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This Article is From Aug 06, 2024

खालिदा जिया, आर्मी चीफ या फिर कौन? किसके हाथ में होगी बांग्लादेश की कमान?

बांग्लादेश में छात्रों द्वारा आरक्षण के विरोध में 2 महीने से जारी हिंसा के बीच शेख हसीना ने सोमवार 5 अगस्त को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. 15 साल से लगातार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रही शेख हसीना अब तक पांच बार देश की कमान संभाल चुकी हैं.

खालिदा जिया, आर्मी चीफ या फिर कौन? किसके हाथ में होगी बांग्लादेश की कमान?
नई दिल्ली:

बांग्लादेश में तख्तापालट और शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद राजनीतिक संकट गहरा आ गया है. शेख हसीना फिलहाल भारत में हैं और कोई अन्य देश जाने की तैयारी में हैं,  ऐसे में सवाल उठ रहा  है कि बांग्लादेश की कमान किसके हाथ में होगी. क्या सेना देश चलाएगी या फिर कोई अंतरिम सरकार बनेगी, जो भी हो..लेकिन देश की बागडोर किसके हाथ में होगी यानी बांग्लादेश का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा, इसका जवाब हर कोई खोज रहा है.

बांग्लादेश में छात्रों द्वारा आरक्षण के विरोध में 2 महीने से जारी हिंसा के बीच शेख हसीना ने सोमवार 5 अगस्त को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. 15 साल से लगातार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रही शेख हसीना अब तक पांच बार देश की कमान संभाल चुकी हैं. लेकिन अब हसीना पूर्व प्रधानमंत्री हैं और फिलहाल भारत में शरण लिए हुए हैं. ऐसे में नए प्रधानमंत्री को चुनने की कवायद शुरू हो गई है. बांग्लादेश का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा इसकी तस्वीर साफ नहीं है लेकिन जानकारी के अनुसार इस रेस में कई नाम हैं. 

इस रेस में पहला नाम है पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का, जिसे तेजी से बदले घटनाक्रम में बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने 5 अगस्त को रिहा करने का आदेश दिया. जिया घर में नजर बंद थी. जिया की रिहाई की खबर के बाद चर्चा है कि वो भी देश की पीएम बन सकती हैं.

कौन हैं खालिद जिया?

78 साल की खालिद जिया का जन्म 1945 में हुआ था. खालिदा फिलहाल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की अध्यक्ष हैं, जिसे उनके पति जियाउर रहमान ने साल 1978 में बनाया था. वो साल 1991 से 1996 और फिर 2001 से 2006 तक दो बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रह चुकी हैं. हालांकि, भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया था. जिया को शेख हसीना की अवामी लीग की धुर विरोधी और मुख्य विपक्षी पार्टी है. खालिदा का झुकाव जमात-ए-इस्लामी की तरफ है. ऐसे में खालिदा जिया को जमात-ए-इस्लामी का साथ भी मिल सकता है. 

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कुछ रिपोर्ट्स में ये भी कहा जा रहा है कि खालिदा जिया के बेटे और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी बीएनपी के कार्यवाहक चेयरमैन तारिक रहमान का भी नाम PM की रेस में शामिल है.

कौन हैं तारिक रहमान?

तारिक रहमान का जन्म 20 नवंबर 1965 को पाकिस्तान के कराची में हुआ था.तारिक के पिता जिया उर रहमान पाकिस्तान के राष्ट्रपति रह चुके हैं जबकि मां खाली जिया बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री थी. तारिक साल 2018 से बीएनपी के कार्यवाहक चेयरमैन हैं. हालांकि, 2018 में ढाका ग्रेनेड अटैक में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, जिसके बाद से बांग्लादेश में वह भगौड़ा घोषित हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लंदन में रह रहे तारिक अब अपने देश वापस लौट सकते हैं.

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डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, छात्र आंदोलन के प्रमुख आयोजकों ने डॉ. मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के रूप में प्रस्तावित किया है. सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में आंदोलन के प्रमुख समन्वयकों में से एक नाहिद इस्लाम ने कहा कि वे पहले ही प्रोफेसर यूनुस से बात कर चुके हैं और उन्होंने अपनी सहमति दे दी है.

कौन हैं डॉ. मोहम्मद यूनुस?

मोहम्मद यूनुस एक सोशल वर्कर है, बैंकर और इकोनॉमिस्ट है. गांव के लोगों का स्तर बढ़ाने और उन्हें बैंकों तक पहुंचाने के लिए 2006 में उन्हें नोबेल पुरस्कार मिला है. साल 2007 में यूनुस ने नागरिक शक्ति के नाम से पार्टी बनाई थी.  मोहम्मद यूनुस के ऊपर गबन के भी आरोप हैं.

इस बीच, बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमान का नाम भी चर्चा में है. उन्होंने कहा कि शेख हसीना के इस्तीफा के बाद अब अब हम शासन करेंगे. अंतरिम सरकार का गठन करके देश चलाएंगे. हमारे देश का नुकसान हो रहा है. संपत्ति का नुकसान हो रहा है. मुझे दायित्व दीजिए, मैं सब संभाल लूंगा.

कौन है आर्मी चीफ वकार उज जमान?

जनरल वकार ने 20 दिसंबर 1985 को बांग्लादेश सेना को ज्वाइन किया था. वो बांग्लादेश सैन्य अकादमी में 13वें बीएमए लॉन्ग कोर्स से ग्रेजुएशन होने के बाद में आए थे उन्होंने काफी अहम पदों पर काम किया. वकार उज-जमान ने नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ बांग्लादेश से डिफेंस स्टडी में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है.

वहीं, खालिदा जिया और सेना के साथ जमात-ए-इस्लामी को भी सरकार का दावेदार माना जा रहा है. इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा रहा है कि जब राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के साथ बैठक हुई तो जमात-ए-इस्लामी के नेता भी वहां मौजूद थे. ऐसे में माना जा रहा है कि अंतरिम सरकार पर कोई फैसला होता है तो जमात-ए-इस्लामी को भी अहम भूमिका दी जा सकती है.

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