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Exclusive: QUAD क्या अब भी महत्वपूर्ण? अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो का तगड़ा जवाब

अमेरिका और भारत के रिश्तों में क्वाड की खास जगह है. कभी अमेरिका क्वाड को बहुत गंभीरता से लेता था, मगर हाल के दिनों में इसकी धमक कुछ कम होती दिखी. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियों ने साफ किया कि क्वाड का उद्देश्य क्या होने वाला है.

Exclusive: QUAD क्या अब भी महत्वपूर्ण? अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो का तगड़ा जवाब
नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास में मार्को रूबियो.
  • क्वाड का गठन 2007 में हुआ था और इसकी वास्तविक भूमिका 2017 से वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण मानी जाने लगी
  • क्वाड के सदस्य देश भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया हैं, जो आर्थिक और सामरिक दृष्टि से मजबूत हैं
  • भारत के साथ रक्षा उत्पादन, प्रौद्योगिकी साझेदारी और निवेश बढ़ाने के लिए अमेरिका नई संभावनाएं तलाश रहा है
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क्वाड (QUAD) का 2007 में गठन किया. मगर असली धमकी इसकी 2017 से सुनाई देने लगी. जापान के प्रधानमंत्री रहे शिंजो आबे की पहल पर बने क्वाड में जापान के अलावा भारत, अमेरिका और आस्ट्रेलिया सदस्य हैं. क्वाड को लेकर इतनी बातें होने लगी कि चीन भी इसे लेकर कई बार बयान देने लगा. मगर हाल के दिनों में क्वाड चर्चा से गायब सा हो गया. अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो भारत आए तो एनडीटीवी ने क्वाड के महत्व पर सवाल पूछा. क्या क्वाड अब भी महत्वपूर्ण है?

क्यों क्वाड जरूरी?

मार्को रूबियो ने कहा, 'कौन कहता है क्वाड महत्वपूर्ण नहीं है. मैं ऐसा नहीं मानता. मैं तो मानता हूं कि ये पहले से और ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है. क्वाड में हम चार शक्तिशाली देश हैं. चार आर्थिक शक्ति हैं. हम चारों मिलकर दुनिया में बड़ा बदलाव ला सकते हैं. एक उदाहरण मान लीजिए रेयर अर्थ मिनरल्स सप्लाई चेन का संकट. इससे निपटने के लिए हम चारों देशों की टेबल पर कुछ ना कुछ है. क्वाड के पास इतनी ताकत है कि वो कई समस्याओं पर ध्यान दे सकता है. क्वाड के साथ चुनौती मुद्दों को प्राथमिकता देना है. क्वाड से ठोस परिणाम मिलने चाहिए.' 

भारत क्यों जरूरी?

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका और भारत के संबंधों की नींव बहुत मजबूत है. पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के संबंध भी दोनों देशों के बीच काफी अच्छे रहे हैं. दोनों देश के रिश्ते बेहद करीबी हैं. अभी अमेरिकी दूतावास में भी मैंने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति हमारे रुख और दृष्टिकोण में भारत बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. ये दौरा इस रिश्ते में और नए क्षेत्रों को खोलने और ढूंढने के लिए है. मार्को रूबियो ने कहा, 'हम डिफेंस में भारत के साथ को-प्रोडक्शन करना चाहते हैं. टेक्नोलॉजी में मिलकर काम करना चाहते हैं. निवेश में साथ काम करना चाहते हैं. भारतीय कंपनियों ने ही अकेले 20 बिलियन डॉलर का अमेरिका में निवेश किया हुआ है. तो ये रिश्तों में नई संभावनाएं तलाशने का दौरा है.'

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