जॉनी वॉकर(Johnnie Walker), ब्लैक डॉग (Black Dog), बैलेंटाइन(Ballantine's) जैसी प्रीमियम स्कॉच शराब के दाम दिल्ली में कम हो सकते हैं. दिल्ली एक्साइज अधिकारियों का कहना है कि भारत-UK ट्रेड एग्रीमेंट के असर की हर ब्रांड के हिसाब से जांच की जा रही है.
अधिकारियों ने NDTV को बताया कि 10 अक्टूबर के बाद दिल्ली में कुछ प्रीमियम स्कॉच व्हिस्की ब्रांड 10-15 प्रतिशत सस्ते हो सकते हैं, क्योंकि एक्साइज विभाग शराब की कीमतों पर भारत-UK ट्रेड एग्रीमेंट के असर की जांच कर रहा है.
हालांकि, यह कटौती हर लेबल पर लागू होने की संभावना कम है. अधिकारियों ने कहा कि कीमतों की जांच हर ब्रांड के हिसाब से करनी होगी.
दिल्ली एक्साइज अधिकारियों ने कहा कि विभाग भारत-UK कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) के प्रावधानों का अध्ययन कर रहा है और यह भी देख रहा है कि राजधानी में कीमतों में कम कस्टम ड्यूटी का असर कैसे दिखेगा.
कैसे सस्ती हो सकती है स्कॉच?
ट्रेड एग्रीमेंट के तहत, भारत ने योग्य ब्रिटिश व्हिस्की और जिन पर कस्टम ड्यूटी 150 प्रतिशत से घटाकर 75 प्रतिशत कर दी है.
टैरिफ में धीरे-धीरे और कमी आएगी और आखिरकार यह 40 प्रतिशत तक आ जाएगा. CETA 15 जुलाई को लागू हुआ था.
लेकिन कस्टम ड्यूटी में भारी कटौती का मतलब यह नहीं है कि बोतल की कीमत में भी उतनी ही भारी गिरावट आएगी.
इंपोर्ट की गई शराब की रिटेल कीमत में राज्य की एक्साइज ड्यूटी, टैक्स, मार्जिन और अन्य लागतें भी शामिल होती हैं. इसलिए, ग्राहकों को असल फायदा अलग-अलग ब्रांड और उसकी नई कीमत पर निर्भर करेगा.
10 अक्टूबर से कीमतों में बदलाव संभव
अधिकारियों ने कहा कि 10 अक्टूबर के बाद कीमतों में कुछ बदलाव दिख सकता है क्योंकि विभाग नए टैरिफ स्ट्रक्चर के असर की जांच कर रहा है.
पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में भी ऐसी ही प्रक्रिया चल रही है, जहां 10 अक्टूबर से UK में बनी शराब के कई ब्रांड की कीमतें कम होने वाली हैं. वहां कुछ प्रीमियम लेबल के लिए कीमतों में 5 से 15 प्रतिशत की कमी होने की उम्मीद है.
कीमतों में एक जैसी कटौती संभव नहीं
दिल्ली ने कीमतों में कोई एकसमान कटौती की घोषणा नहीं की है. एक और बात यह है कि क्या कोई खास प्रोडक्ट CETA के तहत टैरिफ छूट के लिए योग्य है या नहीं. कम ड्यूटी का संबंध किसी प्रोडक्ट के बनने की जगह से जुड़े नियमों से है. इसका मतलब है कि सिर्फ़ ब्रिटिश या इंटरनेशनल ब्रांड का नाम होने से ही कोई बोतल इस फ़ायदे के लिए अपने-आप योग्य नहीं हो जाती.
कुछ शराब के ब्रांड तैयार प्रोडक्ट के तौर पर इम्पोर्ट किए जाते हैं, जबकि कुछ की बॉटलिंग या मैन्युफैक्चरिंग भारत में हो सकती है. अधिकारियों ने बताया कि यही एक वजह है कि विभाग अलग-अलग ब्रांड पर इसके असर की जांच कर रहा है.
एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने का एक अलग प्रस्ताव
साथ ही, दिल्ली में एक और प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है जिससे शराब की कीमतें उल्टी दिशा में जा सकती हैं. अधिकारियों ने बताया कि एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने का एक अलग प्रस्ताव भी विचाराधीन है.
अधिकारियों ने बताया कि सरकार राजधानी की एक्साइज पॉलिसी में बदलाव के तहत एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने पर विचार कर रही है.
हालांकि, अभी तक एक्साइज ड्यूटी में कोई नई बढ़ोतरी नहीं हुई है.
अगर मंजूरी मिलती है, तो राज्य का ज्यादा लेवी शराब की कीमतें बढ़ा सकता है और कुछ इम्पोर्टेड ब्रांड के लिए कम कस्टम ड्यूटी से मिलने वाले फ़ायदे के कुछ हिस्से को खत्म कर सकता है।
एक्साइज में बढ़ोतरी के लिए इंतजार करना पड़ सकता है. प्रस्तावित एक्साइज ड्यूटी बढ़ोतरी पर फ़ैसले में कुछ और समय लग सकता है.
नए एक्साइज कमिश्नर के प्रभार लेने के बाद फैसला?
दिल्ली के एक्साइज कमिश्नर रवि झा का हाल ही में अरुणाचल प्रदेश तबादला कर दिया गया था. अधिकारियों ने NDTV को बताया कि प्रस्ताव को आगे बढ़ाने से पहले विभाग के नए एक्साइज कमिश्नर के कार्यभार संभालने का इंतजार किए जाने की संभावना है.
विभाग के शीर्ष स्तर पर बदलाव का मतलब यह हो सकता है कि शराब की कीमतों पर असर डालने वाली दोनों घटनाएं एक ही समय पर न हों.
UK में बनने वाले कुछ योग्य स्कॉच ब्रांड को पहले कस्टम ड्यूटी में कटौती का फ़ायदा मिल सकता है, जबकि दिल्ली की एक्साइज लेवी में कोई भी बढ़ोतरी बाद में हो सकती है.
ग्राहकों के लिए इसका मतलब है कि 10 अक्टूबर के बाद शराब की सभी दुकानों पर कीमतों में एक जैसी कमी होने की संभावना कम है. कुछ प्रीमियम स्कॉच ब्रांड सस्ते हो सकते हैं, जबकि दूसरों की कीमतों में बहुत कम या कोई बदलाव नहीं हो सकता है.
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