- समाजवादी पार्टी ने गुजरात से आने वाले धनराज नाथवानी को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है.
- बसपा प्रमुख मायावती ने सपा प्रत्याशी के चयन पर निशाना साधते हुए इसे छलावा बताया है.
- मायावती ने लिखा परिवार और धनबल को मौका दिया जा रहा है, यही सपा का PDA है.
उत्तर प्रदेश में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल गर्माया हुआ है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस बार गुजरात के उद्योगपति धनराज परिमल नाथवानी को राज्यसभा प्रत्याशी बनाया है. जिस पर बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख और यूपी की पूर्व सीएम मायावती ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि परिवार और धनबल को मौका दिया जा रहा है. क्या यही सपा का PDA है. बता दें कि सपा की तरफ से अखिलेश यादव की मौजूदगी में रामगोपाल यादव और धनराज नाथवानी ने राज्यसभा चुनाव के लिए पर्चा दाखिल कर दिया है.
PDA का छलावा करती है सपा: मायावती
मायावती ने लिखा 'जैसा कि यह सर्वविदित है कि बीएसपी किसी भी छोटे-बड़े चुनाव में विरोधी पार्टियों में भी खासकर समाजवादी पार्टी (सपा) की तरह अपने परिवार, सगे-सम्बंधी, भाई-भतीजों, क़रीबी रिश्ते-नातेदारों के साथ ही विशेषकर बड़े-बड़े पूंजीपतियों और धन्नासेठों आदि को टिकट नहीं देती है. यानी चुनावों में उनके धनबल का सहारा नहीं लेती है, बल्कि पार्टी में कार्यरत सर्वसमाज में से केवल गरीब, मध्यम वर्ग व कमज़ोर तबक़ों के कर्मठ अम्बेडकरवादी लोगों को ही अपनी पार्टी का उम्मीदवार बनाती है. मतलब बीएसपी की राजनीति परिवारवाद व धनबल से मुक्त व पाक-साफ है, जबकि वहीं दूसरी तरफ सपा ठीक इसके विपरीत कार्य करती है, जो अपने आपको समाजवादी व कथित पीडीए (PDA) की पार्टी होने का राजनीतिक ढोंग व छलावा करती हुई ज्यादा नजर आती है.'
'चुनावों में पूंजीपतियों को मौका देती है'
मायावती ने कहा 'इसका एक और खास व ताज़ा उदाहरण यह है कि सपा ने यूपी से राज्यसभा के लिये द्विवार्षिक चुनाव में रामगोपाल यादव को फिर से पर्चा भरवाया है जो सपा मुखिया के नजदीकी रिश्तेदार हैं. जबकि सपा ने अपनी पार्टी का दूसरा उम्मीदवार धनराज परिमल नाथवानी को बनाया है, जो चर्चित उद्योग घराने से संबंध हैं. लोगों की राय में सपा का तीसरा उम्मीदवार पहले की तरह संभवत, फेस सेविंग व चुनाव हारने के लिये होगा. तो इस प्रकार का है सपा और उसका PDA व उस पार्टी का समाजवाद अर्थात् सपा को चुनाव में वोट तो पीडीए का चाहिये, लेकिन सांसद व विधायक ज्यादातर अपने परिवार वालों को व बड़े-बड़े पूंजीपतियों को बनाती है. आखिर जनता इनके पीडीए के बहकावे में ना आये तो यह सही.
1.जैसाकि यह सर्वविदित है कि बी.एस.पी. किसी भी छोटे-बड़े चुनाव में विरोधी पार्टियों में भी ख़ासकर समाजवादी पार्टी (सपा) की तरह अपने परिवार, सगे-सम्बंधी, भाई-भतीजों, क़रीबी रिश्ते-नातेदारों के साथ ही विशेषकर बड़े-बड़े पूँजीपतियों व धन्नासेठों आदि को टिकट नहीं देती है, यानी चुनावों…
— Mayawati (@Mayawati) October 2, 2026
सपा का दोहरा चरित्र सबने देखा: मायावती
वास्तव में यह कोई नई बात नहीं है बल्कि सपा का इस प्रकार का दोहरा चाल, चरित्र व चेहरा हमेशा से ही रहा है. इसीलिए खासकर अपरकास्ट समाज के गरीबों तथा 'बहुजन समाज' अर्थात दलितों, आदिवासियों, अति-पिछड़ों, मुस्लिम एवं अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समाज के समस्त लोगों को अब खासकर यूपी विधानसभा आमचुनाव से पहले ही जरूर पूरी तरह से सतर्क हो जाना चाहिए. इन सबका हित अंबेडकरवादी बीएसपी में ही निहित व सुरक्षित है, बाकी सब छलावा ही छलावा है.
समाजवादी पार्टी ने जब से धनराज नाथवानी को उम्मीदवार बनाया है, तब से ही यूपी की राजनीति गर्मा गई है. बसपा और बीजेपी लगातार सपा पर निशाना साध रही है. चर्चा कि सपा अभी एक और प्रत्याशी मैदान में उतार सकती है.
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