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जनअभियोग तक कैसे पहुंची बात... ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी आंदोलन की पूरी क्रोनोलॉजी समझिए

जन महाभियोग को इंडिया गठबंधन की आंदोलनकारी रणनीति का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है, जिसका ग्रैंड फिनाले 1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली में देखने को मिल सकता है. इस तरह अक्टूबर का पूरा महीना विपक्ष और सरकार के बीच राजनीतिक टकराव, धरना-प्रदर्शन और शक्ति प्रदर्शन की राजनीति के रूप में याद किया जा सकता है, जिसमें विपक्ष लगातार सरकार को घेरने की कोशिश करता दिखाई दिया.

जनअभियोग तक कैसे पहुंची बात... ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी आंदोलन की पूरी क्रोनोलॉजी समझिए
"मॉक संसद" आयोजित करने की योजना
ANI

इंडिया गठबंधन की ओर से आयोजित होने जा रहे 'जन महाभियोग' की नींव दरअसल एक महीने पहले ही पड़ गई थी. 30 सितंबर को हुई इंडिया गठबंधन की बैठक के बाद कांग्रेस ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए सड़क पर उतरकर आंदोलन करने का फैसला किया, जिसमें उसे गठबंधन के अन्य दलों का भी साथ मिला. सबसे पहले कांग्रेस ने देशभर में जिला स्तर पर प्रदर्शन किए. इसके बाद संसद से चुनाव आयोग तक मार्च निकाला गया, जिसे इंडिया गठबंधन का सबसे बड़ा शक्ति प्रदर्शन माना गया. इस मार्च में विपक्ष के लगभग सभी प्रमुख नेता शामिल हुए. यह मार्च खास तौर पर उस घटना के लिए याद किया जाएगा जब राहुल गांधी आकाशवाणी भवन में प्रवेश कर धरने पर बैठ गए थे.

राहुल गांधी इससे पहले प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देकर इस तरह की आक्रामक राजनीति की झलक दिखा चुके थे. वहीं, सुनहरी बाग रोड स्थित अपने आवास से गांधी स्मृति तक इंडिया गठबंधन के सांसदों का एक साथ मार्च करना भी राजनीतिक रूप से एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम रहा. इसके बाद इंडिया गठबंधन ने 'लंच डिप्लोमेसी' की रणनीति अपनाई. दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित एक रेस्तरां में भोजन करने के बाद सांसदों ने प्रदर्शन किया. पहले दिन सांसद बसों के जरिए चुनाव आयोग कार्यालय जाना चाहते थे. लेकिन उन्हें रास्ते में ही रोक दिया गया. दूसरे दिन सांसद लंच के बाद राजघाट पहुंचे और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी.

इंडिया गठबंधन के नेताओं ने राष्ट्रपति से भी मुलाकात की 

इंडिया गठबंधन के नेताओं ने राष्ट्रपति से मुलाकात कर SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ ज्ञापन भी सौंपा. इसे उनकी राजनीतिक रणनीति का महत्वपूर्ण चरण माना गया. इसके बाद बाराखंभा रोड से भगवान दास रोड, मंडी हाउस तक मार्च निकाला गया, जिसे इंडिया गठबंधन का एक और बड़ा शक्ति प्रदर्शन माना गया. मार्च के बाद गठबंधन के नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा. इस कार्यक्रम की व्यापक चर्चा हुई.

राहुल गांधी  ने कहा था- 'अब तांडव होगा'

अपने आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए राहुल गांधी ने अपने आवास पर इंडिया गठबंधन के नेताओं को चाय पर आमंत्रित किया, जिसमें गठबंधन के लगभग सभी बड़े नेता शामिल हुए. इसी दौरान राहुल गांधी के उस बयान की भी खूब चर्चा हुई, जिसमें उन्होंने कहा था, "अब तांडव होगा. यह शिव की बारात है, जिसे शामिल होना है वह आ सकता है, हम किसी को रोकेंगे नहीं."

1 नवंबर को फिर विपक्षी दलों की रैली

इसके बाद विभिन्न संगठनों और समूहों ने भी 1 नवंबर को प्रस्तावित इंडिया गठबंधन की रैली को समर्थन देने की घोषणा की. इसी बीच राहुल गांधी अचानक इंडिया गेट पहुंचे और उत्तराखंड की अंकिता भंडारी के माता-पिता के साथ धरने पर बैठ गए. उनके साथ प्रियंका गांधी और कांग्रेस के अन्य नेता भी मौजूद थे. अंकिता भंडारी की 2022 में ऋषिकेश के एक रिजॉर्ट में हत्या कर दी गई थी, जहां वह रिसेप्शनिस्ट के रूप में कार्यरत थीं. इन घटनाओं के जरिए राहुल गांधी लगातार सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश करते रहे. हालांकि, दशहरा अवकाश के दौरान धरना-प्रदर्शन का सिलसिला कुछ समय के लिए थम गया, लेकिन कांग्रेस का पूरा फोकस 1 नवंबर को होने वाली रैली पर बना रहा.

दिल्ली पुलिस ने रैली की अनुमति दे दी है. इसी दौरान "मॉक संसद" आयोजित करने की योजना भी बनाई गई. शुरुआत में इसे रामलीला मैदान में आयोजित करने की योजना थी. लेकिन अनुमति नहीं मिलने पर अशोक होटल का विकल्प तलाशा गया. वहां भी अनुमति नहीं मिलने के बाद अब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के राजाजी मार्ग स्थित आवास पर इसका आयोजन किया जा रहा है, जिसे "जन महाभियोग" नाम दिया गया है.

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