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'कांवड़' शब्द का मतलब क्या होता है? भोले के भक्तों को जरूर जाननी चाहिए ये बात

सावन का महीना आते ही देशभर में लाखों शिवभक्त कांवड़ यात्रा पर निकल पड़ते हैं. हरिद्वार, गंगोत्री, गौमुख और अन्य पवित्र स्थलों से गंगाजल लेकर श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं.

'कांवड़' शब्द का मतलब क्या होता है? भोले के भक्तों को जरूर जाननी चाहिए ये बात

Kanwar Meaning: सावन का महीना आते ही देशभर में लाखों शिवभक्त कांवड़ यात्रा पर निकल पड़ते हैं. हरिद्वार, गंगोत्री, गौमुख और अन्य पवित्र स्थलों से गंगाजल लेकर श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि 'कांवड़' शब्द का वास्तविक अर्थ क्या है? आखिर इस यात्रा को कांवड़ यात्रा क्यों कहा जाता है? 

क्या होता है कांवड़

कांवड़ एक विशेष प्रकार का बांस या लकड़ी का संतुलित डंडा होता है, जिसके दोनों सिरों पर समान भार लटकाया जाता है. कांवड़िए इसी पर दोनों ओर गंगाजल से भरे कलश या पात्र बांधकर अपने कंधों पर उठाते हैं और भगवान शिव के मंदिर तक पैदल यात्रा करते हैं. इसी कारण इस यात्रा को कांवड़ यात्रा कहा जाता है. 

'कांवड़' शब्द का अर्थ क्या है

भाषाविदों के अनुसार 'कांवड़' शब्द का प्रयोग उस डंडे के लिए किया जाता है, जिसे कंधे पर रखकर दोनों ओर समान भार ढोया जाता है. हिंदी में इसे कई स्थानों पर कांवड़, कांवर जैसे रूपों में भी लिखा और बोला जाता है. इसका मूल भाव संतुलन, सेवा और भार वहन से जुड़ा हुआ है. 

धार्मिक दृष्टि से कांवड़ का महत्व

सनातन परंपरा में कांवड़ केवल जल ले जाने का साधन नहीं, बल्कि श्रद्धा, तप, अनुशासन और भक्ति का प्रतीक मानी जाती है। कांवड़ लेकर चलने वाले श्रद्धालु पूरी यात्रा के दौरान संयम का पालन करते हैं. कई भक्त नंगे पैर यात्रा करते हैं, सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं और बोल बम तथा हर-हर महादेव के जयघोष के साथ शिवधाम तक पहुंचते हैं. 

कांवड़ यात्रा की शुरुआत कैसे हुई

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के समय जब भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए हलाहल विष का पान किया, तब उनके शरीर की तपन शांत करने के लिए देवताओं ने पवित्र जल अर्पित किया. इसी परंपरा से शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा का विस्तार हुआ. एक अन्य मान्यता के अनुसार, भगवान परशुराम ने सबसे पहले कांवड़ में गंगाजल लाकर भगवान शिव का अभिषेक किया था. इसके बाद यह परंपरा धीरे-धीरे व्यापक होती गई. 

कांवड़ यात्रा के नियम

कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालु कई धार्मिक नियमों का पालन करते हैं, जैसे- 

  • गंगाजल को शुद्ध रखना
  • कांवड़ को सीधे जमीन पर न रखना (इसके लिए स्टैंड का उपयोग किया जाता है)
  • सात्विक भोजन और संयम का पालन करना
  • यात्रा के दौरान स्वच्छता और अनुशासन बनाए रखना
  • शिव मंत्रों का जप करते हुए यात्रा पूरी करना
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