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रार या रणनीति? अमेठी-रायबरेली पर कांग्रेस ने अब तक क्यों नहीं खोले पत्ते? क्या पार्टी में चल रहा मतभेद

भाजपा ने सोनिया गांधी की सीट रायबरेली से दिनेश प्रताप सिंह को उतार दिया है. वहीं, अमेठी से स्मृति ईरानी पहले ही परचा भर चुकी हैं.

रार या रणनीति? अमेठी-रायबरेली पर कांग्रेस ने अब तक क्यों नहीं खोले पत्ते? क्या पार्टी में चल रहा मतभेद
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने केरल के वायनाड में रोड शो किया था.
नई दिल्ली/अमेठी:

लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2024) में कुछ हाई प्रोफाइल सीटों पर सबकी निगाह रहती है. उत्तर प्रदेश की अमेठी (Amethi) और रायबरेली (Raebareli) ऐसी ही सीटें हैं, जिनकी इन दिनों काफी चर्चा हो रही है. चर्चा इन सीटों के उम्मीदवारों के बारे में नहीं हो रही, बल्कि उम्मीदवार नहीं उतारने की वजह को लेकर हो रही है. अमेठी और रायबरेली सीट हमेशा से ही कांग्रेस का गढ़ रही है. 2019 के इलेक्शन को छोड़ दें, तो दोनों सीटों से गांधी परिवार का ही कोई सदस्य जीतता रहा है. लेकिन इस बार कांग्रेस (Congress) ने अमेठी और रायबरेली में उम्मीदवार को लेकर सस्पेंस रखा है. दोनों सीटों पर 20 मई को वोटिंग होनी है. नामांकन के लिए 2 दिन बचा है. लेकिन कांग्रेस लीडरशिप अब तक ये नहीं तय कर पाई है कि अमेठी से इस बार भी राहुल गांधी (Rahul Gandhi) चुनाव लड़ेंगे या नहीं. क्या सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) के राज्यसभा जाने के बाद प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi Vadra) रायबरेली सीट से इलेक्शन डेब्यू करेंगी? सवाल ये है कि आखिर कांग्रेस क्या सोच रही है? उम्मीदवार तय करने में देरी क्या कांग्रेस की रणनीति है या गांधी परिवार में ही मतभेद है?

अमेठी-रायबरेली में उम्मीदवार का अभी क्यों नहीं हुआ ऐलान?
अमेठी में पिछले चुनाव में मिली हार के बाद कांग्रेस फूंक-फूंक कर कदम रख रही है. कांग्रेस ने बीते शनिवार को केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) की बैठक बुलाई गई. इसमें इन दोनों ही सीटों के प्रत्याशियों के नाम को लेकर चर्चा हुई. एक रिपोर्ट भी सौंपी गई, लेकिन अब तक कांग्रेस किसी भी फैसले तक नहीं पहुंच सकी है.

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राहुल गांधी को अमेठी से चुनाव लड़ाने की मांग को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ता धरना भी दे रहे हैं. दूसरी ओर, सोनिया गांधी की सीट रायबरेली से प्रियंका गांधी को डेब्यू कराने के लिए भी मंथन चल रहा है. इस बीच गांधी परिवार में ही आपसी मतभेद सामने आए हैं. इनमें चर्चित नाम रॉबर्ट वाड्रा का है. वाड्रा कई मौकों पर अमेठी से चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं. बीते दिनों उन्हें उम्मीदवार बनाने को लेकर पोस्टर भी लगाए गए थे. विवाद के बाद पोस्टरों को हटा लिया गया था. इसके साथ ही दोनों सीटों पर स्थानीय नेताओं में भी असंतोष देखा जा रहा है. इस वजह से अमेठी-रायबरेली में उम्मीदवार के नाम का ऐलान नहीं हो पा रहा.

क्या परिवारवाद का जवाब खोज रही कांग्रेस?
अमेठी-रायबरेली में उम्मीदवार तय करने में देरी के पीछे दूसरा कारण परिवारवाद के आरोपों को भी माना जा रहा है. दोनों ही सीट कांग्रेस की पारंपरिक सीट मानी जाती है. यहां हर बार गांधी परिवार से ही कोई न कोई उम्मीदवार होता है. बीजेपी इस मुद्दे को जोरशोर से उठाती आई है. ऐसे में बहुत संभव है कि कांग्रेस परिवारवाद के आरोपों से बचना चाह रही हो.

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राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने क्या दिए संकेत?
राहुल गांधी इस बार केरल के वायनाड से चुनावी मैदान में हैं. उनकी सीट पर दूसरे फेज में 26 अप्रैल को वोटिंग हो चुकी है. कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि राहुल गांधी इस बार भी अमेठी से चुनाव लड़ें. लेकिन कई मौकों पर राहुल गांधी अमेठी को लेकर पूछे गए सवालों से बचते रहे हैं. राहुल गांधी शायद इस पशोपेश में हैं कि अमेठी को अपनाएं या वायनाड को छोड़ें. क्योंकि केरल में कांग्रेस मजबूत स्थिति में है. दूसरी ओर यूपी में कांग्रेस के पास अभी रायबरेली सीट ही है. जाहिर तौर पर राहुल कांग्रेस की मजबूत मौजूदगी वाले राज्य केरल की वायनाड सीट नहीं छोड़ना चाहेंगे.

कांग्रेस में इसे लेकर भी दो तरह के मतभेद सामने आ रहे हैं. एक खेमा मानता है कि राहुल गांधी को अमेठी छोड़कर रायबरेली से चुनाव लड़ना चाहिए. इससे सोनिया गांधी का वोटबैंक उनके साथ आ जाएगा. जबकि दूसरा खेमा मानता है कि ऐसा होने पर गलत मैसेज जाएगा कि राहुल गांधी अमेठी में हार की डर से रायबरेली मूव हो गए.

रायबरेली को लेकर क्यों है सस्पेंस?
अमेठी के साथ ही रायबरेली को लेकर भी सस्पेंस रखा गया है. सोनिया गांधी जब राजस्थान से चुनकर राज्यसभा गईं, तो खाली हुई रायबरेली सीट के लिए पहली पसंद प्रियंका गांधी ही थीं. माना जा रहा था कि प्रियंका यहीं से अपना इलेक्शन डेब्यू करेंगी. हालांकि, फिलहाल ऐसा नहीं होता दिख रहा. दूसरी ओर, राहुल गांधी खुद अपनी बहन को चुनाव लड़ाने के पक्ष में नहीं हैं. राहुल चाहते हैं कि प्रियंका गांधी संगठन के कामों में रहे. जबकि कांग्रेस के कई नेताओं की भी राय है कि ऐसे समय में प्रियंका गांधी को रायबरेली से उम्मीदवार बनाने से उनके करियर को नुकसान पहुंच सकता है. कांग्रेस बाकी सीटों पर अच्छा परफॉर्म करे, इसे लेकर प्रियंका गांधी को सॉलिड रणनीति अपनानी चाहिए.

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अमेठी-रायबरेली में राहुल-प्रियंका नहीं तो और कौन?
अमेठी और रायबरेली में उम्मीदवार तय नहीं करने को संगठन में चल रही अंदरूनी लड़ाई से भी जोड़कर देखा जा रहा है. दरअसल, कई स्थानीय नेता खुद को मौका देने की मांग कर रहे हैं. माना जा रहा है कि अगर अमेठी में राहुल गांधी को उम्मीदवार नहीं बनाया गया तो यहां से दिनेश सिंह या मनोज पांडे जैसे नेताओं को मौका मिल सकता है. रायबरेली की बात करें, तो अगर प्रियंका गांधी ने यहां से डेब्यू नहीं किया, तो कांग्रेस फीमेल कार्ड चलते हुए कांग्रेस विधायक अदिति सिंह को उम्मीदवार बना सकती है.

गांधी परिवार के नहीं होने से बीजेपी को मिलेगा क्या फायदा?
अमेठी और रायबरेली में गांधी परिवार के मैदान में नहीं होने से बीजेपी को सीधा फायदा मिल सकता है. अमेठी में वैसे भी 2019 के इलेक्शन के बाद बीजेपी का वोट शेयर बढ़ गया है. स्मृति ईरानी ने कई विधानसभाओं में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है. स्मृति इसबार भी मैदान में हैं और अपनी जीत को लेकर कॉन्फिडेंट भी हैं. अमेठी में बीएसपी ने भी उम्मीदवार खड़े किए हैं. लेकिन गांधी परिवार के किसी सदस्य के बतौर उम्मीदवार नहीं होने से यहां मुकाबला एकतरफा हो जाएगा. दूसरी ओर, रायबरेली में भी बीजेपी को जीत के लिए जोर नहीं लगाना पड़ेगा.

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हालांकि, कांग्रेस ने बुधवार (1 मई ) को कहा है कि अगले 24 घंटे में अमेठी-रायबरेली के लिए उम्मीदवार का ऐलान कर दिया जाएगा. ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस अमेठी-रायबरेली में सरप्राइज देगी या शॉक.

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