- बेंगलुरु के कैफे ने पांच प्रतिशत गैस क्राइसिस चार्ज लगाने का बिल सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यू-टर्न लिया
- कैफे प्रबंधन ने कहा कि LPG की कीमतें बढ़ने के कारण सरचार्ज लगाने पर विचार किया था लेकिन इसे लागू नहीं किया गया
- वायरल बिल में दिखाए गए गैस क्राइसिस चार्ज के बावजूद ग्राहक से वास्तविक में कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया गया था
बेंगलुरु के कैफे ने 'गैस क्राइसिस चार्ज' वाला बिल वायरल होने के बाद अब यू-टर्न ले लिया है. वायरल बिल ने व्यापक बहस छेड़ दी थी. इसके बाद कोथनूर स्थित थियो कैफे सवालों के घेरे में आ गया. एक ग्राहक ने बिल साझा किया था जिसमें नींबू पानी के ऑर्डर पर कुल बिल में 5 प्रतिशत 'गैस क्राइसिस चार्ज' जोड़ा गया था.
इस बिल पर कई ऑनलाइन रिएक्शन सामने आए थे, जहां लोगों ने इस शुल्क की वैधता और निष्पक्षता पर सवाल उठाया था, वहीं कुछ लोगों ने इसका बचाव करते हुए कहा कि यह उनके बिजनेस के लिए जरूरी था.
उन्होंने बताया कि एलपीजी की बढ़ती कीमतों के कारण कैफे ने 5 प्रतिशत सरचार्ज लगाने के विकल्प पर विचार किया था, लेकिन यह निर्णय लागू नहीं किया गया. उनके अनुसार, वायरल बिल के मामले में भी ग्राहक से वास्तव में अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया गया था.
अपने दावे को सही ठहराने के लिए कैफे प्रबंधक ने 17 मार्च का एक नया बिल साझा किया, जिसमें 'गैस क्राइसिस चार्ज' का कोई उल्लेख नहीं था.
यह घटना देश भर में कई होटलों, रेस्टोरेंट और कैफे को प्रभावित करने वाली व्यावसायिक एलपीजी की बढ़ती कीमतों को लेकर जारी चिंताओं के बीच हुई है. हालांकि, इस तरह की लागत को सीधे ग्राहकों पर डालने का कदम अभी भी एक विवादास्पद मुद्दा बना हुआ है.
सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने दावा किया है कि एलपीजी सिलेंडर खरीदने और वैकल्पिक व्यवस्था करने की बढ़ी हुई लागत के कारण अन्य रेस्तरां भी अतिरिक्त शुल्क ले रहे हैं.
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