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चीन और पाक से निपटने के लिए कैसे बदल रही है भारतीय सेना, आप भी जान लीजिए

सूत्रों के अनुसार इसका औपचारिक रोलआउट 2021 में होना था, लेकिन कोविड-19 महामारी और पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ लंबे गतिरोध के कारण इसमें देरी हुई.

चीन और पाक से निपटने के लिए कैसे बदल रही है भारतीय सेना, आप भी जान लीजिए
नई दिल्ली:

भारतीय सेना आज आधुनिक, मोबाइल, रणनीतिक और आत्मनिर्भर स्वरूप में तेजी से परिवर्तित हो रही है. डिजिटल एकीकरण, AI, रियल-टाइम डेटा और सुरक्षित संचार पर फोकस के साथ साथ भैरव जैसी नई मोबाइल ड्रोन-आधारित यूनिट्स तथा नए हथियारों के साथ सेना अत्यंत फुर्तीली व बहु-क्षेत्रीय युद्ध के लिए तैयार है.  यह परिवर्तन न केवल सीमा सुरक्षा बल्कि भविष्य की अनिश्चित चुनौतियों के लिए भी भारतीय सेना को विश्वस्तरीय, तकनीक-संचालित शक्ति बना रहा है.

चीन और पाकिस्तान की ओर से बढ़ते गठजोड़ वाले खतरों से निपटने के लिये सेना ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है . आर्मी डे के मौके पर सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का यह बयान काफी मायने रखता है कि "हाल के सालों में भारतीय सेना की सोच में एक स्पष्ट बदलाव आया हैं . हम केवल मौजूदा मौजूदा चुनौतियों पर नहीं बल्कि भविष्य के युद्धों की तैयारी पर भी गंभीरता से काम कर रहे हैं . इस दिशा में नया स्ट्रक्चर बनाया जा रहा है जिन्हें भविष्य की जरूरत के मुताबिक इक्विप्ड और ट्रेंड किया जा रहा हैं . सेना को अधिक तेज़, फुर्तीला और घातक बनाने के उद्देश्य से बलों का पुनर्गठन और पुनर्संरचना की जा रही है.

इसी कड़ी में भारतीय सेना ने अब औपचारिक रूप से इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप  के गठन का ऐलान कर दिया हैं. सेना ने यह घोषणा तब की है  जब सेना पहले ही अश्नि प्लाटून, भैरव बटालियन, शक्तिबाण रेजिमेंट और रुद्र ब्रिगेड जैसी नई संरचनाओं को सार्वजनिक कर चुकी है.सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के मुताबिक पानागढ़ स्थित 17 माउंटेन स्ट्राइक कॉर्प्स को अब IBG आधारित ढांचे में परिवर्तित कर दिया गया है. पहले इसके जिम्मे चीन से लगती सीमा की जिम्मेदारी थी . 

आईबीजी में फायर सपोर्ट ग्रुप में होगा .फायर सपोर्ट ग्रुप में पिनाका, प्रलय, स्मर्च और ब्रह्मोस जैसी लंबी दूरी की मारक प्रणालियाँ शामिल होंगी, जो IBG को निर्णायक फायरपावर प्रदान करेंगी.

क्या है इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप?

IBG को डिवीजन और कोर के बीच की संरचना के रूप में विकसित किया गया है. इसका उद्देश्य जमीनी कमांडरों को बिना समय गंवाए तेज़ी से निर्णय लेने और कार्रवाई करने में सक्षम बनाना है. सेना के सूत्रों के मुताबिक IBG को मुख्य रूप से स्ट्राइक ऑपरेशन्स के लिए तैयार किया गया है.एक IBG में पैदल सेना, तोपखाना, बख्तरबंद टुकड़ियां, इंजीनियर्स, सिग्नल्स, एयर डिफेंस और अन्य हथियार व सेवाएं शामिल होंगी. इनकी तैनाती आदेश मिलने के 48 घंटे के भीतर की जा सकेगी.हर IBG में 5000 से 6000 सैनिक होंगे और इसकी कमान मेजर जनरल रैंक का अधिकारी संभालेगा. ये सीधे कोर मुख्यालय के अधीन काम करेंगे. सूत्रों के अनुसार निर्णय प्रक्रिया को तेज़ करने के लिए ब्रिगेड स्तर को हटाया जा रहा है और बटालियन व यूनिट सीधे IBG के तहत कार्य करेंगी.

रुद्र ब्रिगेड से अलग कैसे है IBG?

सेना पहले ही सात रुद्र ब्रिगेड खड़ी करने की योजना की घोषणा कर चुकी है, जिनमें से दो सक्रिय हो चुकी हैं. रुद्र ब्रिगेड एक ऑल-आर्म्स, टेर्रेन और टास्क-स्पेसिफिक संरचना है, जिसे विशेष और रक्षात्मक प्रकृति के सक्रिय अभियानों के लिए डिज़ाइन किया गया है. इसमें 3000 से 3500 सैनिकों के बीच होगी और इसकी कमान ब्रिगेडियर रैंक का अधिकारी संभालेगा.वहीं IBG अपेक्षाकृत बड़ी, अधिक मोबाइल और आक्रामक संरचना है, जिसे सीमित समय में निर्णायक सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार किया गया है.

क्यों पड़ी IBG की ज़रूरत?

2001 में संसद पर हमले के बाद शुरू हुए ऑपरेशन पराक्रम के दौरान सैनिकों की तैनाती में कई सप्ताह लग गए थे. इस देरी ने सेना और सरकार दोनों को यह सोचने पर मजबूर किया कि परमाणु पृष्ठभूमि में एक तेज़ और सीमित युद्ध क्षमता विकसित की जाए. 2016 के उरी हमले और 2017 के डोकलाम गतिरोध के बाद IBG की अवधारणा को औपचारिक रूप मिला. 2018 में तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने इसे भारतीय सेना की भविष्य की संगठनात्मक संरचना बताया था. 2018 से 2020 के बीच IBG को पाकिस्तान और चीन दोनों मोर्चों पर परखा गया.

सूत्रों के अनुसार इसका औपचारिक रोलआउट 2021 में होना था, लेकिन कोविड-19 महामारी और पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ लंबे गतिरोध के कारण इसमें देरी हुई. रक्षा प्रतिष्ठान के सूत्रों का कहना है कि IBG की संरचना काफी हद तक पहले ही तैयार थी और 17 माउंटेन स्ट्राइक कॉर्प्स की इकाइयाँ लंबे समय से इसी मॉडल पर काम कर रही थीं.  जाहिर सी बात है सेना अब आक्रमक, लचीला और घातक बन रही है ताकि किसी हालात का बिना किसी देरी के बख़ूबी जवाब दे सके .

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