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120 दिन से कोई वीक ऑफ नहीं, बिना गलती सीनियर करते थे टॉर्चर, महिला ने दे दी जान

कथित सुसाइड नोट में नागेश्वरी ने सीनियर अधिकारियों पर आरोप लगाया कि वे उसे उन मामलों के लिए निशाना बनाते थे और परेशान करते थे जिनमें उसकी कोई गलती नहीं थी. उसने यह भी आरोप लगाया कि उसे चार महीने से उसे कोई छुट्टी नहीं मिली.

120 दिन से कोई वीक ऑफ नहीं, बिना गलती सीनियर करते थे टॉर्चर, महिला ने दे दी जान
महिला की फाइल फोटो.
मैसूर:

सप्ताह में 5 या 6 दिन काम करने के बाद इंसान बेसब्री से वीक ऑफ का इंतजार कर रहा होता है. क्योंकि बीते 5-6 की थकान उस दिन दूर कर सके. लेकिन जरा सोचिए बिना वीक ऑफ लिए कोई कितने दिनों तक काम कर सकता है. दो-तीन सप्ताह लगातार काम करने के बाद रेस्ट की जरूरत हो होती है. लेकिन एक महिला जिसे 120 दिन तक लगातार काम करना पड़ा हो, वो भी तब जब ऑफिस की सीनियर बात-बात पर उसे डांटती रही हो. बिना गलती के भी उसे सबके सामने जलील किया करती हो, तो क्या स्थिति होगी. वर्कप्लेस पर होने वाली हैरसमेंट की यह चर्चा इसलिए की जा रही है कि ऐसी ही एक घटना से तंग आकर एक महिला ने जान दे दी. 

कर्नाटक के मैसूर की घटना

मामला कर्नाटक के मैसूर का है. जहां नागेश्वरी नाम की एक महिला ने जहर खाकर जान दे दी. उसने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा, जिसमें ऑफिस में होने वाली प्रताड़ना की कहानी दर्ज है. नागेश्वरी हिनाकल के एक मार्ट में प्रोडक्ट प्रमोटर के तौर पर काम करती थी. उसने PPMS एजेंसी के ज़रिए यह नौकरी हासिल की थी. 

उसके परिवार के मुताबिक, नागेश्वरी पिछले 15 दिनों से मानसिक तनाव में थी और उसने उन्हें बताया था कि उसे काम की जगह पर परेशान किया जा रहा है.

चार महीने से वीक ऑफ नहीं, कोई इमरजेंसी छुट्टी भी नहीं

अपने कथित सुसाइड नोट में नागेश्वरी ने अपने सीनियर अधिकारियों पर आरोप लगाया कि वे उसे उन मामलों के लिए निशाना बनाते थे और परेशान करते थे जिनमें उसकी कोई गलती नहीं थी. उसने यह भी आरोप लगाया कि उसे चार महीने से हफ़्ते की छुट्टी नहीं मिली थी और इमरजेंसी छुट्टी भी नहीं दी गई थी.

डॉली नामक सुपरवाइजर करती थी तंग

उसने आगे आरोप लगाया कि अपने साथ हो रहे बर्ताव पर सवाल उठाने के बाद उसे नौकरी से निकाल दिया गया. खबरों के मुताबिक, नागेश्वरी ने डॉली नाम की एक सुपरवाइज़र का नाम लिया और आरोप लगाया कि उत्पीड़न की वजह से ही उसे यह यह कदम उठाना पड़ा. नागेश्वरी की मां, रत्नाम्मा ने अपनी बेटी के लिए न्याय और ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की है.

नागेश्वरी की मां ने कहा- उसे काम की जगह पर परेशान किया जा रहा था

रत्नाम्मा ने कहा, "मेरी बेटी को मानसिक रूप से परेशान किया जाता था. वे उसे छोटी-छोटी बातों पर भी तंग करते थे. पिछले 15 दिनों से मेरी बेटी मानसिक रूप से परेशान हो गई थी. उसने हमें बताया था कि उसे काम की जगह पर परेशान किया जा रहा है. 

उन्होंने आगे कहा, "अपनी जान देने से पहले उसने डॉली नाम की एक सुपरवाइज़र का नाम लिखा था. उत्पीड़न और नौकरी से निकाले जाने के बाद मेरी बेटी ने आत्महत्या कर ली. मेरी बेटी को न्याय दिलाएं और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करें. यह घटना मैसूर के विजयनगर पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आती है. पुलिस मौत और वर्कप्लेस पर उत्पीड़न के आरोपों की जांच कर रही है.

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(अगर आपको सहारे की ज़रूरत है या आप किसी ऐसे शख्‍स को जानते हैं, जिसे मदद की दरकार है, तो कृपया अपने नज़दीकी मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञ के पास जाएं)

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