- बांग्लादेश की उकसावे वाली बयानबाजी पर पेमा खांडू बोले, नॉर्थ ईस्ट को काटने का सपना कभी पूरा नहीं होगा.
- हिमंत भी दे चुके चेतावनी. BSF ने चिकन नेक के 75% हिस्से में नई हाई-टेक फेंसिंग और कैमरों से सुरक्षा कड़ी की.
- दुनिया में चिकन नेक जैसे कई स्ट्रैटेजिक पॉइंट्स, बांग्लादेश में भी ऐसे दो संवेदनशील इलाके.
भारत के नक्शे पर कुछ ऐसी जगहें हैं जिनका जिक्र होते ही सुरक्षा एजेंसियों, राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में हलचल तेज हो जाती है. सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे आमतौर पर ‘चिकन नेक' कहा जाता है, उन्हीं जगहों में सबसे अहम मानी जाती है. बीते कुछ सालों से यह इलाका बार-बार खबरों में आता रहा है जिसकी वजह एक नहीं, बल्कि कई हैं. अब एक बार फिर यह चर्चा में है. क्योंकि बांग्लादेश से लगातार उकसावे वाली बयानबाजी के बीच अब नॉर्थ ईस्ट के मुख्यमंत्रियों ने खुला और सख्त राजनीतिक संदेश दिया है. साथ ही बांग्लादेश में आंतरिक अशांति, बांग्लादेश सीमा पर बढ़ा हाई अलर्ट और बीएसएफ की हाई-टेक सुरक्षा व्यवस्था ने मिलकर चिकन नेक को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है.
ताजा कड़ी में अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू का बयान सामने आया. उन्होंने बांग्लादेश के कुछ नेताओं की उस भाषा पर कड़ा ऐतराज जताया, जिसमें भारत की ‘चिकन नेक' काटने जैसी बातें कही गई थीं. पेमा खांडू ने साफ कहा कि नॉर्थ ईस्ट को भारत से अलग करने की कोई भी कोशिश सिर्फ सपना ही रहेगी, कभी हकीकत नहीं बनेगी. उन्होंने यह भी दोहराया कि पूर्वोत्तर क्षेत्र भारत का अभिन्न हिस्सा है और ऐसी बयानबाजी को जरूरत से ज्यादा महत्व देना भी गलत है. उनका यह बयान ऐसे वक्त आया है जब क्षेत्र पहले से ही संवेदनशील दौर से गुजर रहा है.

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू
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असल में यह कॉरिडोर पश्चिम बंगाल के उत्तर में स्थित वह पतला सा भूभाग है, जो भारत के मुख्य हिस्से को उसके पूर्वोत्तर के आठ राज्यों से जोड़ता है और भारत के लिए रणनीतिक, सैन्य, आर्थिक और भावनात्मक रूप से बेहद अहम है. कई जगह पर इसकी चौड़ाई महज 20 से 25 किलोमीटर के करीब है. जहां यह भारत के पूर्वोत्तर भाग को देश के अन्य हिस्से से जोड़ता है, वहीं इसकी सीमाएं नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से घिरी हैं. इसकी यही भौगोलिक स्थिति इसे वर्तमान परिस्थिति में बेहद नाजुक बना रही हैं. अगर ऊंचाई से इस पूरे इलाके को देखें तो यह चिकन की गर्दन की तरह दिखता है और इसी नाम से इसका जिक्र किया जाता है. इस गर्दन पर दबाव पड़ने की स्थिति में पूरा पूर्वोत्तर भारत इससे प्रभावित हो सकता है.

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नई डिजाइन की नई सीमा बाड़
इस बार चिकन नेक की चर्चा सिर्फ भारत के भीतर नहीं, बल्कि सीमा पार हालात से भी जुड़ी है. बांग्लादेश में जारी राजनीतिक और नागरिक अशांति के चलते भारत ने अपनी पूर्वी सीमा पर सतर्कता बढ़ा दी है. सुरक्षा एजेंसियों का आकलन है कि जब पड़ोसी देश में हालात बिगड़ते हैं, तो उसका असर सीमा पार भी दिखता है. अवैध घुसपैठ, तस्करी, मानव तस्करी और संगठित अपराध का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में सिलीगुड़ी कॉरिडोर स्वाभाविक रूप से सबसे ज्यादा संवेदनशील बन सकता है. इन्हीं आशंकाओं के बीच सीमा सुरक्षा बल यानी BSF ने यहां सुरक्षा का स्वरूप पूरी तरह बदल दिया है. आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, चिकन नेक क्षेत्र के करीब 75 प्रतिशत हिस्से में नई डिजाइन की सीमा बाड़ लग चुकी है. यह बाड़ लगभग 12 फीट ऊंची है और इसे इस तरह से तैयार किया गया है कि इसे काटना आसान नहीं है. पुराने सिस्टम के मुकाबले इसे काटने में काफी समय लगता है और उस पर चढ़ना भी बेहद मुश्किल है. BSF अधिकारियों का मानना है कि इससे घुसपैठ और तस्करी पर बड़ा असर पड़ेगा.

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नई फेंसिंग के साथ-साथ पूरे इलाके को टेक्नोलॉजी आधारित स्मार्ट बॉर्डर में बदला जा रहा है. सीमा पर पैन-टिल्ट-जूम कैमरे लगाए गए हैं, जो चौबीसों घंटे निगरानी करते हैं और लाइव फीड देते हैं. इन कैमरों की मदद से किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सकती है. यानी अब सीमा की केवल निगरानी नहीं की जा रही बल्कि वहां होने वाली हर गतिविधि पर रियल टाइम में कार्रवाई भी की जा रही है.
BSF की रणनीति में एक और अहम बदलाव देखने को मिला है. अब फोकस सिर्फ सीमा रेखा पर खड़े होकर रोकने का नहीं है. नई योजना के तहत उन इलाकों को निशाना बनाया जा रहा है, जहां से तस्करी के लिए मवेशी या अन्य सामान इकट्ठा कर सीमा के पास लाया जाता है. इसके लिए BSF की टीमें कई बार सीमा से कई किलोमीटर अंदर भारतीय इलाकों में जाकर छापेमारी कर रही हैं. मकसद साफ है, तस्करी की जड़ पर वार करना, न कि सिर्फ आखिरी कड़ी पर.

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इसके साथ-साथ BSF ने एक समुदाय-केंद्रित पहल भी शुरू की है. इसमें उन गांवों पर ध्यान दिया जा रहा है, जो सीमा अपराधों के लिहाज से संवेदनशील माने जाते हैं. संदिग्ध तस्करों और दलालों के घर जाकर उनके परिवारों से बातचीत की जाती है और उन्हें यह समझाया जाता है कि ऐसे कामों के कानूनी और सामाजिक नतीजे क्या हो सकते हैं. अधिकारियों का कहना है कि भरोसा और संवाद पर आधारित इस रणनीति से पिछले एक साल में पशुओं और मानव तस्करी के मामलों में गिरावट आई है.
जहां तक अवैध घुसपैठ का सवाल है, BSF ने हाल के दिनों में संतुलित नीति अपनाई है. कई बांग्लादेशी नागरिक, जो अनजाने में या हालात की वजह से भारत में दाखिल हो गए थे, उन्हें पूरी जांच, फिंगरप्रिंट और पृष्ठभूमि सत्यापन के बाद बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड को सौंपा गया. इससे एक तरफ सुरक्षा सुनिश्चित हुई, तो दूसरी तरफ मानवीय जिम्मेदारी भी निभाई गई.
जनवरी 2025 से अब तक के आंकड़े इस सख्ती की तस्वीर साफ करते हैं. इस दौरान करीब 8.5 करोड़ रुपये की जब्ती हुई है. इसमें मवेशी, सोना, चांदी, वन्यजीव, हथियार और गोला-बारूद शामिल हैं. इस अवधि में 440 बांग्लादेशी नागरिक, 152 भारतीय नागरिक और अन्य संदिग्धों को पकड़ा गया. इनमें से 187 बांग्लादेशी नागरिकों को उनके देश को सौंपा गया.

चिकन नेक की तरह अहम स्ट्रैटेजिक कॉरिडोर
अब सवाल यह भी उठता है कि क्या सिर्फ भारत ही ‘चिकन नेक' जैसी भौगोलिक चुनौती से जूझ रहा है. विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसा नहीं है. दुनिया में ऐसे कई संकरे रणनीतिक गलियारे हैं, जिन्हें अनौपचारिक रूप से ‘चिकन नेक' या चोक प्वाइंट कहा जाता है. आकलन के मुताबिक, दुनिया में करीब 8 से 10 ऐसे प्रमुख रणनीतिक कॉरिडोर माने जाते हैं.
दुनिया में 9 प्रमुख 'चिकन नेक' जैसे स्ट्रैटिजिक कॉरिडोर माने जाते हैं, उन्हें सुरक्षा और भू-राजनीति के जानकार आमतौर पर इन नामों से पहचानते हैं-
सिलीगुड़ी कॉरिडोर, भारत – भारत को उसके पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाला संकरा गलियारा.
सुवाल्की गैप, यूरोप – पोलैंड और लिथुआनिया के बीच का इलाका, जो नाटो देशों को बाल्टिक राज्यों से जोड़ता है.
वाखान कॉरिडोर, अफगानिस्तान – अफगानिस्तान का संकरा हिस्सा, जो चीन को मध्य एशिया और दक्षिण एशिया से अलग करता है.
क्रा इस्थमस, थाईलैंड – थाईलैंड का बेहद संकरा भूभाग, जो मलक्का क्षेत्र के पास रणनीतिक महत्व रखता है.
पनामा का इस्तमस – पनामा नहर क्षेत्र में इस्तमस उत्तर और दक्षिण अमेरिका को जोड़ता है, और प्रशांत- अटलांटिक महासागरों को अलग करता है.
गोलन हाइट्स एक्सेस कॉरिडोर, पश्चिम एशिया – दक्षिण-पश्चिम सीरिया में जॉर्डन नदी घाटी के ऊपरी भाग पर स्थित यह इलाका रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण है. इस पर 1967 से इजराइल का कब्जा है.
फरगना वैली एक्सेस कॉरिडोर, मध्य एशिया - उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान के बीच संपर्क मार्ग.
चुम्बी वैली कॉरिडोर, तिब्बत-भारत-भूटान ट्राइजंक्शन - डोकलाम के पास स्थित रणनीतिक गलियारा, जो भारत की सुरक्षा से जुड़ा है.
कैप्रिवि स्ट्रिप (जाम्बेजी स्ट्रिप), नामीबिया - अफ्रीका में नामीबिया का संकरा गलियारा जो कई देशों को जोड़ता है.
ये वो इलाके हैं जिन्हें अलग-अलग क्षेत्रों में 'चिकन नेक', 'चोक प्वाइंट' या 'स्ट्रैटेजिक नैरो कॉरिडोर' के रूप में देखा जाता है और इन पर वैश्विक शक्तियों की खास नजर रहती है.
To those who habitually threaten India on the “Chicken Neck Corridor”, should note these facts as well:
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) May 25, 2025
1️⃣ Bangladesh has two of its own “chicken necks”. Both are far more vulnerable
2️⃣ First is the 80 Km North Bangladesh Corridor- from Dakhin Dinajpur to South West Garo… pic.twitter.com/DzV3lUAOhR
बांग्लादेश में चिकन नेक जैसे दो कॉरिडोर
दिलचस्प बात यह है कि बांग्लादेश के पास भी दो ऐसे संवेदनशील इलाके माने जाते हैं. पहला क्षेत्र चिटगांव पोर्ट और उससे जुड़ा संपर्क क्षेत्र है, जो बांग्लादेश की समुद्री पहुंच और अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है. दूसरा इलाका रंगपुर और सिलीहट के बीच का संकरा क्षेत्र है, जो देश की आंतरिक कनेक्टिविटी और सुरक्षा के लिहाज से अहम है. इसी संदर्भ में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पहले भी कह चुके हैं कि दक्षिण एशिया में सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि बांग्लादेश भी ऐसे रणनीतिक दबाव बिंदुओं के साथ जी रहा है.
आज के हालात में पेमा खांडू का बयान, हिमंत की पुरानी चेतावनी और BSF की नई रणनीति एक ही संदेश देती है. नॉर्थ ईस्ट और सिलीगुड़ी कॉरिडोर को लेकर भारत अब कोई जोखिम नहीं लेना चाहता. बांग्लादेश की बयानबाजी चाहे जितनी हो, जमीन पर भारत अपनी सुरक्षा व्यवस्था को लगातार मजबूत कर रहा है. चिकन नेक अब एक कमजोर कड़ी नहीं, बल्कि हाई-टेक सुरक्षा और राजनीतिक दृढ़ता का प्रतीक बनता जा रहा है.
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