राजस्थान में भरतपुर का एक संयुक्त परिवार सुर्खियों में है. पांच भाइयों के 55 सदस्यों के परिवार में बहुत प्रेम भाव है. सभी लोग साथ रहते हैं और यहां तक कि इनके घर में एक ही चूल्हे पर सबकी रोटियां बनती हैं. दरकते रिश्तों के दौर में जब एकल परिवार भी बिखर जा रहे हैं, ऐसे में इतने बड़े संयुक्त परिवार का एक साथ जीवन व्यतीत करना एक सुखद आश्चर्य की तरह देखा जा रहा है. आज के युग में जब धन-संपत्ति और दूसरी वजहों से एक ही कोख से जन्मे भाई-भाई में दुश्मनी हो जाती है, वैसे में 5 भाइयों का परिवार बिना किसी मनमुटाव के मिलकर रहता है. अब इस परिवार के बारे में यह भी जानकारी सामने आई है कि इसकी सबसे युवा पीढ़ी के 15 बच्चे जयपुर रहकर एक साथ पढ़ाई करते हैं.
सबके लिए समान चीज़ें आती हैं
यह चर्चित चौधरी परिवार भरतपुर के हलैना से करीब 4 किमी दूर गांव रमासपुर में रहता है. परिवार के मुखिया मुरारी चौधरी बताते हैं,"पांचो भाइयों में कभी भी मनमुटाव नहीं हुआ. अगर कोई बात होती है तो आपस में बैठकर के सुलझा लेते हैं. इस घर में सभी के लिए एक ही समान सामान आता है. अगर बाजार से कोई भी चीज आई तो सभी के लिए बराबर आएगी, किसी के लिए कम या ज्यादा नहीं."
इस परिवार की सबसे खास बात ये है कि इसमें 5 सगे भाइयों की शादी एक ही घर में हुई है. पांचों बहुएं एक ही मां की सगी बेटियां हैं. पांचों बेटों की शादी करौली जिले के एक ही गांव में हुई है. सभी भाइयों के 15 बच्चे हैं जो जयपुर में पढ़ाई कर रहे हैं.

परिवार के सबसे बड़े भाई मुरारी चौधरी (बीच में)
Photo Credit: NDTV
15 बच्चे जयपुर में करते हैं पढ़ाई
इस परिवार के पांच भाइयों में से एक भाई सरकारी कर्मचारी है. वह जयपुर के एक सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज में एलडीसी के पद पर कार्यरत है. उसे सरकारी क्वार्टर मिला हुआ है. वह भाई अपने सभी भाइयों के बच्चों को लेकर जयपुर रहता है. शिक्षा की जिम्मेदारी वही भाई उठा रहा है और सभी बच्चे उसी के साथ एक छत के नीचे रहकर पढ़ाई करते हैं. गांव में दूसरे सभी भाई उसकी सैलरी नहीं लेते हैं, बल्कि खुद ही गांव से उसे खर्च उसे देते हैं. मुरारी चौधरी बताते हैं कि पांचों भाइयों में इतना प्रेम है कि वो महीने में दो बार जयपुर जाते हैं और वहां जाकर सभी बच्चों और अपने भाई के हाल-चाल पूछते रहते हैं.
गांव वालों ने बना दिया सरपंच
मुरारी चौधरी बताते हैं गांव के लोगों को उनके परिवार का मेल-जोल बहुत पसंद आता है और उन्होंने उन्हें सरपंची भी थमा दी है. सबसे बड़े भाई मुरारी की पत्नी ग्राम पंचायत गोविंदपुरा की सरपंच हैं, लेकिन पद का जरा भी घमंड नहीं है. मुरारी चौधरी ने कहा,"हम बहुत पैसेवाले नहीं हैं. लेकिन लोगों ने देखा कि जब ये घर को चला रहा है तो ग्राम पंचायत भी चला सकता है. इस तरह से ग्रामीणों ने हमें सरपंच बना दिया."
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