भारत ने ईरान और अमेरिका के बीच हुए संघर्षविराम (सीजफायर) का स्वागत करते हुए इसे पश्चिम एशिया में शांति की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया है. भारत सरकार ने कहा है कि वह उम्मीद करती है कि यह संघर्षविराम क्षेत्र में स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त करेगा.
आधिकारिक बयान में भारत ने पहले की तरह एक बार फिर यह दोहराया कि तनाव कम करने, संवाद और कूटनीति के जरिए ही किसी भी संघर्ष का स्थायी समाधान निकल सकता है. भारत का मानना है कि बातचीत और राजनयिक प्रयास ही हिंसा को रोकने और जल्द शांति बहाल करने का एकमात्र रास्ता हैं.
Statement on the recent development in West Asia ⬇️
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) April 8, 2026
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'आम लोगों को झेलने पड़ी पीड़ा'
भारत ने यह भी कहा कि इस संघर्ष के कारण अब तक आम लोगों को भारी पीड़ा झेलनी पड़ी है. इसके साथ ही, युद्ध जैसी स्थिति ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार नेटवर्क को भी गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है.
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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का भी किया जिक्र
बयान में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का विशेष रूप से जिक्र करते हुए भारत ने उम्मीद जताई कि वहां से आने-जाने वाले जहाजों की स्वतंत्रता बिना किसी बाधा के जारी रहेगी और वैश्विक व्यापार का प्रवाह सामान्य रूप से चलता रहेगा. भारत ने दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा और मुक्त व्यापार वैश्विक स्थिरता के लिए बेहद आवश्यक है.
कुल मिलाकर, भारत ने सीजफायर को एक अहम अवसर बताते हुए सभी पक्षों से संयम, संवाद और शांति बनाए रखने की अपील की है.
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