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सेना में शामिल होने की गौरवशाली परंपरा: एक परिवार, 5 पीढ़ी और 185 साल... हवलदार से लेफ्टिनेंट तक पहुंचा सफर

शुक्ला परिवार के दस्तावेजी विवरण के अनुसार, इस परिवार की सैन्य सेवा की विरासत 1841 में शुरू हुई थी, जो आज भी निरंतर जारी है. अब इस परिवा की 5वीं पीढ़ी के तन्मय शुक्ला 7 मार्च को लेफ्टिनेंट के रूप में सेना में शामिल होंगे.

सेना में शामिल होने की गौरवशाली परंपरा: एक परिवार, 5 पीढ़ी और 185 साल... हवलदार से लेफ्टिनेंट तक पहुंचा सफर
प्रतीकात्मक तस्वीर.
  • शुक्ला परिवार की सेना में सेवा की विरासत 1841 से शुरू होकर लगातार पांच पीढ़ियों तक जारी है.
  • परिवार की पहली पीढ़ी के हवलदार कर्ता राम शुक्ला ने द्वितीय आंग्ल-बर्मा युद्ध और 1857 के विद्रोह में भाग लिया.
  • पांचवीं पीढ़ी के तन्मय 7 मार्च को गया ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी से लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त करेंगे.
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नई दिल्ली:

सेना में शामिल होना सिर्फ जीविकोपार्जन का जरिया नहीं देश सेवा का उत्कृष्ट मौका बनाता है. आज आपको भारत के एक ऐसे परिवार से मिलवाते हैं, जिसकी 5 पीढ़ी पिछले 185 साल से भारतीय सेना में शामिल होकर देश सेवा में जुटी है. इस परिवार की पांचवीं पीढ़ी के तन्मय शुक्ला अब भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त करने जा रहे हैं. बताया गया कि जेंटलमैन कैडेट (GC) तन्मय शुक्ला 7 मार्च को ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA) गया से भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त करेंगे. 

1841 से शुरू हुआ था शुक्ला परिवार के सेना में जाने का सफर 

शुक्ला परिवार के दस्तावेजी विवरण के अनुसार, शुक्ला परिवार की सैन्य सेवा की विरासत 1841 में शुरू हुई थी, जो आज भी निरंतर जारी है. 5वीं पीढ़ी के सैनिक की आगामी कमीशनिंग पर परिवार ने कहा: "यह अंत नहीं बल्कि एक निरंतरता है. एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को सौंपी गई वह मशाल, जो कर्तव्य और समर्पण के मार्ग को आगे बढ़ा रही है जिस पर हमारा परिवार लगभग दो शताब्दियों से चल रहा है."

185 साल से सेना में शामिल शुक्ला परिवार

पहली पीढ़ीः हवलदार कर्ता राम शुक्ला (1841–1859)

सेना में जाने वाले शुक्ला परिवार की पहली पीढ़ी के कर्ता राम शुक्ला 32 बंगाल नेटिव इन्फैंट्री (ब्राह्मण) में थे. वो द्वितीय आंग्ल-बर्मा युद्ध और 1857 के विद्रोह के दौरान सक्रिय रहे. 

दूसरी पीढ़ी नायक हरि नारायण शुक्ला (1909–1923) 

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान स्वेज नहर की रक्षा और मेसोपोटामिया अभियान में शामिल हुए.

तीसरी पीढ़ी लेफ्टिनेंट कर्नल श्री निवास शुक्ला (1954–1990) 

1962, 1965 और 1971 के युद्धों सहित 1987 में 'ऑपरेशन पवन' (श्रीलंका) में हिस्सा लिया. 

चौथी पीढ़ी कर्नल बिपिन कुमार शुक्ला 

वर्तमान में भारतीय सेना में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं. 

पांचवीं लेफ्टिनेंट तन्मय शुक्ला 

अभी गया में ट्रेनिंग ले रहे हैं. 7 मार्च 2026 से लेफ्टिनेंट के रूप में सेना में शामिल होंगे. तन्मय ने कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की है. 

शुक्ला परिवार की तीसरी पीढ़ी के लेफ्टिनेंट कर्नल श्री निवास शुक्ला ने सेना से रिटायरमेंट के बाद सितंबर 2020 में ग्रामीण क्षेत्रों में मुफ्त चिकित्सा सेवा प्रदान करने के लिए 'सैनिक परमार्थ चिकित्सालय ट्रस्ट' की स्थापना की थी. उनका 1 जून 2021 को निधन हो गया. 

शुक्ला परिवार ने कहा, "आज के दौर में जहाँ कंप्यूटर साइंस स्नातक कॉर्पोरेट क्षेत्र में लाखों-करोड़ों के वेतन पैकेज पाते हैं, वहीं तन्मय ने आकर्षक अवसरों को छोड़कर देश की सेवा करने का सचेत निर्णय लिया. उनका यह चुनाव दर्शाता है कि युवा पीढ़ी के लिए देशभक्ति और सेवा आज भी जीवंत आदर्श हैं."

7 मार्च को गया में होने वाली पासिंग आउट परेड (PoP) के दौरान, जेंटलमैन कैडेट तन्मय शुक्ला औपचारिक रूप से शपथ लेंगे और भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में नियुक्त होंगे.

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