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600 किमी प्रति घंटा की रफ्तार, 6,000 मीटर की उड़ान... रूस के इस ड्रोन ने बदल दिए युद्ध के नियम

600 Kmph की रफ्तार और 6,000 मीटर तक उड़ान भरने वाला रूस का Geran-5 ड्रोन यूक्रेन की एयर डिफेंस के लिए नई चुनौती बन गया है. जानिए कैसे यह जेट-संचालित ड्रोन युद्ध की रणनीति, लागत और हवाई सुरक्षा के पुराने नियम बदल रहा है.

600 किमी प्रति घंटा की रफ्तार, 6,000 मीटर की उड़ान... रूस के इस ड्रोन ने बदल दिए युद्ध के नियम

रफ्तार 600 किलोमीटर प्रति घंटा...उड़ान की ऊंचाई 6,000 मीटर. आकार ड्रोन का, लेकिन असर क्रूज मिसाइल जैसा.....ये है रूस का नया हथियार, जिसे नाम दिया गया है- Geran-5. इसकी मारक क्षमता का आलम ये है कि यूक्रेन की थर्ड आर्मी कॉर्प्स के डिप्टी कमांडर मक्सिम झोरिन को कहना पड़ा, "हमें नहीं पता कि इनसे कैसे निपटें."...दरअसल Geran-5 सिर्फ एक ड्रोन नहीं, बल्कि युद्ध के बदलते स्वरूप की नई तस्वीर बनकर उभरा है. रूस और यूक्रेन के बीच ढाई साल से जारी युद्ध में पिछले कुछ महीनों से एक नया ट्रेंड देखने को मिला है. रूस बड़ी संख्या में जेट इंजन से लैस Geran-5 ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है. ये ड्रोन न सिर्फ पहले के Shahed ड्रोन से कहीं तेज हैं, बल्कि यूक्रेन की मौजूदा एयर डिफेंस व्यवस्था को भी चुनौती दे रहे हैं. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इसने युद्ध में लागत, रणनीति और हवाई सुरक्षा से जुड़े पुराने समीकरण बदल दिए हैं.

Shahed से Geran-5 तक, रूस ने कैसे बदला खेल?

जब 2022 में रूस ने ईरानी डिजाइन वाले Shahed ड्रोन का इस्तेमाल शुरू किया था, तब यूक्रेन ने उसका असरदार जवाब भी तैयार कर लिया था. मशीनगन से लैस मोबाइल यूनिट, इंटरसेप्टर ड्रोन और कम दूरी की मिसाइलों ने इन ड्रोन को बड़े पैमाने पर मार गिराना शुरू कर दिया. लेकिन रूस यहीं नहीं रुका.

उसने Shahed का विकसित संस्करण तैयार किया. इसे Geran सीरीज नाम दिया गया. पहले Geran-3 आया, फिर Geran-4 और अब Geran-5. नए ड्रोन में पारंपरिक पिस्टन इंजन और प्रोपेलर की जगह छोटे टर्बोजेट इंजन लगाए गए हैं.

इसकी वजह से इनकी रफ्तार कई गुना बढ़ गई. जहां पुराने Shahed ड्रोन अपेक्षाकृत धीमे थे, वहीं Geran-5 लगभग 600 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ सकता है. उड़ते समय इसकी ऊंचाई 5,000 से 6,000 मीटर तक है और रेंज 1,000 किलोमीटर के करीब बताई जा रही है.

क्यों बेअसर हो रही है यूक्रेन की पुरानी रणनीति?

यूक्रेन की एयर डिफेंस व्यवस्था को मुख्य रूप से धीमी रफ्तार वाले प्रोपेलर ड्रोन के खिलाफ तैयार किया गया था. पहले यूक्रेनी सैनिक मशीनगनों, गन ट्रकों और कम लागत वाले इंटरसेप्टर ड्रोन की मदद से Shahed ड्रोन को गिरा देते थे. इन इंटरसेप्टर ड्रोन की कीमत करीब 1,400 से 3,000 डॉलर तक पड़ती थी. लेकिन Geran-5 ने यह पूरी रणनीति ही धाराशाही कर दी है. सबसे पहली वजह उसकी रफ्तार है. यूक्रेन के अधिकांश इंटरसेप्टर ड्रोन 250 से 300 किलोमीटर प्रति घंटा की अधिकतम गति तक ही पहुंच पाते हैं. ऐसे में 600 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ने वाले लक्ष्य को पकड़ना बेहद मुश्किल हो जाता है.  दूसरी बड़ी समस्या ऊंचाई है. Geran-5 इतनी ऊंचाई पर उड़ सकता है कि मशीनगनों से उसे निशाना बनाना लगभग असंभव हो जाता है.

हवा में ही नहीं, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध में भी मजबूत

डिफेंस एक्सपर्ट्स के मुताबिक, Geran-5 के कुछ नए संस्करण इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम से लैस हैं. इसका मतलब यह है कि जब कोई इंटरसेप्टर ड्रोन उसके करीब पहुंचता है, तो Geran-5 उसका वीडियो लिंक या नियंत्रण प्रणाली बाधित कर सकता है. इससे पीछा कर रहा ड्रोन लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही नियंत्रण खो सकता है.  यूक्रेनी वायुसेना के अधिकारियों का कहना है कि इन ड्रोन की सबसे खतरनाक बात ये भी है कि इन्हें उड़ान के दौरान ऑपरेटर द्वारा निर्देशित किया जा सकता है. यानी ये अपना रास्ता और ऊंचाई बदल सकते हैं. इससे इन्हें ट्रैक करना और मुश्किल हो जाता है.

संख्या के दम पर भी जीत रहा है रूस

एक्सपर्ट्स का मानना है कि Geran-5 की असली ताकत केवल उसकी तकनीक नहीं, बल्कि उसकी संख्या भी है. रूस ने जून में करीब 450 जेट-संचालित ड्रोन दागे थे. अगस्त तक यह संख्या बढ़कर लगभग 2,850 हो गई. कई हमलों में इस्तेमाल किए गए ड्रोन में 70 प्रतिशत तक जेट-संचालित Geran शामिल थे. विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर किसी हमले में 800 ड्रोन भेजे जाएं और एयर डिफेंस 90 प्रतिशत को भी मार गिराए, तो भी 80 ड्रोन अपने लक्ष्य तक पहुंच जाएंगे. यही रणनीति रूस अपना रहा है.

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यूक्रेन की मिसाइलें खत्म करवाना भी है मकसद

रूस का उद्देश्य सिर्फ लक्ष्यों को नष्ट करना नहीं है. वह यूक्रेन की एयर डिफेंस प्रणाली को थकाना और उसके संसाधनों को खत्म करना चाहता है. हर हमले में यूक्रेन को महंगी इंटरसेप्टर मिसाइलें इस्तेमाल करनी पड़ती हैं. दूसरी ओर Geran-5 अपेक्षाकृत कम लागत वाला हथियार है. ऐसे में रूस कम पैसे खर्च कर यूक्रेन को ज्यादा आर्थिक और सैन्य नुकसान पहुंचा रहा है. डिफेंस एक्सपर्ट्स इसे "Cost Imposition Strategy" कहते हैं. यानी विरोधी को लगातार महंगे संसाधन खर्च करने पर मजबूर करना.

यूक्रेन के सामने क्या विकल्प हैं?

पहली नजर में लगता है कि सस्ते और तेज ड्रोन भविष्य में मिसाइलों की जगह ले सकते हैं. लेकिन एक्सपर्ट्स ऐसा नहीं मानते. उनके मुताबिक, बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें अभी भी मजबूत बंकरों, अत्यधिक सुरक्षित ठिकानों और अत्यंत अहम लक्ष्यों पर हमले के लिए जरूरी हैं. हालांकि अब भूमिका बदल रही है. ड्रोन बड़ी संख्या में हमला करके एयर डिफेंस को व्यस्त रखते हैं, जबकि असली और महंगी मिसाइलें बाद में महत्वपूर्ण लक्ष्यों को निशाना बनाती हैं. यूक्रेन फिलहाल कई विकल्पों पर काम कर रहा है. इनमें सस्ती निर्देशित मिसाइलें विकसित करना, ड्रोन को गलत GPS सिग्नल भेजना और नए जेट-संचालित इंटरसेप्टर तैयार करना शामिल है. कुछ रणनीतियों में यह भी शामिल है कि इंटरसेप्टर ड्रोन पीछे से पीछा करने की बजाय सीधे सामने से टक्कर मारकर Geran-5 को गिराएं. हालांकि अब तक कोई भी समाधान पूरी तरह सफल साबित नहीं हुआ है.

दुनिया के लिए सबसे बड़ा सबक क्या है?

रूस-यूक्रेन युद्ध ने यह साफ कर दिया है कि भविष्य का युद्ध सिर्फ बेहतर हथियारों का नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर सस्ते हथियारों का भी होगा. Geran-5 ने दिखाया है कि कैसे अपेक्षाकृत कम लागत वाला ड्रोन हजारों किलोमीटर दूर मौजूद सैन्य ठिकानों, रिफाइनरी, हवाई अड्डों और बिजली संयंत्रों के लिए खतरा बन सकता है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में दुनिया की सेनाओं को सिर्फ बेहतर एयर डिफेंस सिस्टम ही नहीं, बल्कि हजारों ड्रोन के झुंड को रोकने के लिए सस्ते और तेज समाधान भी विकसित करने होंगे.

युद्ध का नया समीकरण

कभी देश के बेहद भीतर मौजूद सैन्य ठिकानों को सुरक्षित माना जाता था. लेकिन Geran-5 जैसे ड्रोन उस सोच को बदल रहे हैं. आज चुनौती सिर्फ यह नहीं है कि दुश्मन के हथियार को रोका जाए. असली चुनौती यह है कि क्या कोई देश उतनी ही तेजी और उतनी ही संख्या में जवाबी हथियार बना सकता है? यही वजह है कि विशेषज्ञ Geran-5 को सिर्फ एक नया ड्रोन नहीं, बल्कि युद्ध के नियम बदलने वाला हथियार मान रहे हैं. आने वाले वर्षों में दुनिया की सेनाएं इस युद्ध को सिर्फ रूस और यूक्रेन के संघर्ष के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य की लड़ाइयों की प्रयोगशाला के रूप में भी देखेंगी.
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