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This Article is From Apr 09, 2026

‘अगर पुलिस पूछे तो कहना हम दोस्त हैं’, पत्नी की हत्या के बाद प्रेमिका को डॉक्टर का मैसेज, 6 महीने बाद अरेस्ट

प्यार में अंधे डॉक्टर महेंद्र रेड्डी ने मेडिकल ज्ञान का दुरुपयोग कर पत्नी कृतिका की बेहोशी की दवा के ओवरडोज से हत्या की. डिजिटल सबूतों और प्रेमिका को भेजे संदेशों से साजिश उजागर हुई. सेशन कोर्ट ने कड़ी सामग्री के आधार पर जमानत खारिज कर दी.

‘अगर पुलिस पूछे तो कहना हम दोस्त हैं’, पत्नी की हत्या के बाद प्रेमिका को डॉक्टर का मैसेज, 6 महीने बाद अरेस्ट
बेंगलुरु:

प्यार में अंधेपन और पेशेवर ज्ञान के खतरनाक इस्तेमाल की एक सनसनीखेज कहानी सामने आई है. पेशे से डॉक्टर एक युवक ने अपनी ही डॉक्टर पत्नी की हत्या को स्वाभाविक मौत दिखाने के लिए बेहोशी की दवा का ओवरडोज दिया, लेकिन डिजिटल सबूतों की एक छोटी सी चूक ने पूरे फुलप्रूफ प्लान को बेनकाब कर दिया. इस हाई‑प्रोफाइल मामले में आरोपी डॉक्टर महेंद्र रेड्डी की जमानत अर्जी सेशन कोर्ट ने ठोस सबूतों के आधार पर खारिज कर दी है.

घटना 21 अप्रैल की है, जब 29 वर्षीय स्किन स्पेशलिस्ट डॉक्टर कृतिका रेड्डी अपने घर में अचानक बीमार पड़ीं. पति महेंद्र उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचा, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. शुरुआती तौर पर मौत को प्राकृतिक बताया गया, लेकिन बाद में कृतिका के परिजनों और पुलिस को पति की भूमिका पर शक हुआ.

बेहोशी की दवा का ओवरडोज

जांच में सामने आया कि महेंद्र रेड्डी ने ऑपरेशन थिएटर में इस्तेमाल होने वाली ताकतवर एनेस्थीसिया दवा प्रोपोफोल का ओवरडोज देकर पत्नी की कथित तौर पर हत्या की. आरोपी ने अपने मेडिकल नॉलेज का इस्तेमाल कर मौत को स्वाभाविक दिखाने की कोशिश की.

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प्रेम संबंध और डिजिटल सबूत

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी डॉक्टर का एक नर्स हरिष्ठा के साथ प्रेम प्रसंग था. दोनों के बीच हुई बातचीत इस केस का सबसे अहम सबूत बन गई. जांचकर्ताओं को ऐसे मैसेज मिले, जिनमें महेंद्र हत्या के बाद प्रेमिका को सबूत मिटाने और पूछताछ से बचने के तरीके समझा रहा था.

एक मैसेज में उसने लिखा, 'अगर पुलिस हमारी रिलेशनशिप के बारे में पूछे तो कहना हम दोस्त हैं.' एक अन्य संदेश में आरोपी ने कथित तौर पर स्वीकार किया, 'मेरे पास सबूत नहीं हैं, लेकिन मैंने कृतिका को मारा है. मैं जेल जाऊंगा.'

UPI ऐप से भेजे मैसेज

पुलिस ने खुलासा किया कि आरोपी ने व्हाट्सऐप जैसे सामान्य ऐप्स से बातचीत करने से बचते हुए UPI पेमेंट ऐप्स के जरिए मैसेज किए, ताकि उस पर शक न जाए. लेकिन यही चाल बाद में उसके खिलाफ सबूत बन गई.

10 लाख से ज्यादा डिजिटल फाइलें खंगाली गईं

फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) ने आरोपी के मोबाइल और अन्य डिवाइसेज़ से 10.34 लाख से ज्यादा डिजिटल फाइलें बरामद कीं. इनमें 485 चैट रिकॉर्ड, डिलीट किए गए संदेश, निजी तस्वीरें, लेनदेन का विवरण और मूवमेंट डेटा शामिल है. यही डिजिटल सबूत चार्जशीट की रीढ़ बने.

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कोर्ट ने क्यों खारिज की जमानत

चार्जशीट दाखिल होने के बाद सेशन कोर्ट ने कहा कि आरोपी के खिलाफ सबूत बेहद ठोस हैं और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए उसे जमानत नहीं दी जा सकती. कोर्ट ने यह भी माना कि आरोपी ने अपराध के बाद सबूत छिपाने और गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश की.

परिवार का आपराधिक इतिहास

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी के परिवार का आपराधिक इतिहास रहा है. उसके भाई पर पहले से धोखाधड़ी और धमकी देने के आरोप दर्ज हैं. कृतिका के परिवार का आरोप है कि शादी के वक्त ये बातें छिपाई गई थीं.

जांच जारी

पुलिस का कहना है कि यह एक सोची‑समझी हत्या थी, जिसमें मेडिकल ज्ञान और तकनीक का दुरुपयोग किया गया. फिलहाल आरोपी न्यायिक हिरासत में है और मामले की आगे की जांच जारी है.

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