- मार्को रूबियो की यात्रा में क्रिटिकल मिनरल्स, एनर्जी सिक्योरिटी और डिफेंस टेक्नोलॉजी पर समझौते हुए हैं
- अमेरिका-भारत फ्रेमवर्क में खनन से लेकर रेयर अर्थ मैग्नेट निर्माण तक में संयुक्त निवेश और सह-विकास शामिल है
- एनर्जी सिक्योरिटी इनिशिएटिव के माध्यम से भारत क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा में अहम भूमिका निभाएगा
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो की 4 दिन की भारत यात्रा में कई अहम समझौते हुए हैं, जिनमें क्रिटिकल मिनरल्स, एनर्जी सिक्योरिटी, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और डिफेंस टेक्नोलॉजी शामिल हैं। इसके चलते अमेरिका-भारत बिजनेस काउंसिल (USIBC) ने इस यात्रा को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों में से एक में एक ऐतिहासिक पल बताया है.
इस यात्रा का मुख्य आकर्षण 'अहम खनिजों और रेयर अर्थ्स पर अमेरिका-भारत फ्रेमवर्क' पर हस्ताक्षर करना था. यह एक ऐसा समझौता है जिसे खनन और प्रोसेसिंग से लेकर रेयर अर्थ मैग्नेट के निर्माण तक, पूरी वैल्यू चेन में संयुक्त निवेश पाइपलाइन, ऑफ-टेक समझौते और सह-विकास साझेदारी बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। इसका समय भी बहुत सोच-समझकर चुना गया है. जैसे-जैसे चीन ग्लोबल रेयर अर्थ सप्लाई चेन पर अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है, अमेरिका और भारत लोकतांत्रिक साझेदारियों पर आधारित वैकल्पिक नेटवर्क बनाने की कोशिश कर रहे हैं.
इस घोषणा को मजबूती और तब मिली जब क्वॉड ने बैठक के दौरान अपना खुद का 'क्रिटिकल मिनरल फ्रेमवर्क' पेश किया. क्वाड में अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं.
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एनर्जी सिक्योरिटी पर क्या हुआ?
होर्मुज स्ट्रेट जैसे समुद्री रास्तों पर बढ़ते तनाव से तेल और खाद की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच मार्को रूबियो की यात्रा में दो बड़े ऊर्जा समझौते हुए. पहला- क्वाड फ्यूल सिक्योरिटी फोरम. और दूसरा- क्वाड इनिशिएटिव ऑन इंडो-पैसिफिक एनर्जी सिक्योरिटी. इस समझौते से भारत अब क्षेत्री एनर्जी मजबूती का अहम स्तंभ बनेगा.
USIBC के अध्यक्ष रिटायर्ड एंबेसेडर अतुल केशप ने कहा कि एनर्जी सिक्योरिटी, क्रिटिकल मिनरल्स और समुद्री बंदरगाहों पर हुई घोषणाएं दिखाती हैं कि क्वाड में बहुत जान और लॉजिक है. उन्होंने कहा कि नई दिल्ली में क्वाड की बैठक होना वैश्विक साझेदार के तौर पर भारत की भूमिका को और मजबूत करता है.
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टेक और डिफेंस में भी समझौता
इस यात्रा में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, समुद्र के नीचे केबल कनेक्टिविटी, नेक्स्ट जेनरेशन कम्युनिकेशन स्टैंडर्ड, बायो-मैनुफैक्चरिंग और फार्मा सप्लाई चेन पर भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी. USIBC इसे अमेरिकी और भारतीय कंपनियों के लिए एक बड़े मौके के रूप में देख रहा है.
द्विपक्षीय स्तर पर TRUST फ्रेमवर्क फॉर स्ट्रैटेजिक टेक्नोलॉजी कोऑपरेशन, सिविलियन न्यूक्लियर पावर और डेटा सेंटर्स पर प्रगति, डिफेंस को-प्रोडक्शन और लंबे समय से अटके द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर नई गति, ये सब मिलकर यूएस-इंडिया साझेदारी की 'महत्वाकांक्षा' दिखाते हैं.

चीन को लेकर भी अहम समझौता
रूबियो का दौरा ऐसे समय हुआ, जब ग्लोबल सप्लाई चेन दबाव में है. जियो-पॉलिटिक्स में उथल-पुथल हो रही है और अमेरिका और भारत दोनों ही अहम टेक्नोलॉजी और कमोडिटीज के लिए 'विरोधी देशों' पर निर्भरता घटाना चाहते हैं. रूबियो के ये यात्रा इसी रणनीतिक तालमेल को तेज करने और कूटनीतिक सद्भावना को एक मजबूत व्यापारिक ढांचे में बदलने के लिए थी.
USIBC ने कहा कि वह सभी प्राथमिक क्षेत्रों में योजनाओं को लागू करने के लिए इंडस्ट्री पार्टनर्स के साथ काम करेगा. काउंसिल ने कहा कि दुनिया के बड़े लोकतंत्र तभी सबसे बेहतर होते हैं, जब वे साथ मिलकर लीड करते हैं.
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