कर्नाटक विधानसभा चुनाव (Karnataka Assembly Elections 2023) को लेकर बीजेपी, कांग्रेस और जेडीएस ने पूरी ताकत झोंक दी है. स्थानीय स्तर पर कई ऐसे मुद्दे हैं जो इस बार तय करेंगे कि जीत का सेहरा किसके सिर सजेगा. बीजेपी के मुकाबले कांग्रेस ने कई बड़ी घोषणाएं की हैं, वहीं बीजेपी 'मोदी मैजिक' के सहारे नैया पार कराने में जुटी है. कर्नाटक विधानसभा चुनाव को लेकर NDTV ने लोकनीति-सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज (CSDS) के साथ मिलकर एक सर्वे किया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि 10 मई को होने जा रहे विधानसभा चुनाव में कौन से मुद्दे हैं और मतदाता इनपर क्या सोचते हैं.
NDTV-CSDS ने 20 से 28 अप्रैल के बीच कर्नाटक चुनाव को लेकर सर्वे किया था. वोटिंग 10 मई को है और इसके नतीजे 13 मई को आएंगे. आइए जानते हैं NDTV-CSDS के सर्वे के निष्कर्ष:-
-
रेलमंत्री वैष्णव ने बताया बुलेट ट्रेन में देरी की क्या रहीं वजहें, जापानी मंत्री के आरोपों का दिया जवाब -
AI पर भारत में आएगा कानून, NDTV World Summit में बोले अश्विनी वैष्णव- चंद हफ्तों में आएगा कंसल्टेशन पेपर -
NDTV World Summit 2026: सेमीकंडक्टर, AI और बुलेट ट्रेन पर क्या है भारत का मेगा प्लान? अश्विनी वैष्णव ने बताया -
NDTV World Summit | हाथ से निकल रही है AI की ताकत! Google DeepMind के पूर्व रिसर्चर ने दी चेतावनी -
'भारत के लिए खतरा बिल्कुल रियल': NDTV वर्ल्ड समिट में माइक्रोसॉफ्ट के AI विशेषज्ञ निकोलस बट्स -
भारत में कब बनेगी 'मेड इन इंडिया' चिप? NDTV World Summit में अश्विनी वैष्णव ने बताया -
हाथ से निकल रही है AI की ताकत! Google DeepMind के पूर्व रिसर्चर ने भारत में दी सबसे बड़ी चेतावनी -
AI एक्ट्रेस टिली नॉरवुड को क्यों पसंद हैं SRK? किस फिल्म के रीमेक में करना चाहती हैं काम? -
Shashi Tharoor EXCLUSIVE: NDTV World Summit 2026 में बदलते वर्ल्ड ऑर्डर पर शशि थरूर क्या बोले? -
AI एक्ट्रेस टिली नॉरवुड को पसंद हैं शाहरुख खान, बोलीं- ‘ओम शांति ओम’ के रीमेक में करना चाहती हूं काम
बेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा
NDTV-CSDS के सर्वे से पता चलता है कि 28 प्रतिशत लोगों का मानना है कि इस कर्नाटक चुनाव में बेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा है. बेरोजगारी के बाद गरीबी दूसरा बड़ा मुद्दा है. सर्वे में शामिल 25 प्रतिशत लोग गरीबी को लेकर चिंता जाहिर करते हैं. जहां युवा मतदाताओं के लिए बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है. वहीं, ग्रामीण कर्नाटक के मतदाताओं के लिए गरीबी एक बड़ा मुद्दा है. सर्वे में शामिल कम से कम 67 प्रतिशत लोगों का मानना है कि पिछले पांच वर्षों में उनके क्षेत्रों में चीजों की कीमतें (महंगाई) बढ़ी हैं.
भ्रष्टाचार पर क्या है लोगों की राय?
सर्वे में शामिल आधे से अधिक यानी 51 फीसदी लोगों का मानना है कि पांच सालों में भ्रष्टाचार बढ़ा है, जबकि 35 फीसदी लोगों का कहना है कि भ्रष्टाचार पहले जैसा ही बना हुआ है. कई पारंपरिक बीजेपी समर्थकों (41%) का कहना है कि 2019 के पिछले चुनावों के बाद से भ्रष्टाचार में वृद्धि हुई है.
आरक्षण को लेकर क्या सोचते हैं लोग?
NDTV के ओपिनियन पोल में लोगों से मुस्लिमों के लिए 4 फीसदी आरक्षण खत्म करने और लिंगायत, वोक्कालिगा के लिए नया कोटा लाने के बीजेपी सरकार के फैसले को भी रेटिंग देने के लिए कहा गया था. सर्वे में पाया गया कि सिर्फ एक तिहाई लोग नए आरक्षण निर्णयों से वाकिफ हैं. सर्वे के मुताबिक, नई कोटा नीति के समर्थक ज्यादातर बीजेपी के पक्ष में हैं, जबकि इसका विरोध करने वाले कांग्रेस का समर्थन करते हैं.
टीपू सुल्तान को लेकर विवाद का असर?
टीपू सुल्तान की मौत से जुड़े विवाद पर भी इस सर्वे में सवाल पूछे गए थे. सर्वे में पाया गया कि 3 रेस्पॉन्डेंट (उत्तरदाताओं) में से एक को इस बारे में जानकारी थी, जबकि 74% लोगों का मानना है कि इस विवाद को उठाने से राज्य में सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया. इस विवाद से वाकिफ 29% लोगों का मानना है कि इस मुद्दे को उठाना उचित है. सर्वे से पता चलता है कि ये 29% लोग मुख्य रूप से बीजेपी समर्थक हैं. जबकि इस विवाद का विरोध करने वाले ज्यादातर लोगों का झुकाव कांग्रेस की ओर है.
"क्षेत्रीय भेदभाव" भी मुद्दा
NDTV-CSDS के जनमत सर्वेक्षण में "क्षेत्रीय भेदभाव" भी एक मुद्दे के तौर पर सामने आया. सर्वे में शामिल 41 फीसदी लोगों का मानना है कि उत्तर कर्नाटक में भेदभाव किया जाता है. साथ ही 66 फीसदी लोगों का मानना है कि बेंगलुरु को अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक महत्व दिया जाता है.
सड़क और बिजली को लेकर नहीं हुआ काम
बिजली सप्लाई को लेकर 46 फीसदी लोगों का मानना है कि इसमें सुधार हुआ है. 43 फीसदी लोगों ने कहा कि बिजली सप्लाई पहले जैसी ही है. वहीं, 10 फीसदी लोगों ने माना कि बिजली की सप्लाई पहले से और ज्यादा खराब हो गई है. सर्वे में 51 लोगों ने पेयजल की सप्लाई को लेकर पूरी तरह से संतुष्टि जाहिर की है. जबकि 14 फीसदी लोगों ने माना की पीने के पानी की सप्लाई पहले से खराब हो गई है. सर्वे में शामिल अधिकांश लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों और स्कूलों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है.
राज्य और केंद्र सरकार से कितना संतुष्ट?
सर्वे में राज्य और केंद्र सरकारों के समग्र प्रदर्शन पर भी सवाल किए गए थे. 27 फीसदी लोगों का कहना है कि वे कर्नाटक में बीजेपी सरकार से 'पूरी तरह संतुष्ट' हैं. जबकि 24 फीसदी लोगों ने केंद्र में बीजेपी की अगुआई वाली सरकार पर पूरी तरह से संतुष्टि जाहिर की है. सर्वे में 36 फीसदी लोगों का कहना है कि वो राज्य में बीजेपी सरकार से 'कुछ हद तक संतुष्ट' हैं, जबकि 42% लोगों ने कहा कि वो केंद्र की बीजेपी सरकार से कुछ हद तक संतुष्ट हैं. जनमत सर्वेक्षण से पता चलता है कि कल्याणकारी योजनाओं के लिए केंद्र और राज्य दोनों योजनाओं के लाभार्थी बीजेपी का पक्ष लेते हैं.
कैसे हुआ सर्वे?
सर्वे के लिए कर्नाटक के 21 विधानसभा क्षेत्रों के 82 मतदान केंद्रों में कुल 2143 लोगों से बात की गई. दो मतदान केंद्रों में फील्डवर्क पूरा नहीं हो सका. सर्वे के फील्ड वर्क का को-ऑर्डिनेशन वीना देवी ने किया और कर्नाटक में नागेश के एल ने इसका मुआयना किया.
विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों को 'प्रोबैबलिटी प्रपोर्शनल टू साइज (Probability Proportional to Size)' सैंपल का इस्तेमाल करके रैंडमली तरीके से चुना गया है. इसमें एक यूनिट के चयन की संभावना उसके आकार के समानुपाती होती है. हर निर्वाचन क्षेत्र से 4 मतदान केंद्रों को सिलेक्ट किया गया था. हर मतदान केंद्र सेसे 40 मतदाताओं को रैंडमली सिलेक्ट किया गया था.
ये भी पढ़ें:-
NDTV-CSDS सर्वे: कर्नाटक में लिंगायत-वोक्कालिगा के लिए नई आरक्षण नीति से क्या BJP को मिलेगा फायदा?
NDTV-CSDS सर्वे: क्या टीपू सुल्तान विवाद का कर्नाटक चुनाव में दिखेगा असर?
NDTV-CSDS सर्वे: बेरोजगारी, आरक्षण और भ्रष्टाचार... कर्नाटक के 7 मुद्दे जो तय करेंगे कौन जीतेगा बाजी
क्या कर्नाटक में BJP सरकार को मिलेगा अपनी ही 'योजनाओं' का फायदा? : NDTV-CSDS सर्वे से समझें
NDTV-CSDS सर्वे: 'डबल इंजन की सरकार' को लेकर कर्नाटक के लोगों की क्या है राय?
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं