आयरलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री लियो वराडकर ने जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) में अपनी किताब 'स्पीकिंग माई माइंड' पर चर्चा के दौरान वैश्विक राजनीति, भारत के भविष्य और डोनाल्ड ट्रंप के कार्य करने के तरीके पर बेबाकी से अपनी राय रखी. वराडकर ने कहा कि भारत जैसे देशों में राजनेता सुरक्षा घेरे में रहते हैं, वहीं ट्रंप एक राजा जैसे हैं. अच्छी बात रही कि उनके सामने घुटने टेक कर नमस्कार नहीं करना पड़ता. लेकिन उनके पिछले टर्म और इस टर्म में काफी अंतर है.
जब उनसे उनके नेता की तरह अनुभव पर पूछा तो उन्होंने कहा कि, "कई बार ऐसा होता है. आप पर हमेशा लोगों की नजर रहती है. निजता की भी समस्या रहती है. भारत जैसे देश में जब राजनेता सिक्योरिटी से घिरे रहते हैं. इसलिए लोगों का उन तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है. ऐसा आयरलैंड में नहीं है."

ब्रिटिश प्रधानमंत्रियों के साथ अनुभव
लियो वराडकर ने आगे कहा, "मैने तीन ब्रिटिश प्रधानमंत्रियों के साथ उस दौर में काम किया है, जब ब्रिटेन के लोगों ने बहुत तेजी से प्रधानमंत्री बदले, जहां ऋषि सुनक ऐसे व्यक्ति हैं जो आपसे बिजनेस करना चाहते हैं, लेकिन पहल नहीं करेंगे. वहीं, बोरिस जॉनसन के साथ किसी समझौते पर मोलभाव करना बेहद कठिन है."
कोविड का दौर
उन्होंने बताया कि, "कोविड के समय में आयरलैंड में मौतों का आंकड़ा बहुत कम रहा. हमने सही समय पर नीतियां बनाई और लागू कीं. वैक्सीनेशन में भी हमनें बेहतर काम किया. जब मुझे डॉक्टरों ने कोविड़ से पहले रिपोर्ट दिखाई तो उस रिपोर्ट ने मुझे परेशान कर दिया. क्योंकि कई बार एक डॉक्टर के सामने बहुत मुश्किल निर्णय लेने का समय आता है. आप आईसीयू में उस व्यक्ति को रखते हैं, जो सबसे ज्यादा बीमार हो. लेकिन उस व्यक्ति को सही होने में 20 दिन लग सकते हैं. इन सब बातों ने मुझे डराया."
'ट्रंप के पिछले टर्म और इस टर्म में काफी अंतर'
अमेरिका के संबंधों पर उन्होंने कहा कि, "ट्रंप से मिलते समय ऐसा लगता है जैसे किसी राजा से मिल रहे हों. अच्छी बात रही कि उनके सामने घुटने टेक कर नमस्कार नहीं करना पड़ता. लेकिन उनके पिछले टर्म और इस टर्म में काफी अंतर है. पहले टर्म में वे चेक एंड बैलेंस करते थे. अब वे ऐसा नहीं कर रहे हैं. वैसे भी वे नोबल पीस प्राइज चाहते हैं. तो मुझे नहीं लगता वे किसी को उनसे चुराने देंगे. मुझे लगता है कि किसी का भी घर केवल रियल एस्टेट बिजनेस के लिए नहीं ले लेना चाहिए. इसलिए ग्रीनलैंड की स्थिति पर मुझे चिंता है. अगर वे ग्रीनलैंड पर अधिकार करने की कोशिश करते हैं तो यह चिंताजनक है. जैसे वे अपने भाषणों में कहते हैं कि यह टर्म टेरिटोरियल एक्सपेंशन के लिए है. वे अपनी तुलना जेम्स के पोक से करते हैं. उन्हें लगता है वो अगले राष्ट्रपति होंगे, जो अमेरिका की सीमाओं को बढ़ाएंगे. तो मुझे लगता है यह हम सभी के लिए मुश्किल होने वाला है."
वैश्विक शांति और संयुक्त राष्ट्र
उन्होंने फिलिस्तीन के मुद्दे पर अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा कि आयरलैंड का इतिहास भी गुलामी का रहा है, इसलिए वे उनकी भावनाओं को समझते हैं. उन्होंने जोर दिया कि अमेरिका इजरायल के बहुत करीब है, इसलिए वह इस दर्द को नहीं समझ पाता. संयुक्त राष्ट्र (UN) में सुधार की सख्त जरूरत है, लेकिन ट्रंप, रूस और चीन जैसे देश इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं.
'भारत दुनिया को करेगा लीड'
भारत के भविष्य पर बात करते हुए उन्होंने कहा, "भारत आना अच्छा है. पिछले 20 सालों में भारत ने बहुत तरक्की की है. मुझे लगता है कि मैं हर साल यहां आऊंगा. मैं देखता हूं कि भारत एक ऐसा देश बनेगा जो दुनिया को लीड करने वाले देशों में एक होगा. यहां कानून का शासन, लोकतंत्र और मानवाधिकार है, जो यूरोपीय देशों के साथ हमें मिलाते हैं."
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं