- दिल्ली में श्रावण मास की शुरुआत के .साथ कांवड़ यात्रा के लिए सेवा और स्वागत की तैयारियां की जा रही हैं
- शाहदरा के शिविरों में कांवड़ियों के लिए भोजन, विश्राम, प्राथमिक चिकित्सा की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं.
- दिल्ली और आसपास के श्रद्धालु हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने गांव या शिवालयों में जलाभिषेक करते हैं.
श्रावण मास की शुरुआत के साथ ही राजधानी दिल्ली में कांवड़ यात्रा की तैयारियां तेज हो गई हैं. पूर्वी दिल्ली के शाहदरा इलाके में सड़कों के किनारे कांवड़ियों के स्वागत और सेवा के लिए बड़े पैमाने पर तैयारियां की जा रही हैं. कई निजी संगठनों ने शनिवार से ही अपने शिविर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए हैं, जबकि कई अन्य शिविरों में अंतिम चरण का काम जारी है.
कांवड़ियों के लिए भोजन, विश्राम और चिकित्सा की व्यवस्था
शाहदरा में लगाए जा रहे शिविरों में कांवड़ियों के ठहरने, भोजन, विश्राम और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था की गई है. कई शिविरों में कूलर और पंखों की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, ताकि लंबी यात्रा के बाद श्रद्धालुओं को आराम मिल सके. आयोजकों का कहना है कि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं.
हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौटते हैं श्रद्धाल
दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार जाकर गंगाजल लाते हैं. इसके बाद वे अपने गांव या स्थानीय शिवालयों में भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. कुछ श्रद्धालु निजी वाहन, बाइक या बस से यात्रा करते हैं, लेकिन बड़ी संख्या में कांवड़िए पैदल यात्रा करते हुए दिखाई देते हैं. भगवा वस्त्र पहने श्रद्धालुओं के बीच “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयघोष पूरे यात्रा मार्ग पर सुनाई देते हैं.

बुजुर्गों के सम्मान का संदेश दे रहे हैं अरविंद प्रजापति
शाहदरा के एक शिविर में NDTV की मुलाकात 22 साल के अरविंद प्रजापति से हुई. अरविंद दसवीं तक पढ़े हैं और मिट्टी के दीये बनाने का काम करते हैं. वह पिछले 11 सालों से हरिद्वार से गंगाजल लेकर आते हैं. इस बार उन्होंने अपनी कांवड़ यात्रा के माध्यम से समाज को एक अलग संदेश देने की कोशिश की है. उन्होंने कांवड़ के एक ओर गंगाजल रखा है और दूसरी ओर अपनी बुजुर्ग दादी को बैठाकर हरिद्वार से अपने घर, उत्तम नगर के पास स्थित कुमार कॉलोनी तक लेकर जा रहे हैं.

NDTV से बातचीत में अरविंद ने बताया कि हाल के वर्षों में बुजुर्गों के प्रति बढ़ते अनादर और हिंसा की घटनाओं को देखते हुए उन्होंने यह संदेश देने का फैसला किया. उनके साथ उनके छोटे भाई भी यात्रा में शामिल हैं.
101 लीटर गंगाजल लेकर लौट रहे हैं दीपक
यात्रा के दौरान 21 वर्षीय दीपक भी मिले, जो दिल्ली के नांगलोई के रहने वाले हैं. वह 101 लीटर गंगाजल लेकर लौट रहे है. दीपक ने बताया कि भगवान शिव के प्रति उनकी गहरी आस्था है और इसी श्रद्धा के साथ वह कांवड़ यात्रा कर रहे हैं.

निशुल्क चिकित्सा सेवा दे रहे हैं प्रेम कुमार शर्मा
शाहदरा के एक शिविर में प्रेम कुमार शर्मा ने छोटा मेडिकल कैंप लगाया है. वह पेशे से फार्मेसी संचालक हैं. उन्होंने बताया कि वह पिछले कई सालों से प्रत्येक श्रावण मास में लगातार 11 दिनों तक कांवड़ियों को निशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराते हैं. उनके कैंप में प्राथमिक उपचार और आवश्यक दवाओं की व्यवस्था की गई है.

सुरक्षा के लिए 1,500 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात
कांवड़ यात्रा को लेकर दिल्ली पुलिस ने भी व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं. एक दिन पहले आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिल्ली पुलिस ने बताया कि 30 जुलाई से 11 अगस्त 2026 तक चलने वाली 13 दिवसीय कांवड़ यात्रा के लिए 1,500 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है. पुलिस ने यात्रा मार्गों के लिए विस्तृत ट्रैफिक एडवाइजरी भी जारी की है. प्रमुख मार्गों पर आवश्यकतानुसार ट्रैफिक डायवर्जन लागू किए गए हैं ताकि कांवड़ियों की आवाजाही सुचारु बनी रहे और कानून-व्यवस्था के साथ यातायात संचालन भी प्रभावी ढंग से किया जा सके.
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