- मार्क कार्नी का भारत दौरा तनाव के बाद रिश्तों की नई शुरुआत का संकेत.
- व्यापार, CEPA, ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और रक्षा सहयोग मुख्य एजेंडा.
- राजनीतिक भरोसा बहाल कर रणनीतिक साझेदारी मजबूत करना प्रमुख लक्ष्य.
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी 27 फरवरी से 2 मार्च 2026 तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर आने वाले हैं. यह दौरा दोनों देशों के रिश्तों में बड़े रीसेट की शुरुआत माना जा रहा है. पीएम कार्नी का यह दौरान व्यापार, रणनीति और रिश्तों के फिर से जुड़ाव के संकेत हैं.
यह दौरा इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का भारत दौरा सिर्फ औपचारिक मुलाकात नहीं है, यह एक बड़ा राजनयिक फैसला और रणनीतिक पहल का संकेत है. पिछले करीब दो साल से भारत-कनाडा संबंधों में खिंचाव और तनाव रहा है. सितंबर 2023 में खालिस्तान समर्थक नेता हरदीप सिंह निज्जर की कनाडा में हत्या और उसके बाद उसके बारे में आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति ने दोनों देशों के बीच गंभीर राजनीतिक दूरी बना दी थी.उस तनाव के बाद कूटनीतिक चैनल लगभग ठंडे पड़ गए थे. राजदूतों की विदाई हुई. सूचना आदान-प्रदान में कमी और समझ का अभाव दिखा. ऐसे माहौल में व्यापारिक और रणनीतिक साझेदारी पर बातचीत लगभग रुक सी गई. लेकिन अब, जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल के बाद नई सरकार के नेतृत्व में कार्नी का यह दौरा दिखाता है कि दोनों देश संवाद फिर से शुरू करना चाहते हैं और पिछले मतभेदों से आगे बढ़कर साझेदारी को फिर से मजबूत करना चाहते हैं.
विदेश मंत्रालय के मुताबिक यह दौरा इंडिया-कनाडा द्विपक्षीय रिश्तों के सामान्य होने के एक अहम मोड़ पर हो रहा है. दोनों प्रधानमंत्री पहले एक-दूसरे की चिंताओं और सेंसिटिविटी के लिए आपसी सम्मान, लोगों के बीच मजबूत संबंध और बढ़ती आर्थिक उपयोगिता पर आधारित एक सकारात्मक और स्थिर साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमत हुए हैं. दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच होने वाली बैठक भविष्य की साझेदारी बनाने में भारत और कनाडा के सकारात्मक रुझान और साझा दृष्टिकोण को फिर से दृढ़ बनाने का मौका देगी.
ये भी पढ़ें: हम टेबल पर नहीं आए तो मेन्यू में होंगे... जाने कनाडाई पीएम ने किस पर किया सबसे करारा वार

भारत में मार्क कार्नी का कार्यक्रम
27 फरवरी 2026: मुंबई में आगमन और व्यापारिक नेताओं से बैठक. ऊर्जा, AI, निवेश और टेक्नोलॉजी साझेदारी जैसे विषयों पर चर्चा.अगले दो दिनों तक वो अलग-अलग बिजनेस कार्यक्रम में भाग लेंगे.
01 मार्चः पीएम कार्नी दिल्ली पहुंचेंगे.
02 मार्चः पीएम नरेंद्र मोदी के साथ पीएम कार्नी की हैदराबाद हाउस में प्रतिनिधिमंडल स्तरीय बैठक. दोनों नेता कनानास्किस (जून 2025) और जोहान्सबर्ग (नवंबर 2025) में अपनी पिछली बैठकों के आधार पर भारत-कनाडा रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न क्षेत्रों में अब तक हासिल की गई प्रगित की समीक्षा करेंगे. शिक्षा, रिसर्च एवं इनोवेशन, आपसी संबंध, दोनों नेता क्षेत्रीय और ग्लोबल डेवलपमेंट पर भी अपने विचार साझा करेंगे. दोनों प्रधानमंत्री इंडिया-कनाडा CEOs फोरम में भी शामिल होंगे.
मुख्य एजेंडा: व्यापार, CEPA, ऊर्जा, टेक और रक्षा
भारत-कनाडा के बीच व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA- Comprehensive Economic Partnership Agreement) पर बातचीत पिछले दशक से चल रही है लेकिन 2023 में यह ठंडे पड़ गए रिश्तों के बीच पूरी तरह रुकी हुई थी. अब इस दौरे के दौरान मुक्त-व्यापार समझौते की आधिकारिक शुरुआत करने की उम्मीद है और इसके अधिकार क्षेत्र को अंतिम रूप देने की कोशिश होगी. दोनों देशों की नजरें इस समझौते पर हैं ताकि वर्तमान करीब 30 बिलियन डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 50 अरब डॉलर से ऊपर ले जाया जा सके. इसकी बात खुद प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले साल नवंबर में पीएम कार्नी से मुलाकात के बाद कही थी.
यह समझौता सिर्फ टैक्स या शुल्क में कमी तक सीमित नहीं होगा बल्कि सर्विस सेक्टर, निवेश, इंटेलिजेंस साझा करने, लॉजिस्टिक्स, और डिजिटल अर्थव्यवस्था तक को कवर करेगा. अगर CEPA कामयाब होता है, तो यह दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को दशकों तक मजबूती देगा.
ऊर्जा और संसाधन साझेदारी
कनाडा ऊर्जा क्षेत्र का, खासकर यूरेनियम और प्राकृतिक गैस के मामले में, बड़ा खिलाड़ी है. भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को विविध करने की कोशिश कर रहा है, और इस दौरे के दौरान इसके लिए लॉन्ग-टर्म सप्लाई फ्रेमवर्क जैसी बड़ी डीलों पर बात होगी. यह दोनों देशों के लिए समय-समय पर ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने का मौका है, खासकर जब वैश्विक ऊर्जा बाजारों में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी हुई है.
टेक्नोलॉजी और AI सहयोग
डिजिटल अर्थव्यवस्था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, और स्टार्टअप इकोसिस्टम दोनों देशों की प्राथमिकता है. कार्नी के मुंबई में व्यापारिक नेताओं के साथ AI और टेक्नोलॉजी पर राउंडटेबल से संकेत मिलता है कि नया निवेश और साझा इनोवेशन प्लेटफॉर्म बनाने की कोशिश होगी.
ये भी पढ़ें: कनाडा के साथ CEPA वार्ता होगी शुरू, PM मोदी बोले- 2030 तक 50 बिलियन डॉलर के ट्रेड का लक्ष्य

Photo Credit: AFP
रक्षा और सुरक्षा सहयोग
रक्षा साझेदारी भी एजेंडा में है. इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सामुदायिक सुरक्षा और समुद्री रणनीति पर बातचीत की उम्मीद है. यह चीन के प्रभाव के चलते दोनों देशों के सामरिक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में अहम होगा.
राजनीतिक और रणनीतिक नजरिया
कनाडा का यह दौरा राजनीतिक भरोसा बनाने और खलिस्तान से जुड़े मतभेदों को पीछे छोड़ने के प्रयास का हिस्सा भी है. दोनों देशों ने संकेत दिए हैं कि वे इस विवाद के बावजूद विश्वास और संवाद को पुनः स्थापित करना चाहते हैं.
जानकार मानते हैं कि इस दौरे का सबसे बड़ा संदेश यह होगा कि दोनों देश अब मतभेदों से आगे बढ़कर व्यापार, सुरक्षा और तकनीकी साझेदारी पर नए अध्याय खोलना चाहते हैं. इसके साथ रक्षा सहयोग और कूटनीतिक चैनलों को भी सशक्त करना प्रमुख लक्ष्य है.
आगे क्या संभावित परिणाम हो सकते हैं?
CEPA वार्ताओं की आधिकारिक शुरुआतः अधिकार क्षेत्र को अंतिम रूप मिल सकता है, जो अगली बड़ी डील की नींव बनाएगा.
ऊर्जा समझौतेः यूरेनियम और गैस सप्लाई पर समझौते की दिशा में प्रगति.
टेक और AI साझेदारीः संयुक्त प्रोजेक्ट और निवेश अवसरों की घोषणा.
रणनीतिक बयानः द्विपक्षीय साझेदारी के लिए साझा रोडमैप और भरोसा बहाल करने वाला जॉइंट स्टेटमेंट.
दिलचस्प यह है कि भारत के बाद कार्नी ऑस्ट्रेलिया और जापान भी जाएंगे. इसका एक संदेश यह भी है कि कनाडा अब इंडो-पैसिफिक रणनीति के साथ जुड़ना चाहता है और ग्लोबल पार्टनरशिप को नई दिशा देने का प्रयास कर रहा है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं