- TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने महासचिव अभिषेक बनर्जी को बेटे जैसा बताया और उनकी गलतियों को माफ करने की बात कही
- अभिषेक बनर्जी ने कल्याण बनर्जी की आलोचना को स्वीकार किया और पार्टी में मतभेदों के बावजूद संयमित रुख अपनाया
- तृणमूल में अंदरूनी तनाव के बावजूद दोनों नेताओं ने मिलकर पार्टी की मुश्किलों का सामना करने का संकेत दिया
तृणमूल कांग्रेस को बचाने के लिए अध्यक्ष ममता बनर्जी को अपने और भतीजे में से किसी एक को चुनने का अल्टीमेटम देने के कुछ दिनों बाद, पार्टी सांसद कल्याण बनर्जी ने महासचिव अभिषेक बनर्जी के बारे में एक और बयान दिया है, हालांकि इस बार उनका लहजा नरम था. कल्याण बनर्जी ने कहा कि अभिषेक मेरे बेटे जैसे हैं. बेटे की सभी गलतियों को माफ करना पिता का कर्तव्य होता है. अच्छा है कि उन्होंने अपनी गलती समझी. अब हालात चाहे जैसे भी हों, हमें मिलकर लड़ना होगा.
कल्याण बनर्जी ने जिस दिन अल्टीमेटम दिया था, उसके बाद से दो घटनाएं हुई हैं. पहली बात, अभिषेक बनर्जी ने उन पर कोई पलटवार नहीं किया, बल्कि कहा कि उन्हें सांसद की किसी भी बात से कोई दिक्कत नहीं है, और दूसरी बात, राज्य के CID (क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट) ने अभिषेक बनर्जी के घर की तलाशी ली. यह तलाशी विपक्ष के नेता का पद पाने के लिए कथित तौर पर जाली हस्ताक्षर करने के मामले में ली गई थी.
#WATCH | Kolkata | Over his comments on Abhishek Banerjee, TMC MP Kalyan Banerjee says, "He is like my son. It is the work of the father to forgive all faults made by a son. Democracy is under threat in the country. West Bengal never faced a situation where the opposition was… pic.twitter.com/YJ2aS5KGfl
— ANI (@ANI) June 13, 2026
उन्होंने ये बात सुवेंदु अधिकारी के आदेश पर शुरू हुई जांच के बारे में कही. जांच में पूर्व मुख्यमंत्री से जुड़ी एक विज्ञापन एजेंसी की भी पड़ताल की जाएगी, क्योंकि पिछले कुछ सालों में इस फर्म के खातों में कम से कम 635 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए जाने का आरोप है.
कल्याण बनर्जी मेरे राजनीतिक मार्गदर्शक- अभिषेक बनर्जी
टीएमसी में जारी अंदरूनी खींचतान के बीच एक दिन पहले ही पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने संयमित रुख अपनाते हुए वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी के साथ टकराव की अटकलों को विराम देने की कोशिश की थी. अभिषेक ने कल्याण बनर्जी को अपना राजनीतिक मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि उन्हें आलोचना करने का पूरा अधिकार है, जिससे पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों के बीच सुलह और संतुलन का संदेश देने का प्रयास नजर आया.
यह बयान ऐसे समय आया है, जब इससे महज 24 घंटे पहले कल्याण बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी पर हमला बोलते हुए उन पर अहंकारी रवैया अपनाने का आरोप लगाया था. उन्होंने डायमंड हार्बर सांसद से जुड़े सभी कानूनी मामलों से खुद को अलग करने की घोषणा की थी और यहां तक कि पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को अल्टीमेटम भी दे दिया था कि वह अपने भतीजे और उन जैसे वरिष्ठों में से किसी एक को चुनें.

ममता बनर्जी के भतीजे द्वारा सिग्नेचर फर्जीवाड़ा मामले में अपना वकील बदलने के बाद कल्याण बनर्जी का गुस्सा सामने आया था. तृणमूल सांसद, जो इस मामले में अभिषेक बनर्जी का पक्ष रख रहे थे, उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी चर्चा के दूसरा वकील नियुक्त करके उन्हें किनारे कर दिया गया.
दो दिनों में दोनों बनर्जी नेताओं की ओर से सुलह-सफाई वाली बातें यह संकेत दे रही हैं कि वे पार्टी की अंदरूनी मुश्किलों का मिलकर सामना करना चाहते हैं. चुनाव में हार के एक महीने बाद तृणमूल के कई सांसदों ने पार्टी छोड़ दी थी. बड़ी संख्या में विधायकों ने भी यह साफ कर दिया है कि वे खुद को असली तृणमूल के प्रतिनिधि के तौर पर पेश करेंगे और ममता बनर्जी के नेतृत्व को मान्यता नहीं देंगे.
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