- बांग्लादेश में लोन का भुगतान दूसरा सबसे बड़ा खर्च बन गया है. जीडीपी के मुकाबले कर्ज का अनुपात 39% हो गया है
- विश्व बैंक की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश का बाहरी कर्ज पिछले पांच वर्षों में 42 प्रतिशत बढ़ गया है
- चीन से अधिक उधारी के चलते 2022 में श्रीलंका डिफॉल्ट की ओर चला गया था, जिससे वहां अव्यवस्था फैल गई थी
चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) में हिस्सेदार बनने से पड़ोसी देश बांग्लादेश ठीक उसी तरह के कर्ज के जाल में फंस गया है, जिसमें कभी श्रीलंका था. श्रीलंकाई न्यूज आउटलेट एशियन न्यूज पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश ठीक उसी रास्ते पर जा रहा है, जिस पर कभी श्रीलंका गया था.
चीन से उधारी में डिफॉल्टर हो गया था श्रीलंका
चीन से अधिक उधारी के चलते 2022 में श्रीलंका डिफॉल्ट की ओर चला गया था, जिससे वहां अव्यवस्था का माहौल पैदा हो गया था. रिपोर्ट में बताया गया कि बांग्लादेश कर्ज के जाल में फंस गया है. इसकी पुष्टि बांग्लादेश के राष्ट्रीय राजस्व बोर्ड के अध्यक्ष एम. अब्दुर रमन खान ने की है.
बांग्लादेशी बजट का 39% हिस्सा कर्ज चुकाने में खर्च
इस बीच लोन का भुगतान बांग्लादेश का दूसरा सबसे बड़ा बजट खर्च बन गया है. बांग्लादेश का डेट-टू-जीडीपी रेश्यो बढ़कर 39 प्रतिशत से अधिक हो गया है, जो कि वित्त वर्ष 2017-18 में 34 प्रतिशत के करीब था.
रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में आयोजित एक सेमिनार में प्रमुख अर्थशास्त्री मुस्तफिजुर रहमान ने कहा कि बांग्लादेश के राजस्व बजट में वेतन और पेंशन के बाद कृषि और शिक्षा पर दूसरा सबसे ज्यादा खर्च हुआ करता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है.
राष्ट्रीय बजट इतिहास में पहले से कम
वित्त सचिव एम. खैरूज्जमान मोजुमदार ने भी कहा है कि बांग्लादेश का चालू वर्ष का राष्ट्रीय बजट देश के इतिहास में पहली बार पिछले साल की तुलना में कम है. उनका कहना था कि यह कुछ ऐसा है जैसे पहल से ही किसी पतले व्यक्ति को और भी अधिक वजन कम करने के लिए कहा गया हो.
यूनुस ही नहीं, जमात से भी संपर्क बढ़ा रहा चीन
अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश ने चीन के साथ अपने संबंधों को और मजबूत किया है. रिपोर्ट में कहा गया कि बीजिंग ने हालांकि अपना सारा दांव एक ही जगह नहीं लगाया है. यह जानते हुए कि अंतरिम सरकार एक अस्थायी व्यवस्था है, चीनी बांग्लादेश में अपनी पकड़ मजबूत कर रहे अन्य शक्ति केंद्रों के साथ लगातार संपर्क में है, जिनमें जमात-ए-इस्लामी भी शामिल है.
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