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'मोबाइल की लत के कारण बच्चा हो गया हिंसक', वकील की दलील सुन कोर्ट ने दी जमानत

आरोपी छात्र के पिता की ओर से अदालत में पेश हुए वकील मनबीर सिंह राठी ने बताया कि पूछताछ के दौरान बच्चे ने स्वीकार किया कि वह ऐसे मोबाइल गेम खेलता था जिनमें खिलाड़ियों को वर्चुअल कैरेक्टर पर हमला करके स्कोर मिलते हैं.

'मोबाइल की लत के कारण बच्चा हो गया हिंसक', वकील की दलील सुन कोर्ट ने दी जमानत
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हरियाणा के पंचकूला में 6 साल की बच्ची पर हुए दिल दहला देने वाले हमले में अब एक नया पहलू सामने आया है. मामले में आरोपी 8 वर्षीय छात्र ने पूछताछ के दौरान बताया कि वह मोबाइल पर हिंसक और आक्रामक वीडियो गेम खेलने का आदी था. लड़के के परिवार की ओर से पैरवी कर रहे वकील का दावा है कि इन गेम्स में लगातार हमला करने और ज्यादा स्कोर हासिल करने की प्रवृत्ति बच्चों के व्यवहार पर असर डाल सकती है.

आरोपी छात्र के पिता की ओर से अदालत में पेश हुए वकील मनबीर सिंह राठी ने बताया कि पूछताछ के दौरान बच्चे ने स्वीकार किया कि वह ऐसे मोबाइल गेम खेलता था जिनमें खिलाड़ियों को वर्चुअल कैरेक्टर पर हमला करके स्कोर मिलते हैं. उनके मुताबिक, इन खेलों में जितना ज्यादा अटैक किया जाता है, उतने ज्यादा पॉइंट्स हासिल होते हैं.

लत बन जाती है स्कोर बनाने की आदत

राठी ने कहा कि यह गंभीर चिंता का विषय है क्योंकि कम उम्र के बच्चे कई बार गेम्स की वर्चुअल वर्ल्ड और रियल वर्ल्ड के बीच फर्क नहीं समझ पाते. उन्होंने कहा कि गेम के कैरेक्टर को दर्द नहीं होता, इसलिए बच्चे लगातार जीतने और ज्यादा स्कोर बनाने के लिए खेलते रहते हैं. धीरे-धीरे यह आदत लत का रूप ले सकती है और इससे बाहर निकलना आसान नहीं होता.

उन्होंने बताया कि लड़के के माता-पिता को निर्देश दिया गया है कि वे बच्चे को मोबाइल फोन से दूर रखें और उसकी नियमित काउंसलिंग कराएं ताकि उसके व्यवहार में सुधार लाया जा सके.

परिवार ने PUBG खेलने का भी लगाया आरोप

इससे पहले 2 नवंबर को पीड़ित बच्ची के चाचा फाजिल ने भी दावा किया था कि आरोपी लड़का PUBG और इसी तरह के अन्य हिंसक गेम खेलता था. उनका कहना था कि जांच के दौरान यह बात सामने आई कि बच्चा आक्रामक किस्म के गेम्स खेलने का आदी था और यही उसके व्यवहार का एक कारण हो सकता है. हालांकि, इस दावे को लेकर अभी तक किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी या आधिकारिक रिपोर्ट की पुष्टि सामने नहीं आई है.

जुवेनाइल होम से रिहा हुआ आरोपी

मामले में आरोपी 8 वर्षीय छात्र को गुरुवार को जुवेनाइल कस्टडी से रिहा कर दिया गया. बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि बच्चे का पहले किसी हिंसक व्यवहार का रिकॉर्ड नहीं रहा है. इसके साथ ही लंबे समय तक ऑब्जर्वेशन होम में रहने से उसकी पढ़ाई और मानसिक विकास पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है.

इसके बाद जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने उसे राहत देते हुए रिहाई की अनुमति दे दी. बच्चे के माता-पिता ने बोर्ड को आश्वासन दिया कि वे उसके काउंसलिंग, व्यवहार सुधार और पुनर्वास की जिम्मेदारी उठाएंगे.

सोशल मीडिया से पहचान उजागर करने वाली सामग्री हटाने का आदेश

जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने इस मामले से जुड़े वीडियो, तस्वीरें और अन्य सामग्री, जिनसे आरोपी बच्चे की पहचान सामने आ सकती है, उन्हें सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों से हटाने का निर्देश भी दिया है.

यह आदेश किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 74 के तहत दायर आवेदन पर दिया गया. मामले की जांच कर रहे अधिकारी को 27 नवंबर तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा गया है.

क्या हुआ था 28 अक्टूबर को?

यह सनसनीखेज घटना 28 अक्टूबर को पंचकूला के एक सरकारी स्कूल में हुई थी. आरोप है कि कक्षा 3 में पढ़ने वाले 8 वर्षीय छात्र ने किंडरगार्टन की 6 वर्षीय बच्ची पर स्कूल की कक्षा के अंदर हमला कर दिया.

आरोपों के मुताबिक, बच्ची के सिर पर कई बार ईंट से वार किया गया, उसे बेंच से टकराया गया, टाई पकड़कर घसीटा गया और कई बार लात मारी गई. हमले में बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई थी.

घटना के बाद उसे पहले पंचकूला सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया और फिर बेहतर इलाज के लिए चंडीगढ़ स्थित पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) रेफर किया गया. गुरुवार सुबह बच्ची को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और वह अपने घर लौट गई.

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