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बर्फ, रेगिस्तान और खतरे में जवानों के साथ डटे रहने वाले साथियों का सम्मान, ऊंट से लेकर डॉग्स तक कौन-कौन शामिल

सेना प्रमुख ने लद्दाख और सियाचिन जैसे कठिन इलाकों में तैनात ऊंट, पोनी और आर्मी डॉग्स को उनके असाधारण योगदान के लिए सम्मानित किया.

बर्फ, रेगिस्तान और खतरे में जवानों के साथ डटे रहने वाले साथियों का सम्मान, ऊंट से लेकर डॉग्स तक कौन-कौन शामिल
  • सेना प्रमुख ने दुर्गम इलाकों में तैनात ऊंटों, जांस्कारी पोनी, आर्मी डॉग्स को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया
  • बैक्ट्रियन ऊंटों ने ठंडे रेगिस्तानी क्षेत्रों में भारी सामान ढोने और रसद पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
  • विलुप्तप्राय जांस्कारी पोनी ने सियाचिन ग्लेशियर के अग्रिम क्षेत्रों में सैनिकों को आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई

भारतीय सेना प्रमुख ने देश के सबसे कठिन और दुर्गम इलाकों में तैनात दो बैक्ट्रियन ऊंटों, दो जांस्कारी पोनी और दो आर्मी डॉग्स को उनके खास योगदान के लिए सम्मानित किया. यह सम्मान उन्हें चुनौतीपूर्ण अभियानों में अहम भूमिका निभाने के लिए दिया गया. लद्दाख के ठंडे रेगिस्तानी क्षेत्रों में तैनात बैक्ट्रियन ऊंट रसद पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते रहे हैं.

लद्दाख के ठंडे रेगिस्तानों में तैनात बैक्ट्रियन ऊंट उच्च ऊंचाई वाले इलाकों में लॉजिस्टिक्स के लिए बेहद अहम साबित हुए हैं. ये ऊंट कठिन भू-भाग और खड़ी चढ़ाइयों पर भारी सामान ढोने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. ये ऊंट बहुत ठंडे मौसम और 15,000 फीट से ज्यादा ऊंचाई पर आसानी से काम कर सकते हैं. इसके अलावा ये 250 किलो तक का सामान ढो सकते हैं और भोजन के रूप में कम पानी-चारे में भी लंबी दूरी तय करते हैं. इससे सेना को दूरदराज और कठिन इलाकों में रसद पहुंचाने में बड़ी मदद मिलती है. 

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मुश्किल मिशन में जवानों के असली साथी

भारी सामान ढोने, ऊबड़‑खाबड़ रास्तों और तीखी ढलानों को पार करने में ये ऊंट सेना के लिए बेहद काम के है. सेना के अनुसार, इन ऊंटों ने उन इलाकों में भी सप्लाई सुनिश्चित की, जहां आधुनिक वाहन पहुंचना बेहद मुश्किल होता है. वहीं, जांस्कारी पोनी, जो विलुप्तप्राय नस्ल मानी जाती है. उन्होंने सियाचिन ग्लेशियर और उसके आसपास के अग्रिम क्षेत्रों में तैनात सैनिकों का हर मुश्किल स्थिति में साथ निभाया.

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आर्मी डॉग्स भी सम्मानित

बर्फीली ऊंचाइयों और बेहद कम तापमान के बावजूद इन पोनीज ने सैनिकों के लिए आवश्यक सामग्री पहुंचाने में निरंतर सहयोग दिया. इस अवसर पर आर्मी डॉग्स को भी सम्मानित किया गया. निगरानी, ट्रैकिंग और ऑपरेशनल कार्यों के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित ये आर्मी डॉग्स अलग‑अलग भौगोलिक इलाकों में तैनात सैनिकों की सुरक्षा और मिशनों की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं.

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साथ ही निगरानी, ट्रैकिंग और ऑपरेशनल कार्यों के लिए प्रशिक्षित सेना के डॉग्स ने विभिन्न प्रकार के इलाकों में सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अभियानों की प्रभावशीलता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है. ये आतंकवाद विरोधी अभियानों, विस्फोटक और बारूदी सुरंगों की पहचान, खोज-बचाव कार्यों और आपदा राहत में सैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हैं। कई बार इन डॉग्स ने अपनी जान की परवाह किए बिना सैनिकों की जान बचाई है. 

जानवरों के अदम्य साहस को सलाम

सेना प्रमुख द्वारा किए गए इस सम्मान समारोह में इन जानवरों की निष्ठा, साहस, सहनशक्ति और सेवा का जिक्र किया गया. सेना ने बताया कि ये साइलेंट वॉरियर्स हर परिस्थिति में भारतीय जवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर देश की सेवा कर रहे हैं.इस दौरान जिन जानवरों को COAS Commendation Card से नवाजा गया, उनमें बैक्ट्रियन ऊंट गलवान और नुब्रा,आर्मी डॉग्स जेडी (Belgian Shepherd) और डिस्को (Labrador) शामिल हैं.

भारतीय सेना का कहना है कि सीमावर्ती और दुर्गम इलाकों में इन पशुओं का योगदान सैनिक अभियानों की रीढ़ है और उनके इस योगदान को सम्मानित करना सेना की परंपरा और संवेदनशीलता का प्रतीक है.

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