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जेल में बंद होकर भी गैंगस्टर बाहर कैसे चलवा देते हैं गोली? बिश्नोई गैंग पर उठे सवाल, ऑपरेशन की पूरी कहानी

क्या सिर्फ जेल भेज देने से गैंगस्टरों का नेटवर्क खत्म हो जाता है? टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस के बाद यह सवाल फिर चर्चा में है. दाऊद इब्राहिम, अरुण गवली, अश्विन नाइक से लेकर लॉरेंस बिश्नोई तक, कई ऐसे नाम रहे हैं जिनके बारे में आरोप लगते रहे कि सलाखों के पीछे रहते हुए भी उनका असर बाहर बना रहा.

जेल में बंद होकर भी गैंगस्टर बाहर कैसे चलवा देते हैं गोली? बिश्नोई गैंग पर उठे सवाल, ऑपरेशन की पूरी कहानी
जेल में बंद गैंगस्टर बाहर कैसे चलाते हैं नेटवर्क?
अल्टर्ड बाय NDTV
  • मोबाइल, नेटवर्क और जेल सिस्टम... कैसे चलते हैं गैंग के ऑर्डर
  • जेल में बंद, फिर भी गैंग ऑपरेट कैसे करते हैं? टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस के बाद बिश्नोई गैंग पर उठे बड़े सवाल
  • सलाखों के पीछे से अपराध का खेल, अंडरवर्ल्ड की पुरानी रणनीति
मुंबई:

कानून प्रवर्तन एजेंसियों के नजरिए से जेल अपराधी को नियंत्रित करने, सुधारने और सजा देने की जगह होती है. लेकिन अंडरवर्ल्ड के कुछ गैंग के लिए जेल के अलग फायदे होते हैं. कुछ गैंग जेल का इस्तेमाल अपने दुश्मनों से सुरक्षित रहने, नए सदस्यों की भर्ती करने और गैंग के ऑपरेशन चलाने के लिए करते हैं. एक्टर टाइगर श्रॉफ पर हाल में हुई कथित फायरिंग की घटना में बिश्नोई गैंग की कथित भूमिका इस बात का उदाहरण है कि किसी गैंगस्टर को जेल में डाल देना हमेशा उसके बाहरी नेटवर्क को रोक नहीं पाता. लॉरेंस बिश्नोई और अनमोल बिश्नोई दोनों अलग-अलग जेलों में बंद हैं, लेकिन पिछले तीन वर्षों में मुंबई में हुई कई बड़ी फायरिंग घटनाओं के आदेश देने के आरोप उन पर लगाए जाते रहे हैं.

'सत्या' में दिखाई गई थी कड़वी सच्चाई

फिल्म सत्या में पुलिस कमिश्नर अमोद शुक्ला (परेश रावल) और मुख्यमंत्री के बीच का एक संवाद ने इस समस्या को बहुत ही प्रभावी ढंग से दर्शाया है. हताश कमिश्नर मुख्यमंत्री से कहते हैं, 'होता क्या है, हम उन्हें अरेस्ट करते हैं और वो छूट जाते हैं. अगर पकड़े गए तो जेल के अंदर बैठे-बैठे ऑपरेट करेंगे और भाग गए तो देश के बाहर बैठ के ऑपरेट करेंगे... और हम कुछ नहीं कर सकते.' यह संवाद उन गैंगस्टरों के सामने पुलिस की बेबसी की कड़वी हकीकत को दिखाता है, जो जेल में रहते हुए भी अपना नेटवर्क चलाते रहते हैं.

दाऊद से लॉरेंस तक जारी है पुरानी कहानी

लॉरेंस बिश्नोई गुजरात की साबरमती जेल में बंद है, जबकि उसका भाई अनमोल दिल्ली की तिहाड़ जेल में कैद है. केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रतिबंधात्मक आदेशों के कारण दोनों को अन्य जांच एजेंसियों की हिरासत में नहीं दिया जा सका. हालांकि जेल से हमलों के आदेश देने के आरोप झेलने वाले वे पहले अपराधी नहीं हैं. 1990 के दशक के मुंबई अंडरवर्ल्ड में कई गैंगस्टर जेल के भीतर से अपने नेटवर्क चलाते थे.

90 के दशक और 21वीं सदी के शुरुआती वर्षों में दाऊद इब्राहिम, छोटा राजन और अबू सलेम विदेशों से मुंबई में हमलों के आदेश देते थे, जबकि अरुण गवली और अश्विन नाइक जैसे गैंगस्टर भारतीय जेलों में रहते हुए भी सक्रिय बताए जाते थे. मुंबई, पुणे, ठाणे और नासिक की जेलों से वे केवल शूटरों की भर्ती ही नहीं करते थे, बल्कि रंगदारी वसूलने और निशाने पर मौजूद लोगों की हत्या के निर्देश भी देते थे.

अश्विन नाइक पर तो यह आरोप भी लगा था कि जेल में रहते हुए उसने अपनी पत्नी नीता नाइक की हत्या के ऑर्डर दिए थे, क्योंकि उसे संदेह था कि उसकी पत्नी का एक पुलिसकर्मी के साथ संबंध है. हालांकि अदालत में यह आरोप साबित नहीं हो सका और नाइक इस मामले में बरी हो गया.

वहीं अरुण गवली पर आरोप लगा था कि जेल में रहते हुए उन्होंने जयंत जाधव की हत्या करवाई. जयंत जाधव शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे के करीबी माने जाते थे और कथित तौर पर गवली को एक जेल से दूसरी जेल में स्थानांतरित कराने में उनकी भूमिका थी. आरोप है कि इसी वजह से नाराज होकर गवली ने उनकी हत्या का आदेश दिया.

भ्रष्टाचार है बड़ी जड़

जेल से गैंग ऑपरेशन चलाने में भ्रष्टाचार बड़ी भूमिका निभाता है. लगभग हर गैंग का एक जेल नेटवर्क होता था, जिसके सदस्य रिश्वत और अन्य सुविधाएं देकर भ्रष्ट जेल कर्मचारियों से संपर्क बनाए रखते थे. इसके जरिये गैंग लीडरों को आरामदायक सुविधाएं और बाहरी दुनिया से संवाद के रास्ते उपलब्ध कराए जाते थे.

गैंग लीडर वकीलों से मुलाकात या कानूनी रूप से मिलने आने वाले लोगों के जरिए अपने मैसेज बाहर पहुंचाते थे. जमानत पर रिहा होने वाले, बरी हो चुके, सजा पूरी कर चुके या अदालत में पेशी के लिए बाहर ले जाए जाने वाले कैदी भी कई बार मैसेंजर की भूमिका निभाते थे.

जेल के भीतर तस्करी करके पहुंचाए गए मोबाइल फोन माफिया सरगनाओं को उनके गुर्गों, रंगदारी के शिकार लोगों और यहां तक कि मीडिया से भी जोड़ते रहे हैं. मार्च 2023 में लॉरेंस बिश्नोई ने जेल में रहते हुए एक हिंदी समाचार चैनल को दो इंटरव्यू दिए थे. पहला इंटरव्यू पंजाब पुलिस की हिरासत में और दूसरा जयपुर सेंट्रल जेल में रहते हुए बताया गया था.

2024 के मध्य में सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वह साबरमती जेल से कथित तौर पर पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी को वीडियो कॉल पर ईद की शुभकामनाएं देते दिखाई दिए थे. उसी वर्ष हाशिम बाबा नामक एक कैदी ने पुलिस को बताया था कि बिश्नोई के पास मोबाइल फोन तक पहुंच थी और वह बाहरी दुनिया से संपर्क में था.

महाराष्ट्र में अपनी ईमानदार छवि के लिए जानी जाने वाली जेल अधिकारी स्वाति साठे ने कई जेलों में छापेमारी के दौरान कैदियों के पास से मोबाइल फोन बरामद किए थे.

इसलिए भी नरम रहता है रवैया

भ्रष्टाचार के अलावा, कुछ मामलों में किसी कैदी को अनौपचारिक रूप से मोबाइल फोन और अन्य सुविधाएं इसलिए भी मिल जाती हैं क्योंकि उसे किसी राज्य की खुफिया एजेंसियों का 'एसेट' माना जाता है. यदि उसका नेटवर्क दुश्मन एजेंटों या आपराधिक नेटवर्क पर नजर रखने में उपयोगी माना जाता है, तो बदले में उसकी सुरक्षा और सुविधाओं का ध्यान रखा जा सकता है. ऐसी स्थिति में उसके आपराधिक मामलों के प्रति अपेक्षाकृत नरम रवैया अपनाए जाने के आरोप भी समय-समय पर लगते रहे हैं.

जहां तक टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले का सवाल है, मुंबई पुलिस अनमोल बिश्नोई की तिहाड़ जेल से हिरासत हासिल करने का प्रयास कर सकती है. इससे पहले लॉरेंस बिश्नोई को साबरमती जेल से हिरासत में लेने के प्रयास किए गए थे, लेकिन वे सफल नहीं हो सके. मुंबई पुलिस ने इस संबंध में गृह मंत्रालय को भी पत्र लिखा था, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली थी.

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