बॉलीवुड एक्टर टाइगर श्रॉफ पर रविवार रात को तीन हमलावरों ने गोली चला दी. इस हमले में टाइगर बाल-बाल बचे. हालांकि, उनके ड्राइवर को गोली लग गई और वह घायल हो गए. इस हमले की लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली. लॉरेंस गैंग से जुड़े अनिल पंडित ने इस हमले की जिम्मेदारी ली.
अनमोल पंडित ने फेसबुक पर एक पोस्ट में दावा किया कि सलमान खान के साथ जो भी रहेगा, उसके साथ ऐसा ही होगा.
पिछले कुछ सालों में लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने कई हमलों की जिम्मेदारी ली है. लॉरेंस गैंग से जुड़े लोग फिल्मी इंडस्ट्री से जुड़े लोगों पर हमला कर रहे हैं, उन्हें धमका रहे हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या लॉरेंस बिश्नोई नया दाऊद इब्राहिम बन गया है.
फिल्म इंडस्ट्री और अंडरवर्ल्ड की दुनिया
मुंबई के अंडरवर्ल्ड और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के बीच रिश्ते दशकों पुराने हैं, जब हाजी मस्तान जैसे गैंगस्टर फिल्म हस्तियों के साथ उठते-बैठते थे और फिल्मों को फाइनेंस कराने का काम भी करते थे.
अंडरवर्ल्ड और बॉलीवुड के बीच रिश्ते 1950-60 के दशक में सोने-चांदी की तस्करी और फिल्मों की फाइनेंसिंग के साथ शुरू हुए थे.
महबूब खान की 1957 की क्लासिक फिल्म 'मदर इंडिया' एक बेहतरीन उदाहरण है, जिसे स्वतंत्र रूप से फाइनेंस किया गया था.
1940 और 1950 के दशक में बॉम्बे टॉकीज, आरके फिल्म्स और फिल्मिस्तान जैसे बड़े स्टूडियो सामने आए, जो फिल्म फाइनेंसिंग का मुख्य केंद्र बन गए.
1980-90 के दशक में यह संबंध अपने चरम पर पहुंच गए, जिसमें जबरन वसूली, धमकियां, दुबई में पार्टियां, कास्टिंग और फंडिंग पर कथित प्रभाव जैसी चीजें शामिल थीं.
माना जाता है कि उस समय आपराधिक गिरोह फिल्मों में पैसा लगाते थे, ओवरसीज राइट्स (विदेशों में फिल्म दिखाने के राइट्स) मांगते थे और कास्टिंग के फैसलों में भी अपनी मर्जी थोपने की कोशिश करते थे.
1990 के दशक के आखिर या 2000 के दशक की शुरुआत तक बैंक फिल्मों को बहुत कम फाइनेंस करते थे, इसलिए प्रोड्यूसर्स पैसों के लिए 'डॉन' की ओर रुख करने लगे.
अंडरवर्ल्ड ने फिल्मों का इस्तेमाल काले धन को सफेद करने (मनी लॉन्ड्रिंग) और अपना रुतबा बढ़ाने के लिए किया. वहीं, कई सितारे सुरक्षा या अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए उनके साथ उठते-बैठते थे.
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हाजी मस्तान: मुंबई का बड़ा डॉन
मुंबई के शुरुआती बड़े डॉन में से एक हाजी मस्तान का डॉक (बंदरगाह), गुजरात तट और क्रॉफर्ड मार्केट के इलाकों में तस्करी पर नियंत्रण था, जहां वह सोना, चांदी और इलेक्ट्रॉनिक्स का कारोबार करता था.
उसने गरीबों के बीच अपनी एक 'रॉबिन हुड' जैसी छवि बनाई थी. दूसरे डॉन के साथ अच्छे रिश्ते रखे और व्यक्तिगत हिंसा से दूर रहा. वह फिल्मी सितारों के साथ खुलकर मेल-जोल रखता था.
उसने फिल्मों में पैसा लगाया और बाद में कुछ फिल्मों को प्रोड्यूस भी किया. उसकी जिंदगी से प्रेरित होकर ही 1975 की फिल्म 'दीवार' में अमिताभ बच्चन का 'विजय' वाला किरदार और 2010 की फिल्म 'वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबई' में अजय देवगन का 'सुल्तान मिर्जा' वाला किरदार गढ़ा गया था.

दाऊद इब्राहिम और डी-कंपनी
दाऊद इब्राहिम कासकर जो एक पुलिस कांस्टेबल का बेटा था, ने एक छोटे स्तर के अपराधी के रूप में शुरुआत की और बाद में हाजी मस्तान के खास आदमी (लेफ्टिनेंट) के तौर पर उभरा.
1981 में पठानों ने उसके भाई शब्बीर की हत्या कर दी है, जिसका बदला लेने की घटनाओं ने गैंगवार का रूप ले लिया.
दाऊद अलग हो गया और उसने 'डी-कंपनी' बनाई. हत्या के आरोप लगने के बाद, 1984-86 के आसपास वह दुबई भाग गया और मुंबई में सबसे ताकतवर बन गया.
कहा जाता है कि जब फिल्मों के लिए वैध फंडिंग मिलना मुश्किल होता था, तब डी-कंपनी ऊंची ब्याज दरों पर पैसा उधार देती थी.
दाऊद दुबई में शानदार पार्टियां करवाता था, जिनमें फिल्मी सितारे शामिल होते थे. दिलीप कुमार, ऋषि कपूर, अमजद खान और कई सितारों ने सार्वजनिक रूप से माना था कि वे उससे मिले थे और उन्हें उससे महंगे तोहफे मिले थे.
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मुंबई ब्लास्ट के बाद बदले हालात
1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट (जिसमें दाऊद और उसके साथियों को मास्टरमाइंड माना गया) के बाद पुलिस एनकाउंटर तेज हो गए.
इसके साथ ही कॉर्पोरेट स्टूडियो का आना, बैंकों से फंडिंग मिलना और फिल्म इंडस्ट्री का व्यवस्थित होना शुरू हुआ, जिससे अंडरवर्ल्ड की पकड़ ढीली पड़ गई.
कई डॉन या तो भाग गए, या मारे गए, या फिर जेल चले गए. हालांकि, उनके करीबी लोगों के जरिए उनका कुछ प्रभाव बना रहा, लेकिन खुलकर पार्टियां करने और फिल्मों में लगातार पैसा लगाने का वह पुराना दौर खत्म हो गया.
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और अब लॉरेंस गैंग
अंडरवर्ल्ड की पकड़ ढीली हो गई, लेकिन बीते कुछ सालों में लॉरेंस गैंग का दबदबा तेजी से बढ़ा है.
अप्रैल 2024 में सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग हुई थी. बाइक पर आए दो हमलावरों ने कई राउंड फायरिंग की थी.
मुंबई पुलिस का आरोप है कि यह हमला जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के इशारे पर किया गया था.
सितंबर 2025 में उत्तर प्रदेश के बरेली में बॉलीवुड एक्ट्रेस दिशा पाटनी के परिवार के घर के बाहर बंदूकधारियों ने फायरिंग की.
फरवरी 2026 में जुहू में फिल्म प्रोड्यूसर रोहित शेट्टी के घर पर भी गोलीबारी हुई. मुंबई पुलिस ने 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है.
पुलिस का आरोप है कि यह हमला लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े एक समूह ने अपना दबदबा कायम करने के लिए किया था.
अब रविवार को टाइगर श्रॉफ पर तीन हमलावरों ने गोलियां चलाईं. हमले में टाइगर बाल-बाल बचे. अगर थोड़ी सी भी चूक होती तो अनहोनी हो सकती थी.
टाइगर पर हमले की जिम्मेदारी लॉरेंस गैंग ने ली. लॉरेंस गैंग से जुड़े अनिल पंडित ने फेसबुक पर लिखा, 'मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में जो भी हमारी बात नहीं सुनेगा या सलमान खान के साथ काम करेगा, अगला नंबर उसका होगा.'
इस मामले में पुलिस ने तीनों हमलावरों को गिरफ्तार कर लिया है. तीनों को कोटा पुलिस ने एक ट्रेन से गिरफ्तार किया है.
कौन है लॉरेंस बिश्नोई
लॉरेंस बिश्नोई पंजाब के फाजिल्का जिले का रहने वाला गैंगस्टर है. उसने चंडीगढ़ के DAV कॉलेज में पढ़ाई की और छात्र राजनीति से जुड़ा. कहा जाता है कि विरोधी छात्र समूहों के साथ टकराव के बाद वह अपराध की दुनिया में आ गया.
आगजनी और हत्या के प्रयास जैसे आरोपों में गिरफ्तार होने के बाद, उन्हें चंडीगढ़ की एक जेल में भेज दिया गया, जहां कथित तौर पर उसका संपर्क अन्य गैंगस्टरों से हुआ. समय के साथ, उनका नेटवर्क दिल्ली और आसपास के राज्यों तक फैल गया.
पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में उनके गिरोह का अन्य विरोधी गिरोहों के साथ वर्चस्व की लड़ाई (टर्फ वॉर) भी देखने को मिली है.
बाद में उसका नाम हत्या, धमकी और वसूली के कई मामलों में सामने आया. सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड और सलमान खान को धमकी देने के मामले से भी नाम जुड़ा. वह गुजरात की साबरमती जेल में बंद है.
भारत की जेलों में बंद रहकर भी इंटरनेशनल सिंडिकेट चला रहा है, जिसका संचालन विदेश में गोल्डी बराड़ और अनमोल बिश्नोई करते हैं.
करीब एक दशक पहले तक लॉरेंस बिश्नोई का नाम पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली की पुलिस फाइलों तक सीमित था.
उसके खिलाफ हत्या, रंगदारी और गैंगवार के मामले दर्ज थे. लेकिन जुलाई 2026 में तस्वीर पूरी तरह बदल गई.
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