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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बैठक में ही ट्रंप को धमकाया!

Donald Trump- Xi Jinping Meeting in Beijing: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बीजिंग के भव्य “ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल” में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ द्विपक्षीय बैठक की.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बैठक में ही ट्रंप को धमकाया!
Donald Trump Xi Jinping Meeting in Beijing: बीजिंग में 9 साल बाद मिले ट्रंप और जिनपिंग
  • अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के दौरान ताइवान मुद्दे को लेकर तनाव साफ दिखा
  • शी जिनपिंग ने ताइवान को चीन-अमेरिका संबंधों का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बताते हुए संघर्ष की चेतावनी दी
  • ट्रंप ने शी जिनपिंग की प्रशंसा की और दोनों देशों के भविष्य को शानदार बताया, लेकिन चीन का लहजा सख्त था

बीजिंग में दुनिया की दो सबसे बड़ी ताकतों की मुलाकात के बीच माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया. जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दोस्ती और शानदार भविष्य की बातें कर रहे थे, वहीं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने साफ चेतावनी दे दी कि अगर ताइवान मुद्दे को गलत तरीके से संभाला गया तो अमेरिका और चीन के बीच टकराव हो सकता है. शानदार स्वागत, रेड कार्पेट और मुस्कुराहटों के पीछे दोनों देशों के बीच गहरा तनाव साफ दिखाई दिया. अब पूरी दुनिया की नजर इस हाई-स्टेक्स बैठक पर टिकी है.

न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी दी कि अगर ताइवान के मुद्दे को सही तरीके से नहीं संभाला गया तो यह दोनों देशों को “संघर्ष” की तरफ धकेल सकता है. बीजिंग में गुरुवार को शुरू हुई इस अहम शिखर बैठक की शुरुआत में ही शी जिनपिंग का यह बयान सामने आया. इस बैठक में कई मुश्किल और संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा हुई है. व्हाइट हाउस के अनुसार बीजिंग के भव्य “ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल” में हुई यह बैठक खत्म हो चुकी है.

शी जिनपिंग का सख्त लहजा

ट्रंप ने द्विपक्षीय बैठक से पहले उद्घाटन भाषण (ओपनिंग रिमार्क) में अपने मेजबान की खूब तारीफ की. उन्होंने शी जिनपिंग को “महान नेता” और “दोस्त” बताया. ट्रंप ने यह भी कहा कि दोनों देशों का “भविष्य शानदार” होगा. लेकिन ट्रंप के स्वागत में भव्य कार्यक्रम होने के बावजूद शी जिनपिंग का लहजा ज्यादा सख्त नजर आया. उन्होंने कहा कि दोनों देशों को “साझेदार बनना चाहिए, प्रतिद्वंद्वी नहीं.”

उन्होंने शुरुआत में ही ताइवान का मुद्दा उठा दिया. चीन लोकतांत्रिक तरीके से चलने वाले स्वशासित ताइवान को अपना हिस्सा मानता है. चीन के सरकारी चैनल CCTV के मुताबिक, शी जिनपिंग ने कहा, “ताइवान का सवाल चीन-अमेरिका संबंधों का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है.” उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर इसे गलत तरीके से संभाला गया, तो दोनों देश टकरा सकते हैं या संघर्ष में भी जा सकते हैं। इससे पूरे चीन-अमेरिका संबंध बेहद खतरनाक स्थिति में पहुंच सकते हैं.”

यह लगभग 10 साल में किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की पहली चीन यात्रा है. हालांकि इस शानदार स्वागत के पीछे दोनों देशों के बीच व्यापार और भू-राजनीतिक तनाव अब भी बने हुए हैं. शी जिनपिंग ने बीजिंग के भव्य ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में ट्रंप का रेड कार्पेट स्वागत किया. वहां सैन्य बैंड, तोपों की सलामी और “वेलकम” के नारे लगाते स्कूली बच्चे मौजूद थे.

समारोह का आनंद लेते दिखे ट्रंप ने कहा, “चीन और अमेरिका के रिश्ते पहले से भी बेहतर होने वाले हैं.” लेकिन शी जिनपिंग ने प्राचीन यूनानी राजनीतिक सिद्धांत “थ्यूसीडिडीज ट्रैप” का जिक्र किया. यह सिद्धांत बताता है कि जब कोई उभरती ताकत किसी मौजूदा बड़ी ताकत को चुनौती देती है, तो युद्ध का खतरा बढ़ जाता है. शी ने सवाल उठाया, “क्या चीन और अमेरिका तथाकथित ‘थ्यूसीडिडीज ट्रैप' से ऊपर उठकर बड़े देशों के रिश्तों का नया मॉडल बना सकते हैं?”

बता दें कि 2017 में ट्रंप की पिछली चीन यात्रा के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ा है. पूरे 2025 में अमेरिका और चीन व्यापार युद्ध में उलझे रहे और कई बड़े वैश्विक मुद्दों पर भी दोनों के बीच मतभेद बने रहे.

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