- भारत और कनाडा के बीच 2022-23 में द्विपक्षीय व्यापार कुल 8.16 बिलियन अमेरिकी डॉलर था.
- दोनों देशों के बीच राजनयिक तनाव के बीच जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में 2023 के दौरान व्यापारिक बातचीत रोक दी गई.
- 2024 में मर्चेंडाइज ट्रेड 13.3 बिलियन, गुड्स व सर्विस ट्रेड 23 बिलियन हुआ. 2025 में भारत का ट्रेड सरप्लस बढ़ा.
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी भारत की आधिकारिक दौरे पर मुंबई आ चुके हैं. उनके भारत दौरे का मुख्य मकसद व्यापारिक रिश्तों को नई ऊंचाई पर ले जाना है. भले ही भारत और कनाडा के बीच राजनयिक रिश्ते जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल के दौरान तनाव से गुजरे हैं, बावजूद इसके व्यापारिक रिश्ते मजबूत बने रहे. खास कर 2024 और 2025 में द्विपक्षीय व्यापार में रिकॉर्ड वृद्धि देखी गई है. भारत और कनाडा के बीच ट्रेड रिलेशन केवल औपचारिक नहीं, बल्कि तेजी से मजबूत होती हुई आर्थिक साझेदारी बन चुकी है. इस समय कनाडा अपनी ट्रेड डाइवर्सिफिकेशन स्ट्रैटेजी पर काम कर रहा है. यानी वो सिर्फ अमेरिका पर निर्भर नहीं रहना चाहता, बल्कि अगले दस साल में अमेरिका से बाहर के बाजारों में अपने निर्यात को दोगुना करना चाहता है. यही वजह है कि इस दौरान भारत उसके लिए बेहद अहम पार्टनर बनकर उभरा है. कनाडा का लक्ष्य है कि 2030 तक भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 70 अरब डॉलर सालाना तक पहुंचाया जाए.
#WATCH | Maharashtra: Canadian PM Mark Carney arrived at the Taj Mahal Palace Hotel in Mumbai
— ANI (@ANI) February 27, 2026
He is on an official visit to India from 27 February to 2 March 2026. This is Prime Minister Carney's first official visit to India. pic.twitter.com/LCvkiNEIAp
पिछले चार वर्षों में व्यापार की स्थिति
पिछले चार वर्षों (2022-2026) में दोनों देशों के बीच व्यापार में उतार-चढ़ाव के साथ-साथ एक सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है. साल 2024 में भारत और कनाडा के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार (वस्तुएं और सेवाएं) लगभग 23.66 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया. यह 2023 के मुकाबले 10% की वृद्धि दर्शाता है. अगर 2024 के आंकड़ों को देखें तो भारत और कनाडा के बीच मर्चेंडाइज ट्रेड यानी वस्तु व्यापार 13.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया. इसमें कनाडा ने भारत को 5.3 अरब डॉलर का सामान एक्सपोर्ट किया. इन एक्सपोर्ट में सबसे आगे रहे सब्जियां, मिनरल फ्यूल्स और ऑयल्स, और वुड पल्प. वहीं भारत से कनाडा को 8.0 अरब डॉलर का सामान गया. भारत से कनाडा जाने वाले प्रमुख सामानों में फार्मास्यूटिकल प्रोडक्ट्स, मशीनरी और इक्विपमेंट, और इलेक्ट्रॉनिक सामान शामिल रहे.
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पिछले चार वर्षों के दौरान भारत-कनाडा ट्रेड
2025 के जनवरी से मई के दरम्यान मर्चेंडाइज ट्रेड में थोड़ी कमी आई और यह 3.87 बिलियन डॉलर हो गया. इसमें भारत के पक्ष में ट्रेड सरप्लस बढ़ा था.
2024 में कुल मर्चेंडाइज ट्रेड 13.3 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया. वस्तु और सर्विस ट्रेड 23 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचा. भारत का कनाडा को निर्यात 4.07 बिलियन डॉलर रहा.
2023: राजनयिक तनाव के कारण व्यापार पर बातचीत रोक दी गई.
2022-23: द्विपक्षीय व्यापार कुल 8.16 बिलियन अमेरिकी डॉलर था.
सर्विस सेक्टर में आई तेजी
केवल उत्पादों की खरीद-बिक्री ही नहीं, सेवाओं का व्यापार भी 2024 में काफी तेजी से बढ़ा. कनाडा से भारत को सर्विस एक्सपोर्ट करीब 15.2 अरब डॉलर की रही. यह 2023 से 18.2% अधिक है. इसमें सबसे बड़ा हिस्सा एजुकेशन से जुड़ी ट्रैवल सर्विसेज का था. यानी बड़ी संख्या में भारतीय छात्र कनाडा जाकर पढ़ाई कर रहे हैं और इससे कनाडा को बड़ी आय होती है. दूसरी तरफ कनाडा ने भारत से 4.3 अरब डॉलर की सेवाएं इम्पोर्ट कीं, जो उसके कुल सर्विस इम्पोर्ट का करीब 1.9 प्रतिशत है. इसमें आईटी, टेक्नोलॉजी और प्रोफेशनल सर्विसेज का बड़ा योगदान है.
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Photo Credit: AFP
क्रिटिकल मिनरल और सप्लाई चेन
अब बात करते हैं क्रिटिकल मिनरल्स और सप्लाई चेन की. भारत अपनी मैन्युफैक्चरिंग और क्लीनटेक महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी खनिजों की सुरक्षित सप्लाई चाहता है. कनाडा के पास प्राकृतिक संसाधनों की मजबूत बेस है और उसकी रेगुलेटरी सिस्टम स्थिर मानी जाती है. ऐसे में लंबे समय के सप्लाई एग्रीमेंट, संयुक्त उद्यम (जॉइंट वेंचर) और तकनीकी सहयोग (टेक्नोलॉजी कोलैबोरेशन) के लिए कनाडा एक रणनीतिक पार्टनर बन सकता है.
इन्फ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल इकॉनमी
भारत इस समय इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी भारी निवेश कर रहा है. ट्रांसपोर्टेशन, स्मार्ट सिटीज, वाटर मैनेजमेंट और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं. ये सेक्टर कनाडाई इंजीनियरिंग कंपनियों, पेंशन फंड्स और इंफ्रास्ट्रक्चर इनवेस्टर्स के लिए बड़े मौके लेकर आए हैं. डिजिटल इकॉनमी के मामले में भी भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फिनटेक, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में भारत और कनाडा की ताकत एक-दूसरे को पूरक बनाती हैं. सुरक्षित डेटा मैनेजमेंट, डिजिटल पेमेंट और एडवांस एनालिटिक्स जैसे सॉल्यूशंस की मांग बढ़ रही है, जहां कनाडाई कंपनियां अपनी विशेषज्ञता दे सकती हैं.
भारत की बढ़ती मिडिल क्लास और बदलती फूड सिस्टम भी नए मौके खोल रही है. कनाडा से दालें, कैनोला, फर्टिलाइजर और एग्री-टेक सॉल्यूशंस की मांग बढ़ रही है. साथ ही फूड प्रोसेसिंग और कोल्ड चेन लॉजिस्टिक्स में साझेदारी की अच्छी संभावनाएं हैं.
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भारत से निर्यात-आयात
अगर भारत के कनाडा को होने वाले एक्सपोर्ट की बात करें तो इसमें फार्मास्यूटिकल प्रोडक्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक सामान, ज्वेलरी, रत्न और कीमती पत्थर, सीफूड खासकर झींगा, इंजीनियरिंग गुड्स और ऑटो पार्ट्स प्रमुख हैं.
वहीं भारत कनाडा से जिन चीजों का आयात करता है, उनमें मिनरल्स, दालें, पोटाश, पेपर और पेपरबोर्ड, वुड पल्प, आयरन और एल्युमिनियम स्क्रैप और जेमस्टोन शामिल हैं.
आज की स्थिति ये है कि 600 से ज्यादा कनाडाई कंपनियां भारत में मौजूद हैं. इसके अलावा 1,000 से ज्यादा कंपनियां भारतीय बाजार में बिजनेस के अवसर तलाश रही हैं.
दूसरी तरफ कनाडा में भी कई भारतीय कंपनियां सक्रिय हैं. आईटी, बैंकिंग, पल्प और फाइबर, नेचुरल रिसोर्सेज, हेल्थ साइंस और फाइनेंशियल सर्विसेज जैसे कई सेक्टर में भारतीय कंपनियों की मजबूत मौजूदगी है.
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वो सेक्टर्स जिनमें हैं संभावनाएं?
कनाडा प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध देश है. भारत जैसे बड़े और तेजी से बढ़ते बाजार को कच्चे माल और कृषि उत्पादों की जरूरत होती है. साथ ही भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है. दूसरी तरफ कनाडा के पास टेक्नोलॉजी, कृषि और प्राकृतिक संसाधनों की ताकत है. अगर दोनों देश रणनीतिक रूप से सहयोग बढ़ाते हैं तो आने वाले वर्षों में व्यापार दोगुना भी हो सकता है. खासकर ग्रीन एनर्जी, एआई, फूड प्रोसेसिंग और एजुकेशन सेक्टर में अपार संभावनाएं हैं.
कुल मिलाकर देखा जाए तो भारत और कनाडा का ट्रेड रिलेशन सिर्फ सामान की खरीद-फरोख्त तक सीमित नहीं है. ये टेक्नोलॉजी, एजुकेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल इकॉनमी और संसाधनों की साझेदारी तक फैला हुआ है. अगर CEPA जैसी डील आगे बढ़ती है और दोनों देश राजनीतिक और रणनीतिक स्तर पर तालमेल बनाए रखते हैं, तो आने वाले सालों में ये पार्टनरशिप नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकती है.
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