- केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन के रुके हुए पेमेंट जल्द जारी करने के लिए कैबिनेट से मंजूरी लेने का निर्णय लिया है
- जांच रिपोर्ट के बाद मिशन की अनियमितताओं पर संतोष व्यक्त कर पेमेंट रोकने का फैसला वापस लिया गया है
- प्रधानमंत्री मोदी ने भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं
ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक नल से जल पहुंचाने की केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन के रुके पेमेंट अब देने का फैसला किया गया है. सूत्रों के अनुसार जल्दी ही कैबिनेट से इस बारे में मंजूरी मिल सकती है. जल जीवन मिशन को लागू करने में कई राज्यों से अनियमितताओं की शिकायत मिलने के बाद पेमेंट रोक दिया गया था.
सूत्रों के अनुसार देश भर में की गई जांच की रिपोर्ट का विश्लेषण करने के बाद इस पर अब संतुष्टि व्यक्त की गई है. बताया गया है कि जल्दी ही कैबिनेट के सामने यह मामला जाएगा और उसके बाद रोका गया पेमेंट दिया जाएगा. इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने जल शक्ति मंत्रालय को निर्देश दिया था कि जहां-जहां गड़बड़ी पाई गई है वहां दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. पीएम मोदी का यह भी निर्देश है कि लागत की चिंता किए बिना यह सुनिश्चित किया जाए कि हर घर तक नल से जल पहुंचे.
इस बीच, यह भी खबर है कि केंद्र सरकार जल जीवन मिशन के लिए इस साल बजट में आवंटित 67 हजार करोड़ रुपए में करीब 60 प्रतिशत की कटौती कर इसे 17 हजार करोड़ रुपए पर लाने जा रही है. ऐसा इसलिए क्योंकि इस मिशन को 2028 तक बढ़ाने के लिए कैबिनेट की मंजूरी मिलनी बाकी है और अगले दो-तीन महीने में इस साल के लिए आवंटित राशि का खर्च हो पाना मुश्किल है.
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जीरो टॉलरेंस पर काम कर रही है मोदी सरकार
दरअसल, सरकार का उद्देश्य यह है कि हर ग्रामीण के जीवन को छूने वाली इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ जमीन पर सही ढंग से सभी को पहुंचना चाहिए. इसीलिए यह फैसला किया गया था कि जब तक मौजूदा काम की समीक्षा और गड़बड़ियों की जांच न हो, तब तक पेमेंट न किया जाए. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस के साथ आगे बढ़ा जाए और जो भी दोषी हों उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. वहीं जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल भी कह चुके हैं कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा.
20 राज्यों ने ऐक्शन टेकन रिपोर्ट भेजी है
जल जीवन मिशन में गड़बड़ी की शिकायतें मिलने के बाद पूरे देश में ऑडिट के लिए सीएनओ यानी सेंट्रल ऑडिट ऑफिसर्स को ट्रेनिंग देकर भेजा गया था. उन्होंने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. इनकी रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकारों से कार्रवाई करने को कहा गया था. अभी तक 20 राज्यों असम, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, केरल, लद्दाख, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, ओडिशा, राजस्थान, त्रिपुरा, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पंजाब और पश्चिम बंगाल ने ऐसी शिकायतों पर ऐक्शन टेकन रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी है.
इन राज्यों में गड़बड़ी के 607 मामले पाए गए, जिनमें विभाग के 621 अधिकारियों, 969 ठेकेदार और 153 थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की गई है. राजस्थान में तो एक पूर्व मंत्री महेश जोशी की गिरफ्तारी भी की गई. अभी तक 20 अफसरों, 10 ठेकेदारों और एक टीपीआईए के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है. इन मामलों में एक पूर्व मंत्री, दस अधिकारियों और आठ ठेकेदारों की गिरफ्तारी भी हुई है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं