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This Article is From Apr 06, 2022

रूस-यूक्रेन युद्ध का भारत पर असर : पेट्रोल-डीजल के बढ़ रहे दाम लेकिन गेहूं के निर्यात को लेकर मिले नए अवसर

यूक्रेन-रूस युद्ध के वजह से एक तरफ जहां तेल और गैस के मोर्चे पर भारत का आयात बिल बढ़ रहा है, लेकिन अंतराष्ट्रीय बाजार में भारतीय गेहूं की मांग बढ़ रही है.

देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि का दौर जारी है
नई दिल्‍ली:

पेट्रोल और डीज़ल बुधवार को पूरे देश में और महंगे हो गए. तेल कंपनियों ने दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 80 पैसे बढ़ाकर 105.41 रुपये/लीटर कर दिया जबकि डीज़ल भी 80 पैसे महंगा होकर ₹ 96.67/लीटर का हो गया. मुंबई में पेट्रोल की कीमत बढ़कर ₹ 120.51/लीटर और डीज़ल ₹ 104.77/लीटर हो गया है. हालांकि यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध की वजह से भारतीय गेहूं की मांग अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बढ़ रही है.मंगलवार को पेट्रोल और डीजल और महंगे हो गए. तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीज़ल की कीमत पिछले 16 दिन में 14 वी बार बढ़ा दी. पिछले 16 दिनों में दिल्ली में पेट्रोल 10/लीटर महंगा होकर 105.41 रुपये/लीटर का हो गया है जबकि डीज़ल भी 10/लीटर महंगा होकर 96.67/लीटर का हो गया है. मेट्रो शहरों में मुंबई में पेट्रोल सबसे महंगा  ₹ 120.51/लीटर और डीज़ल ₹ 104.77 रुपये/लीटर की ऊंची कीमत पर बिक रहा है.

इसको लेकर विपक्षी सांसदों ने बुधवार को लोकसभा में नाराज़गी जताई और चर्चा की मांग स्वीकार न होने पर सदन से वॉकआउट किया. उच्‍च सदन राज्य सभा में भी चेयरमैन ने विपक्षी सांसदों की पेट्रोल-डीज़ल पर चर्चा की मांग स्वीकार नहीं की. कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने NDTV से कहा, "प्रश्नकाल में आज प्रधानमंत्री का दिन था. हम सरकार से, प्रधानमंत्री से पेट्रोल डीजल की बढ़ी हुई कीमतों पर स्पष्टीकरण चाहते थे लेकिन चर्चा की विपक्ष की मांग नहीं मानी गई. इसके विरोध में 12 विपक्षी दलों ने लोकसभा से वाकआउट किया है." समाजवादी पार्टी के राज्‍यसभा सांसद राम गोपाल यादव ने कहा, "सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप करना होगा. पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए सरकार ही ज़िम्मेदार है."

गौरतलब है कि यूक्रेन-रूस युद्ध के वजह से एक तरफ जहां  तेल और गैस के मोर्चे पर भारत का आयात बिल बढ़ रहा है, लेकिन अंतराष्ट्रीय बाजार में भारतीय गेहूं की मांग बढ़ रही है. वर्ष 2021 में यूक्रेन और रूस का शेयर ग्लोबल व्हीट एक्सपोर्ट में 29% था. युद्ध की वजह से यूक्रेन और रूस से गेहूं की सप्लाई बाधित हुई है. 2021-22 में भारतीय गेहूं सहित अन्य अनाज का निर्यात 54.50 फ़ीसदी तक बढ़ा है.यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं की उपलब्धता पर बुरा असर पड़ा है क्योंकि इन दोनों देशों का वैश्विक गेहूं निर्याता (Global Wheat Exports) में शेयर 29% है.इस नई परिस्थिति को आप कैसे देखते हैं? इस सवाल के जवाब में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, ' जहां तक गेहूं का मामला है.भारत में पर्याप्त उपलब्धता है. वर्तमान परिस्थिति में अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं की जो आवश्यकता है, उसे पूरा करने के लिए भारत पूरी तरह से तैयार है और तत्पर भी है.हमारी कोशिश है कि किसानों को अच्छा बाजार मिले. उनका उत्पादन और फसल की गुणवत्ता दोनों वैश्विक मानव मानकों पर खरा उतरे. पिछले साल 31 लाख 50 हजार करोड़ का कृषि निर्यात हुआ है.गेहूं का निर्यात 2021- 2022 में 54.50 फ़ीसदी बढ़ा है. ज़ाहिर है, रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध की वजह से इंटरनेशनल कमोडिटी मार्केट में समीकरण बदल रहे हैं. इसमें भारत के सामने चुनौतियां भी बढ़ रही हैं लेकिन एक्सपोर्ट के नए अवसर भी मिले हैं. 

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