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सैयद सुहैल का शो: जन्माष्टमी पर राधा-कृष्ण ने पहने 120 करोड़ के गहने, रत्नजड़ित मुख्य मुकुट पहनाया

ग्वालियर के ऐतिहासिक गोपाल मंदिर में जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भगवान राधा-कृष्ण का ₹120 करोड़ से अधिक मूल्य के बेशकीमती रत्नों व आभूषणों से भव्य श्रृंगार किया गया. जानें मुकुट, नौलखा हार और सुरक्षा के इंतजामों की पूरी जानकारी.

सैयद सुहैल का शो: जन्माष्टमी पर राधा-कृष्ण ने पहने 120 करोड़ के गहने, रत्नजड़ित मुख्य मुकुट पहनाया
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देशभर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की भारी धूम मची हुई है. कृष्ण मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना के भव्य आयोजन किए जा रहे हैं. मंदिरों को रंग-बिरंगी लाइनों और सुगंधित फूलों से दुल्हन की तरह सजाया गया है, जहां भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी की प्रतिमाओं का अत्यंत आकर्षक व अलौकिक श्रृंगार किया गया है. इस पावन अवसर पर मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित कृष्ण मंदिर में श्रद्धालुओं को अद्भुत राजसी वैभव के दर्शन हो रहे हैं, जहां भगवान का श्रृंगार लगभग ₹120 करोड़ मूल्य के आभूषणों से किया गया है.

बेशकीमती रत्न और करोड़ों के आभूषण

भगवान के इस दिव्य श्रृंगार में उपयोग किए गए प्राचीन आभूषणों में सोना, चांदी, हीरे, मोती, पन्ना, माणिक और पुखराज जैसे दुर्लभ व बेशकीमती रत्न शामिल हैं. ग्वालियर के इस गोपाल मंदिर में श्रीकृष्ण को जो रत्नजड़ित मुख्य मुकुट पहनाया जाता है, उसकी अनुमानित कीमत ₹25 करोड़ बताई जा रही है. इसके साथ ही ₹1.25 करोड़ की लागत वाला एक अन्य सोने का मुकुट भी शोभा बढ़ा रहा है. वहीं, राधारानी के रत्नजड़ित मुकुट का वजन तीन तोले से अधिक है. उनके सात लड़ियों वाले विशेष हार में 62 असली मोती और 55 पन्ने जड़े हुए हैं. केवल इस दिव्य हार की कीमत ही करीब ₹35 करोड़ आंकी गई है. इसके अतिरिक्त, अन्य आभूषणों का मूल्य भी लाखों रुपये में है. 

शाही बर्तन और सुरक्षा के कड़े इंतजाम

भगवान की सेवा और भोग के लिए उपयोग में लाए जाने वाले बर्तन भी बेहद खास हैं; जिस बर्तन में कान्हा को भोग लगाया जाता है, उसकी कीमत करीब ₹30 लाख है. सुरक्षा कारणों से सिंधिया राजवंश के समय के इन पौराणिक आभूषणों को वर्षभर बैंक लॉकर में सुरक्षित रखा जाता है और केवल जन्माष्टमी पर बाहर निकाला जाता है. नगर निगम की विशेष समिति की देखरेख में इन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच मंदिर लाया गया. जन्मोत्सव संपन्न होने के पश्चात् इन आभूषणों को पुनः बैंक लॉकर में सुरक्षित जमा करा दिया जाएगा. साल में केवल एक बार होने वाले इस दुर्लभ श्रृंगार के दर्शन के लिए मंदिर परिसर में त्रिस्तरीय सुरक्षा बल तैनात किया गया है, जहाँ करीब डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है.  

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