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लॉरेंस बिश्नोई को क्यों हाथ नहीं लगा पा रही है मुंबई पुलिस ? जानिए कौन सी कानूनी दीवार दे रही है 'सुरक्षा कवच'

सलमान खान से जुड़े केस से लेकर बाबा सिद्दीकी और टाइगर श्रॉफ पर हमले के मामले तक में लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम सामने आया. ऐसे में जानिए साबरमती जेल में बंद लॉरेंस को मुंबई पुलिस कस्टडी में लेकर पूछताछ क्यों नहीं कर पा रही है.

लॉरेंस बिश्नोई को क्यों हाथ नहीं लगा पा रही है मुंबई पुलिस ? जानिए कौन सी कानूनी दीवार दे रही है 'सुरक्षा कवच'

लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने पिछले तीन सालों में मुंबई के भीतर एक के बाद एक चार बड़ी वारदातों को अंजाम देकर सनसनी फैला दी है. पहले अभिनेता सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग, फिर एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की सरेआम हत्या, फिल्म डायरेक्टर रोहित शेट्टी से रंगदारी की मांग और हाल ही में अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर जानलेवा हमला. इन सभी मामलों में किसी न किसी तरह से लॉरेंस बिश्नोई का नाम सामने आया है. लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि इन तमाम संगीन जुर्मों के बावजूद मुंबई पुलिस आज तक लॉरेंस बिश्नोई से एक बार भी आमने-सामने बैठकर पूछताछ नहीं कर पाई है. गुजरात की साबरमती जेल में बंद इस खूंखार गैंगस्टर को कानून के एक ऐसे पेंच का सुरक्षा कवच मिला हुआ है, जिसके आगे मुंबई पुलिस बेबस नजर आ रही है. पुलिस की इसी लाचारी का फायदा उठाकर बिश्नोई गैंग के गुर्गे लगातार वारदातों को अंजाम दे रहे हैं.

कानून का वो पेंच जिसने पुलिस के हाथ बांधे

लॉरेंस बिश्नोई को मुंबई पुलिस की पहुंच से दूर रखने के पीछे केंद्र सरकार का एक बड़ा प्रशासनिक आदेश है. साल 2023 के अप्रैल महीने में गुजरात एटीएस ने लॉरेंस बिश्नोई को ड्रग्स तस्करी के एक मामले में गिरफ्तार किया था, जिसके बाद उसे साबरमती जेल भेज दिया गया. इसी दौरान केंद्रीय गृह मंत्रालय ने लॉरेंस बिश्नोई के खिलाफ आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 268 लागू कर दी.

यह धारा किसी भी कैदी को कानूनन जेल से बाहर ले जाने पर रोक लगाती है. सरकार ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बिगड़ने का हवाला देकर यह फैसला लिया था ताकि लॉरेंस को एक राज्य से दूसरे राज्य ले जाते समय गैंगवार या हिंसा का खतरा न हो. इस आदेश के कारण कोई भी अदालत लॉरेंस के खिलाफ सामान्य 'प्रोडक्शन वारंट' जारी नहीं कर सकती और न ही कोई पुलिस उसे अपनी कस्टडी में ले सकती है.

वीडियो कॉलिंग वाली पूछताछ से नहीं टूटते अपराधी

मुंबई पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि जेल के भीतर जाकर या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पूछताछ करना महज एक औपचारिकता बनकर रह जाता है. लॉरेंस बिश्नोई जैसे शातिर और पेशेवर अपराधियों के मुंह से सच उगलवाने के लिए उन्हें अपनी हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ करना बेहद जरूरी होता है. कस्टडी न मिलने के कारण मुंबई पुलिस केवल उन छोटे प्यादों, शूटरों और हथियार सप्लाई करने वालों को पकड़कर ही अपनी जांच समेटने को मजबूर है, जिन्हें इस गैंग ने पैसे देकर काम पर रखा था. असली मास्टरमाइंड तक कानून के हाथ नहीं पहुंच पा रहे हैं.
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छोटा भाई अनमोल भी तिहाड़ में सुरक्षित

लॉरेंस बिश्नोई अकेला नहीं है जिसे इस तरह का कानूनी संरक्षण मिला हुआ है. उसके छोटे भाई अनमोल बिश्नोई को भी दिल्ली की तिहाड़ जेल में इसी तरह की कानूनी सुरक्षा मिली हुई है. कथित तौर पर अनमोल बिश्नोई भी जेल के भीतर से ही गिरोह के शूटरों की भर्ती करने, उन्हें हथियार और पैसा पहुंचाने और टारगेट तय करने के काम को अंजाम दे रहा है. जेल की चारदीवारी के भीतर से इन दोनों भाइयों का पूरा गैंग चलाना और लगातार बड़ी वारदातों के ऑर्डर देना सुरक्षा एजेंसियों और कानून व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है.
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छोटा राजन और दाऊद इब्राहिम का वो पुराना किस्सा

मुंबई पुलिस के साथ अपराधियों का ऐसा बर्ताव कोई नया नहीं है. साल 2015 में जब अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन को इंडोनेशिया के बाली से गिरफ्तार करके भारत लाया गया था, तब उसे मुंबई पुलिस को सौंपने के बजाय दिल्ली की तिहाड़ जेल भेज दिया गया था. उस समय छोटा राजन ने दावा किया था कि मुंबई पुलिस के कुछ बड़े अधिकारी उसके जानी दुश्मन दाऊद इब्राहिम के लिए काम करते हैं, इसलिए मुंबई की जेलों में उसकी जान को बड़ा खतरा है. तब भी सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देकर छोटा राजन को मुंबई पुलिस की सीधी कस्टडी से दूर रखा था, और आज लगभग वैसा ही कानूनी घेरा लॉरेंस बिश्नोई को भी मुंबई पुलिस की मार से बचाए हुए है.ऐसे में सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि मुंबई पुलिस लॉरेंस को हिरासत में क्यों नहीं ले पा रही, बल्कि यह भी है कि जेल से बाहर कथित तौर पर सक्रिय इस नेटवर्क की कमांड चेन कैसे काम करती है और उसे तोड़ा कैसे जाए. 
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