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गड्ढों से लेकर प्रोजेक्ट लागत तक... अब दिल्ली की सड़कों पर QR कोड स्कैन कर जानें पूरी डिटेल

अधिकारियों के मुताबिक, सभी डिस्प्ले बोर्ड एक समान डिजाइन में होंगे और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वे साफ दिखाई दें और QR कोड हर समय काम करें. अगर उसी सड़क पर दोबारा काम होता है, तो जानकारी को अपडेट करना भी जरूरी होगा.

गड्ढों से लेकर प्रोजेक्ट लागत तक... अब दिल्ली की सड़कों पर QR कोड स्कैन कर जानें पूरी डिटेल
AI की तस्वीर
  • दिल्ली के सड़कों पर QR कोड वाले डिस्प्ले बोर्ड लगाने शुरू किए हैं ताकि काम की जानकारी मिल सके.
  • QR कोड स्कैन करने पर सड़क का नाम, लंबाई, ठेकेदार, लागत और डिफेक्ट लाइबिलिटी पीरियड की पूरी जानकारी मिलेगी.
  • लोग QR कोड के जरिए सड़क की गुणवत्ता पर शिकायत, सुझाव या अनुभव सीधे दर्ज कर सकेंगे.
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दिल्ली की सड़कों पर अब QR कोड दिखेंगे और एक स्कैन से आप जान सकेंगे कि सड़क पर कितना खर्च हुआ, काम किसने किया और अगर शिकायत हो तो उसे तुरंत दर्ज भी कर सकेंगे. लोक निर्माण विभाग (PWD) ने शहर में जिन सड़कों पर स्ट्रेंथनिंग और री-कार्पेटिंग का काम पूरा हो चुका है, वहां QR कोड वाले डिस्प्ले बोर्ड लगाने शुरू कर दिए हैं. इसका मकसद सड़क निर्माण से जुड़ी जानकारी को आम लोगों तक पहुंचाना और उन्हें सीधे फीडबैक देने का विकल्प देना है.

नए नियम के तहत, किसी भी सड़क का काम पूरा होने के सात दिनों के भीतर ये बोर्ड बस क्यू शेल्टर, प्रमुख चौराहों और ज्यादा आवाजाही वाले इलाकों में लगाए जाएंगे, ताकि लोग आसानी से इन्हें देख और इस्तेमाल कर सकें. QR कोड स्कैन करने पर प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी सामने आ जाएगी- सड़क का नाम और लंबाई, आखिरी बार कब काम हुआ, किस ठेकेदार या एजेंसी ने काम किया, कितनी लागत स्वीकृत हुई और डिफेक्ट लाइबिलिटी पीरियड कितना है. इसी प्लेटफॉर्म पर लोग सड़क की गुणवत्ता को लेकर शिकायत, सुझाव या अपना अनुभव भी सीधे दर्ज कर सकेंगे.

PWD मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा कि इस कदम का मकसद लोगों को सीधे प्रक्रिया में शामिल करना है. पारदर्शिता का मतलब सिर्फ जानकारी देना नहीं, बल्कि लोगों की बात सुनना भी है. इस पहल के माध्यम से नागरिक न केवल सड़क कार्यों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे, बल्कि अपनी प्रतिक्रिया भी सीधे दे सकेंगे. इससे व्यवस्था अधिक जवाबदेह और संवेदनशील बनेगी.

उन्होंने कहा कि QR प्लेटफॉर्म में फीडबैक सिस्टम भी जोड़ा गया है. हम यह भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि QR प्लेटफॉर्म के भीतर एक प्रभावी फीडबैक सिस्टम मौजूद हो. इससे नागरिकों और विभाग के बीच सीधा संवाद स्थापित होगा, जिससे गुणवत्ता में सुधार और समय पर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी.

अधिकारियों के मुताबिक, सभी डिस्प्ले बोर्ड एक समान डिजाइन में होंगे और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वे साफ दिखाई दें और QR कोड हर समय काम करें. अगर उसी सड़क पर दोबारा काम होता है, तो जानकारी को अपडेट करना भी जरूरी होगा.

इसके साथ ही निगरानी के लिए एक व्यवस्था भी बनाई गई है. सभी डिवीजनों को 10 दिनों के भीतर कार्य पूर्णता रिपोर्ट जमा करनी होगी और जोनल स्तर पर इसकी नियमित जांच की जाएगी.

यह कदम ऐसे समय में आया है जब सड़कों की गुणवत्ता, बार-बार खुदाई और काम की पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं. QR कोड के जरिए जानकारी और शिकायत दोनों को एक जगह लाकर PWD सड़क निर्माण को ज्यादा पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की कोशिश कर रहा है. अब देखना यह होगा कि क्या लोग इन QR कोड्स का इस्तेमाल कर इसे एक वास्तविक जवाबदेही का जरिया बना पाते हैं.

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