- जम्मू यूनिवर्सिटी ने तेल बचत और खर्च में कटौती के लिए कई सख्त फैसले देश में पहली बार लागू किए हैं
- PhD वाइवा पूरी तरह ऑनलाइन कराने और अंतरराष्ट्रीय स्पीकर्स को ऑनलाइन प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है
- अकादमिक काउंसिल की बैठक अब मुख्य कैंपस में कराई जाएगी ताकि यात्रा और ईंधन खर्च में कमी लाई जा सके
देश में संभावित तेल संकट को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का असर अब संस्थानों में भी दिखाई देने लगा है. जम्मू यूनिवर्सिटी ने देश में पहली बार कई सख्त फैसले लेते हुए तेल बचत और खर्च में कटौती की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि यह सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह इस वैश्विक संकट से निपटने में योगदान दे. पीएम मोदी द्वारा ईंधन बचत को लेकर किए गए आह्वान के बाद जम्मू यूनिवर्सिटी ने कई अहम फैसले लिए हैं. पीएम मोदी ने खुद अपने काफिले का आकार 50 प्रतिशत तक घटाया है, उसी से प्रेरणा लेते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी तेल बचत के लिए कदम उठाए हैं.
देश में पहली बार ऑनलाइन PhD वाइवा
जम्मू यूनिवर्सिटी देश की पहली ऐसी यूनिवर्सिटी बन गई है, जिसने PhD वाइवा वॉस को पूरी तरह ऑनलाइन मोड में कराने का फैसला किया है. इसके अलावा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में भी अब ऑनलाइन स्पीकर्स को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे यात्रा और ईंधन खर्च में कमी आएगी. तेल बचत के लिए यूनिवर्सिटी ने एक और बड़ा फैसला लिया है. पहले अकादमिक काउंसिल की बैठक पुंछ कैंपस में प्रस्तावित थी, लेकिन अब इसे रद्द कर मुख्य जम्मू कैंपस में ही आयोजित करने का निर्णय लिया गया है, ताकि यात्रा से होने वाले खर्च और ईंधन की खपत कम की जा सके.
साइकिल और कार पूलिंग को बढ़ावा
यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर उमेश राय ने स्टाफ, फैकल्टी और कर्मचारियों से अपील की है कि वे कैंपस तक आने के लिए साइकिल या कार पूलिंग का इस्तेमाल करें. उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ तेल की बचत होगी, बल्कि कर्मचारियों का खर्च भी कम होगा और स्वास्थ्य में भी सुधार होगा. यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बताया कि पिछले डेढ़ साल से कैंपस के अंदर निजी चार पहिया वाहनों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया गया है. इसके अलावा कैंपस के भीतर छोटी क्षमता वाले वाहनों का संचालन पहले से किया जा रहा है ताकि ईंधन की खपत सीमित रहे.
ऑनलाइन सिस्टम से करोड़ों की बचत का अनुमान
वाइस चांसलर के मुताबिक, यदि किसी PhD परीक्षा के लिए बाहरी परीक्षक को बुलाया जाए तो औसतन 15 से 20 हजार रुपये तक खर्च आता है. ऐसे में ऑनलाइन सिस्टम को अपनाने से यूनिवर्सिटी को करोड़ों रुपये की बचत होने का अनुमान है. यूनिवर्सिटी ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि आवश्यक न हो तो विदेशी यात्राओं से बचा जाएगा और अंतरराष्ट्रीय सहभागिता को ऑनलाइन माध्यम से ही बढ़ावा दिया जाएगा. इससे न सिर्फ विदेशी मुद्रा का खर्च कम होगा, बल्कि संसाधनों की बचत भी होगी.
जनभागीदारी ही समाधान: VC
वाइस चांसलर उमेश राय ने कहा कि तेल संकट केवल सरकार की समस्या नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने इसे एक “आपदा” और “इमरजेंसी” बताते हुए कहा कि देश के हर व्यक्ति को इस दिशा में सहयोग करना चाहिए. यूनिवर्सिटी का मानना है कि कार पूलिंग जैसे उपाय न केवल ईंधन बचत में मदद करेंगे, बल्कि कर्मचारियों के बीच आपसी संवाद और सामाजिक जुड़ाव भी बढ़ाएंगे, जिससे कार्यस्थल का माहौल बेहतर होगा.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं