- नेशनल कॉन्फ्रेंस के नाराज विधायकों और शीर्ष नेतृत्व के बीच हुई बैठक के बाद असंतोष का माहौल शांत हुआ है
- फारूक अब्दुल्ला ने पार्टी की एकजुटता पर जोर देते हुए किसी भी तरह की टूट की बातों को खारिज किया है
- नाराज विधायकों ने पार्टी छोड़ने से इनकार करते हुए नेतृत्व के प्रति अपनी निष्ठा और भरोसा जताया है
जम्मू-कश्मीर की सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस में पिछले एक सप्ताह से चल रहा असंतोष फिलहाल खत्म होता नजर आ रहा है. पार्टी के नाराज विधायकों और शीर्ष नेतृत्व के बीच हुई अहम बैठक के बाद माहौल काफी हद तक शांत हो गया. वरिष्ठ नेता फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने नाराज विधायकों की शिकायतें सुनीं और उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी चिंताओं पर गंभीरता से काम किया जाएगा.
करीब दो घंटे चली इस बैठक में पार्टी के कई नाराज विधायक शामिल हुए. बैठक के बाद सभी नेताओं ने पार्टी की एकजुटता पर जोर दिया और किसी भी तरह के विभाजन की अटकलों को खारिज कर दिया.
फारूक बोले, पार्टी को तोड़ना आसान नहीं
बैठक के बाद फारूक अब्दुल्ला ने साफ कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस में किसी तरह की टूट की बातें बेबुनियाद हैं. उन्होंने कहा कि पार्टी एकजुट है और जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा और राज्य का दर्जा वापस दिलाने की लड़ाई जारी रखेगी. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि विधायकों द्वारा उठाए गए कई मुद्दे वास्तविक हैं. उनके अनुसार कुछ मांगों पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी जबकि कुछ मामलों को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा.
नाराज विधायक बोले, पार्टी नहीं छोड़ेंगे
बैठक से बाहर आने के बाद असंतुष्ट खेमे के नेताओं ने भी पार्टी नेतृत्व के प्रति अपनी निष्ठा जताई. अब्दुल माजिद लारमी ने कहा कि वह नेशनल कॉन्फ्रेंस छोड़ने के बजाय मरना पसंद करेंगे. लारमी हाल ही में हुए कैबिनेट फेरबदल के खिलाफ खुलकर आवाज उठाने वाले पहले नेताओं में शामिल थे. वहीं श्रीनगर से सात बार विधायक रहे मुबारक गुल ने भी कहा कि वह पूरी तरह पार्टी नेतृत्व के साथ हैं और उन पर भरोसा रखते हैं.
क्या हैं नाराज विधायकों की मुख्य मांगें?
पार्टी के 41 विधायकों में से कम से कम 18 विधायक सरकार और संगठन के कामकाज में बड़े बदलाव की मांग कर रहे हैं. इन नेताओं का कहना है कि जनता की अपेक्षाओं और सरकार की कार्यशैली के बीच दूरी बढ़ रही है.
नाराज विधायकों ने मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी को हटाने की मांग की है. उनका आरोप है कि पार्टी नेतृत्व, जनप्रतिनिधियों और सरकार के बीच बढ़ती दूरी के लिए सलाहकार की भूमिका जिम्मेदार रही है. इसके अलावा विधायकों ने उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी से लोक निर्माण विभाग (PWD) का प्रभार वापस लेने की भी मांग की है. उन्होंने चौधरी पर कथित दुराचार और भ्रष्टाचार के आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग उठाई है.
जवाबदेही और घोषणापत्र लागू करने पर जोर
असंतुष्ट नेताओं का कहना है कि उनका उद्देश्य पार्टी को कमजोर करना नहीं बल्कि मजबूत बनाना है. पिछले एक सप्ताह में यह समूह चार अलग-अलग बैठकें कर चुका है और संगठन में आंतरिक लोकतंत्र, जवाबदेही तथा विधायकों को अधिक अधिकार देने की मांग उठा चुका है. इन नेताओं ने गैर-प्रदर्शनकारी मंत्रियों को बदलने, चुनावी घोषणापत्र को लागू करने और जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे व राज्य के दर्जे की बहाली के लिए नए सिरे से राजनीतिक लड़ाई शुरू करने की मांग भी रखी है.
विधायकों का कहना है कि वे बागी नहीं हैं बल्कि पार्टी और सरकार दोनों में सुधार चाहते हैं ताकि संगठन मजबूत हो और जनता का भरोसा कायम रहे. फिलहाल शीर्ष नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद विवाद शांत जरूर हुआ है लेकिन सुधार और जवाबदेही की मांगें अब भी नेशनल कॉन्फ्रेंस के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई हैं.
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