- केरल के वायनाड में भारी बारिश के कारण भूस्खलन हुआ, जिसमें पांच लोग मलबे के नीचे दब गए.
- लैंडस्लाइड का वीडियो सीसीटीवी कैमरों में कैद हुआ, जिसमें मलबा सड़क पर गिरते और लोग भागते दिखे.
- मलबे से दो लोगों को बचाया गया जबकि पांच अन्य को अस्पताल पहुंचाया गया, किसी की मौत नहीं हुई.
kerala Landslide News: केरल के वायनाड जिले में हुए भीषण भूस्खलन ने एक बार फिर इलाके को दहला दिया है. इस हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है जबकि चार लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं. राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है तथा विभिन्न एजेंसियों की टीमें मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं. हादसे में घायल हुए दस लोगों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है.
चर्च और घर बहा, पुल दबने से बढ़ी मुश्किल
भूस्खलन के कारण एक चर्च और उसके पास स्थित एक मकान पूरी तरह बह गया. हालांकि राहत की बात यह रही कि मकान के निवासी मक्का की तीर्थयात्रा पर गए हुए थे और घटना के समय चर्च के भीतर भी कोई मौजूद नहीं था. हादसे के बाद प्रभावित क्षेत्र को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण पुल भी मलबे में दब गया, जिससे बचाव कार्यों को गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ रहा है.
युद्ध स्तर पर चल रहा राहत अभियान
मलबा हटाने और बचाव दलों के लिए रास्ता तैयार करने के लिए दो एक्सकेवेटर लगातार काम कर रहे हैं. पुलिस, नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स, स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स और सिविल डिफेंस के स्वयंसेवकों को मौके पर तैनात किया गया है. कांग्रेस नेता और वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि फंसे हुए लोगों को बचाने के लिए हरसंभव कोशिश की जा रही है और राज्य प्रशासन आपसी तालमेल के साथ काम कर रहा है. साथ ही NDRF की टीमें वायनाड में भूस्खलन के बाद बचाव कार्यों में खोज और राहत प्रयासों में मदद के लिए स्निफर डॉग्स (सूंघकर पता लगाने वाले कुत्ते) का इस्तेमाल कर रही हैं.
प्रियंका गांधी ने की मदद की अपील
प्रियंका गांधी ने इस त्रासदी पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की. उन्होंने कहा, "हमारी प्रार्थनाएं और उम्मीदें उन लोगों के साथ हैं जो अभी भी लापता हैं. जब तक बचाव टीमें उन तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं, वे मजबूत बने रहें और उनके प्रियजनों को इस दर्दनाक पल को सहने की हिम्मत मिले." उन्होंने यूडीएफ कार्यकर्ताओं, पार्टी पदाधिकारियों और आम लोगों से जिला प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए राहत कार्यों में सहयोग करने की अपील भी की.
All efforts are on to rescue those still trapped in the landslide. Respected CM, Shri. V D Satheesan is monitoring relief efforts himself, the police and NDRF have been at the site for some time, SDRF teams and civil defence volunteers have also reached.
— Priyanka Gandhi Vadra (@priyankagandhi) July 7, 2026
We are all coordinating…
मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने बताया कि भारी बारिश के बावजूद बचाव दल लगातार काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने निर्माण कंपनी को कई बार जमा मिट्टी हटाने के निर्देश दिए थे और 20 जून को इस संबंध में औपचारिक आदेश भी जारी किया गया था, लेकिन उसका पालन नहीं हुआ. राजस्व मंत्री ए.पी. अनिल कुमार और कृषि मंत्री टी. सिद्दीकी को घटनास्थल भेजा गया है. सिद्दीकी ने कहा कि शुरुआती जांच में मिट्टी को अवैज्ञानिक तरीके से जमा किए जाने के संकेत मिले हैं. उन्होंने कहा, "यह प्राकृतिक भूस्खलन नहीं है. यह मानव-जनित आपदा है."
...तो बड़ा हो सकता था हादस!
बताया जा रहा है कि वायनाड में कल्लाडी टनल के काम वाली जगह पर भूस्खलन के कारण सड़क बंद हो गई. इस हादसे में किसी की मौत की खबर नहीं है. भारी बारिश की वजह से वहां काम पहले ही रोक दिया गया था. केरल स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (KSDMA) ने बताया कि इस इलाके में पिछले 24 घंटों में 265 एमएम बारिश हुई है. यही वजह रही कि यहा लैंडस्लाइड हुई है. अगर कल्लाडी टनल के पास काम हो रहा होता, तो इस हादसे की चपेट में काफी लोग आ सकते थे.
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KSDMA ने पहले ही दे दी थी चेतावनी
लगातार हो रही भारी बारिश के बीच केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने चेतावनी दी है कि भारी बारिश के कारण मुख्य सड़कों पर जल-जमाव हो सकता है, कम दृश्यता से यातायात प्रभावित हो सकता है, निचले इलाकों और नदी के किनारों पर बाढ़ आ सकती है, पेड़ उखड़ने से बिजली आपूर्ति बाधित हो सकती है, घरों और झोपड़ियों को आंशिक नुकसान हो सकता है, और भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है. प्राधिकरण ने यह भी चेतावनी दी कि खराब मौसम का असर तट के पास रहने वाले लोगों, मवेशियों और असुरक्षित ढांचों पर पड़ सकता है. केएसडीएमए ने लैंडस्लाइड और अचानक बाढ़ की आशंका वाले इलाकों में रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे स्थानीय अधिकारियों के निर्देशानुसार सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं. नदियों के किनारे और बांधों के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहने और निर्देश मिलने पर राहत शिविरों में जाने की सलाह दी गई है.
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