.
मायावती का सुनहरा दौर
वंचित और शोषित समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए 14 अप्रैल 1984 को बहुजन समाज पार्टी की नींव रखने वाले कांशीराम ने 15 दिसंबर 2001 को औपचारिक रूप से मायावती को अपना राजनीतिक वारिस घोषित कर दिया. इसके बाद 18 सितंबर 2003 को मायावती ने बहुजन समाज पार्टी की पूर्ण कमान अपने हाथों में ले ली. गठबंधन सरकारों के दौर में वो तीन बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं. वर्ष 2007 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मायावती ने 'सोशल इंजीनियरिंग' का नया प्रयोग करते हुए सर्वजन समाज के लिए बसपा के द्वार खोल दिए. विशेष रूप से प्रबुद्ध वर्ग (ब्राह्मण) और मुस्लिम समुदाय को साधने के रणनीतिक दांव के चलते पार्टी ने 206 सीटें जीतकर इतिहास रचा. इसके साथ ही बसपा ने पहली बार अपने दम पर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई और मायावती चौथी बार राज्य की मुख्यमंत्री बनीं.

हालांकि, इस नए रणनीतिक बदलाव और शासन प्रशासन में सवर्ण वर्ग के बढ़ते प्रभाव के कारण बसपा का पारंपरिक बहुजन आधार धीरे-धीरे पार्टी से छिटकने लगा. कांशीराम के दौर के कई पुराने और वरिष्ठ सहयोगी या तो निष्कासित कर दिए गए या स्वयं ही अलग-थलग पड़ गए.
नतीजतन, पिछले करीब डेढ़ दशक के चुनावी परिणामों में पार्टी का मूल दलित वोट बैंक भी पहले जैसा एकजुट नहीं रहा.
उत्तराधिकार का घटनाक्रम
लगातार कमजोर होते जनाधार और राजनीतिक दुर्दशा को देखते हुए मायावती ने पिछले आम चुनाव से पहले अपने युवा भतीजे आकाश आनंद को राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाकर दलित युवाओं को दोबारा पार्टी से जोड़ने का दांव खेला था. मगर अंदरूनी पारिवारिक कलह और राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण उत्तराधिकारी बनाना तो दूर, अंततः उन्हें संगठन से ही निष्कासित कर दिया गया.
भाई आनंद कुमार का परिवार
- मायावती के छोटे भाई आनंद कुमार लंबे समय से बसपा संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं.
- उनके परिवार में उनकी धर्मपत्नी विचित्र लता और तीन संतानें हैं. इनमें दो बेटे आकाश आनंद और ईशान आनंद हैं, जबकि एक बेटी दीपिका आनंद हैं.
- बीते कुछ वर्षों में यह परिवार बसपा की अंदरूनी राजनीति का मुख्य केंद्र बिंदु बना रहा है, विशेषकर आकाश आनंद को लेकर मायावती द्वारा समय-समय पर कई बड़े और कड़े फैसले लिए गए.
आकाश आनंद: राजनीतिक उभार से निष्कासन तक
- आनंद कुमार के बड़े पुत्र आकाश आनंद को मायावती ने दिसंबर 2023 में आधिकारिक तौर पर अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था.
- इसके उपरांत आकाश बसपा के प्रमुख रणनीतिकार और युवा चेहरे के रूप में उभरकर सामने आए.
- हालांकि, समय के साथ मायावती और आकाश के बीच वैचारिक दूरी बढ़ती चली गई.
- आकाश को कई बार सांगठनिक जिम्मेदारियों से मुक्त किया गया और पुनः बहाल भी किया गया.
- सितंबर 2026 में मायावती ने एक सख्त कदम उठाते हुए उन्हें बसपा के सभी राजनीतिक दायित्वों से पूरी तरह बेदखल कर दिया.
- पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया कि भविष्य में आकाश को संगठन में कोई भी राजनीतिक पद प्रदान नहीं किया जाएगा.

ईशान आनंद का राजनीतिक घटनाक्रम
- आकाश के छोटे भाई ईशान आनंद की भी बसपा की राजनीति में एंट्री कराई गई थी.
- सितंबर 2026 में उन्हें संगठन के भीतर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई, जिसे उस समय बसपा के भावी नेतृत्व की तैयारी के रूप में देखा गया.
- किंतु मायावती ने आकाश और ईशान दोनों को लेकर अपना अंतिम रुख साफ कर दिया है.
- उन्होंने स्पष्ट घोषणा की है कि दोनों भाइयों में से किसी को भी बसपा के किसी भी छोटे या बड़े राजनीतिक पद पर नहीं रखा जाएगा.
कौन हैं दीपिका आनंद?
- कुमारी दीपिका आनंद बसपा सुप्रीमो मायावती की भतीजी और पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार की इकलौती पुत्री हैं.
- आनंद कुमार की तीसरी संतान और बेटी दीपिका आनंद अब इस पूरे पारिवारिक व राजनीतिक घटनाक्रम में सबसे चर्चित नाम बनकर उभरी हैं.
- अब तक दीपिका आनंद को लेकर राजनीतिक गलियारों में कोई विशेष चर्चा नहीं थी, परंतु मायावती ने अचानक आनंद कुमार के सहयोग हेतु दीपिका के नाम का प्रस्ताव आगे बढ़ाया है.
- दीपिका वर्तमान में कानून (वकालत) की पढ़ाई कर रही हैं और इससे पहले तक वे मीडिया व मुख्यधारा की राजनीति की चकाचौंध से पूरी तरह दूर रही हैं.
- दीपिका भविष्य में अपने पिता आनंद कुमार के सांगठनिक कार्यों में सहयोग दे सकती हैं.
- हालांकि, उन्हें आधिकारिक रूप से मायावती का राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया गया है.
यह भी पढ़ें-
55 मिनट और 50 मिनट… दिल्ली में ये दो तकरीर बदल सकती हैं दुनिया की तस्वीर?
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं