- एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह 31 अक्टूबर 2026 को भारतीय वायुसेना के प्रमुख पद से सेवानिवृत्त होंगे
- उनके कार्यकाल में ऑपरेशन सिंदूर और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने जैसे महत्वपूर्ण कदम शामिल थे
- उन्होंने लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस के फ्लाइट टेस्ट डायरेक्टर के रूप में घरेलू रक्षा निर्माण को मजबूती दी
नई दिल्ली. भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह 31 अक्टूबर 2026 को 25 महीने का कार्यकाल पूरा कर सेवानिवृत्त हो जाएंगे. रिटायरमेंट से पहले उन्हें तीन आधिकारिक विदाइयां दी जा चुकी हैं, जबकि उनका कार्यकाल ऑपरेशन सिंदूर, स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा और वायुसेना की युद्धक क्षमता को मजबूत करने जैसे कई अहम कदमों के लिए याद किया जाएगा. इंडियन एयरफोर्स के अगले प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित होंगे, जो 31 अक्टूबर को ही कमान संभालेंगे.
3 ऑफ़िशियल फेयरवेल, राजस्थान सिंह ने भी दी विदाई
न्यूज एजेंसी ANI के अनुसार, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इंडियन एयरफोर्स से रिटायर होने वाले चीफ एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह को 26 अक्टूबर को आधिकारिक विदाई दी थी. इसके बाद 27 अक्टूबर को इंडिया गेट के पास स्थित आकाश ऑफिसर्स मेस में वरिष्ठ वायुसेना अधिकारियों ने उनके सम्मान में फेयरवेल डिनर आयोजित किया. वहीं 28 अक्टूबर को सुब्रतो पार्क स्थित एयर फोर्स ऑडिटोरियम में एयर मुख्यालय की ओर से विदाई समारोह रखा गया. शनिवार को नई दिल्ली स्थित एयर फोर्स स्टेशन में उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा.
ऑपरेशन सिंदूर में नेतृत्व
अमर प्रीत सिंह के कार्यकाल की सबसे चर्चित घटनाओं में ऑपरेशन सिंदूर शामिल रहा है. उनके नेतृत्व में भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सिंदूर और उससे जुड़े सैन्य अभियानों के दौरान अपनी वायु शक्ति का प्रभावी और निर्णायक प्रदर्शन किया. इस दौरान वायुसेना की संचालन क्षमता और त्वरित प्रतिक्रिया की व्यापक चर्चा हुई. एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह लंबे समय से स्वदेशी रक्षा निर्माण और आत्मनिर्भरता के पक्षधर रहे हैं. वह लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस के फ्लाइट टेस्ट डायरेक्टर रह चुके हैं और उन्होंने लगातार घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दिया.

अपनी आखिरी उड़ान के बाद IAF चीफ एपी सिंह. Photo Credit: X/@IAF_MCC)
तेजस और रक्षा तैयारियों पर बेबाक रुख
अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने सार्वजनिक मंचों और समीक्षा बैठकों में तेजस लड़ाकू विमानों की डिलीवरी में देरी, स्क्वाड्रन की कमी और हथियारों की आपूर्ति में विलंब जैसे मुद्दों को खुलकर उठाया. रक्षा तैयारियों से जुड़े मामलों पर उनकी स्पष्टवादिता की अक्सर चर्चा हुई. अमर प्रीत सिंह ने मॉस्को में MiG-29 अपग्रेड प्रोजेक्ट मैनेजमेंट टीम का नेतृत्व भी किया. इस भूमिका में उन्होंने भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान बेड़े के आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण योगदान दिया. फाइटर पायलट, एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट और क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर के रूप में उनके पास 5,000 घंटे से अधिक का उड़ान अनुभव है. हाल ही में उन्होंने सेवानिवृत्ति से पहले अपने पहले प्रशिक्षक रहे रिटायर्ड विंग कमांडर वी.एस. कोछर के साथ किरण ट्रेनर विमान में विशेष उड़ान भी भरी. इसके लिए रक्षा मंत्रालय से विशेष अनुमति ली गई थी.
मिले प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान
भारतीय वायुसेना में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें वर्ष 2019 में अति विशिष्ट सेवा मेडल और वर्ष 2023 में परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM) से सम्मानित किया गया. उनके योगदान को भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण और परिचालन क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण माना जाता है.
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