- भारत का प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तमिलनाडु के कलपक्कम में ईंधन भरने की मंजूरी के करीब है.
- पीएफबीआर 500 मेगावाट का लिक्विड सोडियम-कूल्ड रिएक्टर है जो प्लूटोनियम से थोरियम ऊर्जा उत्पादन में सक्षम होगा.
- फास्ट ब्रीडर रिएक्टर भारत के त्रि-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम का मुख्य हिस्सा हैं.
भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम एक परिवर्तनकारी चरण में प्रवेश करने के लिए तैयार है. इसका सबसे उन्नत और जटिल परमाणु रिएक्टर—प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर)—कार्यात्मक रूप से तैयार होने के करीब है. तमिलनाडु के कलपक्कम में स्थित, पीएफबीआर वर्षों की देरी और तकनीकी बाधाओं के बाद आखिरकार ईंधन भरने के करीब पहुंच रहा है. इस सप्ताह, भारतीय परमाणु नियामक द्वारा रिएक्टर कोर में परमाणु ईंधन भरने की औपचारिक मंज़ूरी मिलने की उम्मीद है, जो एक महत्वपूर्ण कदम है और ये भारत के त्रि-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के दूसरे चरण की शुरुआत का प्रतीक होगा.
क्या है इसका महत्व
एनडीटीवी से विशेष बातचीत में, परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार मोहंती ने पुष्टि की, "ईंधन ट्रांसफर में एक मैकेनिकल प्रॉब्लम थी. उसे हल कर लिया गया है. अब पीएफबीआर को ईंधन भरने के महत्वपूर्ण चरण को शुरू करने के लिए भारत के परमाणु नियामक से औपचारिक मंजूरी का इंतजार है."पीएफबीआर एक 500 मेगावाट का लिक्विड सोडियम-कूल्ड रिएक्टर है, जिसे प्लूटोनियम को ईंधन के रूप में उपयोग करने और अंततः थोरियम में परिवर्तित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है. ये एक ऐसा संसाधन है, जिसका भारत दुनिया के सबसे बड़े भंडारों में से एक रखता है. यूरेनियम के विपरीत, जो भारत में सीमित है, थोरियम दीर्घकालिक ऊर्जा स्वतंत्रता का वादा करता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत थोरियम का सफलतापूर्वक उपयोग कर लेता है, तो वह एक ऐसे ऊर्जा स्रोत को खोल सकता है जो सदियों तक चलता रहेगा—जिसे अक्सर परमाणु ऊर्जा का 'अक्षय पात्र' कहा जाता है.
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परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड के अध्यक्ष दिनेश कुमार शुक्ला रिएक्टर की सुरक्षा पर ज़ोर देते हुए कहते हैं, "पीएफबीआर एक स्वाभाविक रूप से सुरक्षित रिएक्टर है."फास्ट ब्रीडर रिएक्टर अपनी खपत से ज़्यादा ईंधन पैदा करने की क्षमता के कारण अद्वितीय हैं. "फास्ट" शब्द विखंडन प्रक्रिया में उच्च-ऊर्जा वाले फ़ास्ट न्यूट्रॉन के उपयोग को दर्शाता है. भारत पहले से ही कलपक्कम में एक छोटा फ़ास्ट ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर (FBTR) संचालित कर रहा है, जो चार दशकों से भी ज़्यादा समय से सफलतापूर्वक चल रहा है. डॉ. मोहंती के अनुसार, "इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR) द्वारा निर्मित FBTR ने 40 मेगावाट की लक्षित शक्ति पर 34 विकिरण अभियान पूरे किए हैं. फ़ास्ट रिएक्टर के अपशिष्ट ईंधन के पुनर्चक्रण के लिए प्रदर्शन सुविधा का भी सफलतापूर्वक संचालन किया गया." जनवरी 2025 में, भारत सरकार ने विकसित भारत के लिए परमाणु ऊर्जा मिशन का शुभारंभ किया, जिसका लक्ष्य 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावाट तक बढ़ाना है. पीएफबीआर जैसे फास्ट ब्रीडर रिएक्टर इस दृष्टिकोण के केंद्र में हैं, जो टिकाऊ और स्केलेबल तरीके से कम कार्बन बिजली प्रदान करते हैं.
कब शुरू हुआ काम
पीएफबीआर परियोजना को 2003 में भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (भाविनी) के गठन के साथ मंजूरी दी गई थी, जिसे रिएक्टर के निर्माण और संचालन का कार्य सौंपा गया था. बीस साल पुराना डिज़ाइन होने के बावजूद, पीएफबीआर एक तकनीकी चमत्कार बना हुआ है. डॉ. मोहंती ने स्पष्ट रूप से कहा, "पीएफबीआर एक बहुत ही जटिल मशीन है और इसमें महारत हासिल करना आसान नहीं है. जैसे ही हम एक कदम आगे बढ़ते हैं, हमें रुकावटों का सामना करना पड़ता है और हमें दो कदम पीछे हटना पड़ता है." पीएफबीआर यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड (एमओएक्स) ईंधन का उपयोग करता है. कोर के चारों ओर यूरेनियम-238 का एक "कम्बल" होता है, जो अधिक ईंधन उत्पन्न करने के लिए परमाणु रूपांतरण से गुजरता है—इसलिए इसे "ब्रीडर" कहा जाता है. भविष्य के चरणों में, थोरियम-232 का उपयोग यूरेनियम-233 के उत्पादन के लिए एक कम्बल पदार्थ के रूप में किया जाएगा, जो एक विखंडनीय पदार्थ है जो भारत के तीसरे चरण के रिएक्टरों को शक्ति प्रदान करेगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 मार्च, 2024 को पीएफबीआर का व्यक्तिगत रूप से निरीक्षण किया और कोर लोडिंग प्रक्रिया देखी. परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) पीएफबीआर को निष्क्रिय सुरक्षा विशेषताओं वाला तीसरी पीढ़ी का रिएक्टर बताता है, जो आपात स्थिति में तुरंत और सुरक्षित शटडाउन करने में सक्षम है. पीएफबीआर परमाणु अपशिष्ट की चुनौती का भी समाधान करता है. भारत के परमाणु कार्यक्रम के पहले चरण के खर्च किए गए ईंधन का उपयोग करके, यह अपशिष्ट की मात्रा और बड़े पैमाने पर भूवैज्ञानिक निपटान की आवश्यकता को काफी कम करता है.
सिर्फ रूस के पास ये तकनीक
अपनी उन्नत तकनीक के बावजूद, पीएफबीआर की पूंजीगत लागत और प्रति यूनिट बिजली की लागत पारंपरिक बिजली संयंत्रों के बराबर ही है. शुरुआत में 5,677 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत इस परियोजना की लागत में वृद्धि देखी गई है, जिसका वर्तमान अनुमान 6,840 करोड़ रुपये है. आत्मनिर्भर भारत पहल के अनुरूप, पीएफबीआर को भाविनि द्वारा पूरी तरह से स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित किया गया है, जिसमें एमएसएमई सहित 200 से अधिक भारतीय उद्योगों का योगदान है. एक बार चालू हो जाने पर, भारत रूस के बाद वाणिज्यिक फास्ट ब्रीडर रिएक्टर संचालित करने वाला दूसरा देश बन जाएगा. पीएफबीआर केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है—यह ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास की दिशा में एक रणनीतिक छलांग है. जैसे-जैसे भारत अपने सबसे उन्नत रिएक्टर में ईंधन भरने की तैयारी कर रहा है, दुनिया एक ऐसे राष्ट्र को देख रही है जो स्वदेशी नवाचार के साथ परमाणु जटिलता में महारत हासिल कर रहा है.पीएफबीआर द्वारा अपनी परिचालन विश्वसनीयता सिद्ध करने के बाद, कलपक्कम में दो और फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों की स्थापना की योजना है. दृढ़ता और नवाचार से चिह्नित भारत की परमाणु यात्रा अब एक नए अध्याय में प्रवेश कर रही है—एक ऐसा अध्याय जो प्लूटोनियम द्वारा संचालित, थोरियम द्वारा निर्देशित और ऊर्जा स्वतंत्रता के स्वप्न से प्रेरित है.
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