कांवड़ यात्रा के दौरान बच्चों की मदद करने वाले मथुरा के डीएम चंद्र प्रकाश सिंह और एसडीएम अखिलेश कुमार खूब फेमस हो रहे हैं. चंद्र प्रकाश सिंह 1994 बैच के पीसीएस अधिकारी हैं. वे गोंडा के रहने वाले हैं. उनका जन्म 8, जुलाई 1970 को हुआ था. उन्होंने MSC तक की पढ़ाई की है. सीपी सिंह के नाम से मशहूर आईएएस अधिकारी ने अपने करियर के शुरुआती समय में अलीगढ़, आगरा, मेरठ, इटावा सहित कई जिलों में एसडीएम, सिटी मजिस्ट्रेट और एडीएम के पद पर सेवाएं दी. वे मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण में उपाध्यक्ष के पद पर तैनात रहे.
सीपी सिंह 2012 बैंच के आईएएस अधिकारी है. IAS के तौर पर प्रमोशन 2018 को मिला. इसके बाद वे गाजियाबाद नगर निगम के नगर आयुक्त बनाए गए. इसके बाद उन्होंने कासगंज और बुलंदशहर के डीएम के तौर पर कार्यभार संभाला. पिछले वर्ष उन्हें मथुरा के डीएम पद पर तैनात किया गया है. डीएम मथुरा अपने कार्यों को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहते हैं.
कौन हैं SDM अखिलेश कुमार
मथुरा में तैनात एसडीएम (SDM) अखिलेश कुमार इस समय अपने प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ अपनी अनोखी सामाजिक पहल को लेकर सुर्खियों में हैं. अधिकारी ने संवेदनशीलता की मिसाल पेश करते हुए मथुरा में चार जरूरतमंद बच्चों को गोद लिया है. उन्होंने इन बच्चों की पूरी पढ़ाई-लिखाई का खर्च उठाने का बीड़ा उठाया है. मूल रूप से बनारस के रहने वाले अखिलेश कुमार ने देश के प्रतिष्ठित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त की है. उन्होंने बीएससी, बीए, एलएलबी और एमए जैसी विविध डिग्रियां हासिल की हैं.
प्रशासनिक सेवा में आने के बाद उन्होंने गोंडा समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों में तहसीलदार के पद पर कुशलतापूर्वक कार्य किया. उनकी कार्यशैली और प्रतिबद्धता को देखते हुए वर्ष 2024 में उन्हें एसडीएम के पद पर पदोन्नति दी गई.
एसडीएम अखिलेश कुमार का मानना है कि प्रशासनिक पद पर रहते हुए समाज के वंचित वर्गों की मदद करना सबसे बड़ा धर्म है. नौकरी की व्यस्त दिनचर्या के बीच भी वे सामाजिक सरोकारों से जुड़े रहते हैं, जिन्होंने तैनाती के दौरान अनाथ बच्चों को कपड़े बांटना जैसे कई अच्छे कार्य किए और उनकी इस पहल की आम जनता व प्रशासनिक हलकों में काफी सराहना हो रही है.
क्या है पूरा मामला
मथुरा के चार बच्चे भगवान शिव से एक अजीब मांग को लेकर कांवड़ लेकर निकले हैं. असल में इन 4 बच्चों को फीस नहीं जमा कर पाने की वजह से स्कूल से निकाल दिया गया था. ये इस उम्मीद में निकले कि भगवान भोलेनाथ इनकी पुकार सुनेंगे और पढ़ाई दोबारा शुरू हो सकेगी. जैसे ही डीएम मथुरा को सोशल मीडिया पर इस बात की जानकारी हुई कि बच्चे फीस के लिए कावड़ यात्रा ले जा रहे हैं, तो डीएम ने उन्हें अपने ऑफिस में बुलवाया. उसके बाद उनको पढ़ने सामग्री दी और स्कूल प्रबंधन को फोन कर फीस माफ करने की कही .
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