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This Article is From Feb 24, 2026

हल्द्वानी रेलवे भूमि विवाद : SC ने मांगी स्टेटस रिपोर्ट, पूछा- कौन-कौन से परिवार होंगे पुनर्वास के पात्र

हल्द्वानी रेलवे भूमि विवाद केस में SC ने सरकार से 31 मार्च तक एक विस्तृत रिपोर्ट तलब की है. इस रिपोर्ट में प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि साल 2019 की पुनर्वास नीति के तहत अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं.

हल्द्वानी रेलवे भूमि विवाद : SC ने मांगी स्टेटस रिपोर्ट, पूछा- कौन-कौन से परिवार होंगे पुनर्वास के पात्र
  • SC ने हल्द्वानी में रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण हटाने के मामले में पुनर्वास के लिए कैंप लगाने के निर्देश दिए.
  • प्रभावित परिवारों को PM आवास योजना के तहत आवेदन में मदद की व्यवस्था करने को कहा गया.
  • कोर्ट ने सरकार से 31 मार्च तक रिपोर्ट मांगी है, जिसमें 2019 की पुनर्वास नीति के बारे में पूछा है.
नई दिल्ली:

हल्द्वानी में रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण हटाने से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. SC ने प्रभावित होने वाले परिवारों की मानवीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए निर्देश दिया है कि वहां पुनर्वास के लिए विशेष कैंप लगाए जाएं. SC ने सरकार से 31 मार्च तक रिपोर्ट तलब की है. इस रिपोर्ट में प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि साल 2019 की पुनर्वास नीति के तहत अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं. साथ ही, कोर्ट ने विशेष रूप से यह भी पूछा है कि इस नीति के मानकों के आधार पर किन-किन परिवारों को पुनर्वास सहायता प्राप्त करने का कानूनी अधिकार होगा, ताकि पात्र लोगों की पहचान कर उन्हें राहत दी जा सके.


सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

  • गतिरोध अनिश्चितकाल तक जारी नहीं रह सकता

  • प्रभावित परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन करने में मदद के लिए मौके पर विशेष पुनर्वास कैंप लगाए जाएं 
  • रेलवे की ओर से बताया गया कि परियोजना के तहत लाइन के रियलाइन्मेंट के लिए 30.65 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है
  • साथ ही, जिन संरचनाओं को ध्वस्त किया गया है, उनके लिए प्रत्येक प्रभावित परिवार को छह महीने की अवधि तक 2000 रुपये प्रतिमाह देने का प्रस्ताव है 
  • मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने याचिकाकर्ताओं की आर्थिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया अधिकांश परिवार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) की श्रेणी में आएंगे
  •  अदालत ने कहा कि यह अत्यंत आवश्यक है कि प्रत्येक परिवार की पात्रता का निर्धारण किया जाए, बशर्ते वे प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन प्रस्तुत करें 
  • पीठ ने दोहराया कि पुनर्वास प्रक्रिया को स्पष्ट और पारदर्शी ढंग से आगे बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि पात्र परिवारों को योजना का लाभ मिल सके और परियोजना से जुड़ा गतिरोध समाप्त हो 
  • वहीं  सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि कुछ परिवार छोटे-छोटे भूखंडों के स्वामी के रूप में चिन्हित किए गए है
  • यदि उनकी भूमि ली जाती है तो वह विधिवत अधिग्रहण की कार्यवाही के तहत ही ली जाएगी 
  • हालांकि, अतिक्रमणकारियों के संबंध में केंद्र की ओर से कहा गया कि वे वहीं पर पुनर्वास की मांग पर जोर नहीं दे सकते
  •  क्योंकि उक्त भूमि बड़े पैमाने पर रेलवे विस्तार परियोजना के लिए आवश्यक है
  • सरकार ने यह भी बताया कि पात्र लोगों के पुनर्वास के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना लागू है, जिसके तहत याचिकाकर्ता आवेदन कर सकते हैं 
  • अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक परिवार की पीएम आवास योजना के तहत पात्रता का निर्धारण तभी होगा जब वे योजना के तहत आवेदन प्रस्तुत करेंगे 
  • सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि जिला कलेक्टर, अन्य राजस्व अधिकारी तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण  मिलकर स्थल पर पुनर्वास कैंप आयोजित करें, ताकि प्रत्येक परिवार का मुखिया प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन कर सके 
  • कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव, जिला एवं उपमंडल विधिक सेवा प्राधिकरणों के सचिव भी कैंप के दौरान स्थल पर उपस्थित रहें
  • राजस्व अधिकारियों को आवेदन प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग देने का निर्देश दिया गया है
  • पीठ ने कहा कि वह सराहना करेगी यदि आवेदन जमा करने की प्रक्रिया 31 मार्च 2026 तक पूरी कर ली जाए
  • साथ ही, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिया गया कि जब तक सभी पात्र कब्जाधारी आवेदन नहीं कर लेते, तब तक कैंप आयोजित किए जाते रहें 
  • अदालत ने दोहराया कि परियोजना से जुड़ा गतिरोध लंबे समय तक नहीं चल सकता और पुनर्वास की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाना आवश्यक है.

हल्द्वानी मे रेलवे की जमीन पर अवैध कब्जे को हटाने के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर  सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा था. ये मामला करीब 50 हजार की आबादी से जुड़ा है. फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा रखी है. पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड प्रशासन से पूछा था कि राज्य सरकार के पास इन बस्तियों में रहने वाले लोगों को दूसरी जगह बसाने के लिए क्या मास्टर प्लान है.

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