- मौसम विभाग के मॉनसून ट्रैकर इंडिया मैप के अनुसार 20 जून तक दिल्ली-यूपी में मॉनसून पहुंचने की संभावना है.
- अगले 3-4 दिनों के दौरान मराठवाड़ा और विदर्भ के कुछ इलाकों में लू (हीट वेव) चलने की बहुत संभावना है.
- 14 जून को मॉनसून बंगाल और बिहार के कुछ और हिस्सों के साथ-साथ ओडिशा और झारखंड के कुछ इलाकों में भी आगे बढ़ा.
Weather Update: सुबह 6 बजे ऑफिस पहुंचने में बाइक चलाते हुए यदि आपको गर्मी लगे तो समझ सकते हैं कि मौसम का क्या हाल है? आज सुबह-सुबह नोएडा स्थित दफ्तर आने में लोगों को कुछ ऐसा ही महसूस हुआ. साफ आसमान, बादल का अता-पता नहीं, चटख धूप निकलने की धमक... बाइक से निकलते ही कुछ ही देर बाद गर्मी लगने लगी थी. करीब 15 किमी बाइक चलाने के बाद जब लोग दफ्तर पहुंचे तो हेलमेट निकालते ही चेहरे पर पसीना था. यह हालात आज सोमवार 15 जून की सुबह दिल्ली-NCR में नजर आई. मौसम विभाग के अनुसार 4 जून को केरल तट से टकराने के बाद मॉनसून तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गोवा, पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा और झारखण्ड सहित कई राज्यों में पहुंच चुका है.
आज शाम दिल्ली में तेज हवा के साथ हल्की बारिश का अनुमान
मौसम विभाग ने राजधानी दिल्ली में सोमवार दोपहर और शाम को तेज हवाओं और आंधी के साथ हल्की बारिश का अनुमान लगाया है. अधिकतम और न्यूनतम तापमान क्रमशः 39 और 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है. रविवार को दिल्ली के मुख्य मौसम केंद्रों पर अधिकतम तापमान 38.4 से 39.1 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया.
मॉनसून इंडिया मैप से समझिए कहां कब होगी बारिश
लेकिन यूपी, दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब में बारिश की राहत की बूंदों का अभी तक इंतजार है. मौसम विभाग के मॉनसून ट्रैकर इंडिया मैप के अनुसार 20 जून तक दिल्ली-यूपी में मॉनसून पहुंचने की संभावना है. उसके बाद यह राजस्थान, गुजरात की ओर बढ़ेगा. लेकिन फिलहाल मौसम विभाग ने जो चेतावनी जारी की है, वह चिंता बढ़ा रही है.

मौसम विभाग ने अगले 3-4 दिन हीट वेव चलने की जारी की चेतावनी
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले 3-4 दिनों के दौरान मराठवाड़ा और विदर्भ के कुछ इलाकों में लू (हीट वेव) चलने की बहुत संभावना है. मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि 14 से 17 जून के दौरान मराठवाड़ा और 14 से 16 जून के दौरान विदर्भ के कुछ इलाकों में लू चलने की बहुत संभावना है.
अधिकतम/दिन के तापमान का पूर्वानुमान:
18 जून तक उत्तर-पश्चिम भारत में अधिकतम तापमान में धीरे-धीरे 4-6°C की बढ़ोतरी होने की संभावना है.
16 जून तक मध्य भारत में अधिकतम तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी होने की संभावना है.
18 जून तक महाराष्ट्र में अधिकतम तापमान में कोई खास बदलाव नहीं होगा.
उसके बाद 19-20 जून के दौरान तापमान में धीरे-धीरे 2-3°C की गिरावट आएगी.

ओडिशा, झारखंड के कुछ इलाकों से आगे बढ़ा मॉनसून
इससे पहले रविवार मौसम विभाग ने बताया कि 14 जून 2026 को दक्षिण-पश्चिम मॉनसून पश्चिम बंगाल और बिहार के कुछ और हिस्सों के साथ-साथ ओडिशा और झारखंड के कुछ इलाकों में भी आगे बढ़ गया है. भारत मौसम विभाग के ताज़ा पूर्वानुमान के मुताबिक, "अगले 4-5 दिनों में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के महाराष्ट्र के और हिस्सों, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल के बाकी हिस्सों, ओडिशा, झारखंड और बिहार के कुछ और हिस्सों और दक्षिण छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए हालात अनुकूल हैं".
तीन दिन की देरी से इस बार पहुंचा मॉनसून
दरअसल मॉनसून इस बार देर से केरला पहुंचा है. मानसून के केरल तट से टकराने की तिहति 01 जून है, लेकिन इस साल मानसून तीन दिन की देरी से केरला पहुंचा है. 4 जून, 2026 से अबतक मॉनसून उत्तर-पूर्व भारत के सभी राज्यों के साथ-साथ केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गोवा, पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा और झारखण्ड पहुँच चुका है.
इन राज्यों में भारी बारिश की संभावना
भारत मौसम विभाग के मुताबिक, "अगले 6-7 दिनों के दौरान उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और असम और मेघालय में कुछ जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है".
दैनिक मौसम परिचर्चा (14.06.2026)
— India Meteorological Department (@Indiametdept) June 14, 2026
उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और असम और मेघालय में अगले 6-7 दिनों के दौरान कुछ जगहों पर भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है।
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अलनीनो का असर, सूखे के आसार
दरअसल इस बार मॉनसून पर सुपर अल नीनो का खतरा मंडरा रहा है. मौसम विभाग इस साल सामान्य से कम बारिश की चेतावनी पहले ही दे चुका है. अल नीलो की वजह से प्रचंड आग बरसेगी. बारिश कम होगी तो फसलों के सूखने का खतरा बढ़ जाएगा. मौसम विभाग ने 12 जून को आधिकारिक तौर पर प्रशांत महासागर के ऊपर अल नीनो के हालात पैदा होने की बात कही. जुलाई से सितंबर के बीच ये चरम पर होगा. ये वह समय तक जिसमें आमतौर पर दक्षिण-पश्चिम मॉनसून भारत में साल भर की सबसे ज्यादा बारिश लेकर आता है. लेकिन अल नीनो के प्रभाव से बारिश में कमी देखने को मिलेगी. जिसका भारत पर व्यापक असर पड़ सकता है.
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